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Gurugram News: डीएचएल लॉजिस्टिक्स में हेराफेरी में दंपती को एक साल की सजा
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पत्नी के नाम पर दर्ज करा ली थी फर्म, ग्राहक से आने वाले रुपये जा रहे थे पत्नी के फर्म में
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। डीएचएल लॉजिस्टिक्स कंपनी में करीब 2.85 करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी के मामले में जिला अदालत ने दंपती को एक साल की सजा देते हुए दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हरि किशन की अदालत ने विनोद कुमार गौर और उनकी पत्नी शांति देवी को अमानत में खयानत का दोषी करार दिया है। हालांकि, अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दोनों को धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी कर दिया।
डीएचएल लॉजिस्टिक्स कंपनी की तरफ से नरेंद्र कुमार ने 2015 में अदालत में दायर की याचिका में बताया कि 2008 से 2013 के बीच कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव रहे विनोद गौर ने क्रेडिट एंड कलेक्शन मैनेजर विवेक सिन्हा और अपनी पत्नी शांति देवी के साथ मिलकर ग्राहकों से मिलने वाले भुगतान में हेराफेरी की। आरोपी की पत्नी शांति देवी के नाम से प्रोपराइटरशिप फर्म आर.के. लॉजिस्टिक सॉल्यूशंस का पंजीकरण कराया गया। हालांकि, इस फर्म के इनवॉइस 2009-10 से ही जारी किए जा रहे थे, जिन पर आरोपियों का आवासीय पता और विनोद गौर का मोबाइल नंबर दर्ज था।
वर्ष 2013 - 2014 में कंपनी में हुए आंतरिक ऑडिट और एक पूर्व कर्मचारी के कबूलनामे के बाद कंपनी को अपने खातों में करीब 2.85 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का पता चला। 8 जुलाई 2014 को विवाद सुलझाने के लिए गुरुग्राम के कंट्री सूट्स एंड इन में एक सेटलमेंट एग्रीमेंट हुआ, जिसमें विनोद गौर ने एक करोड़ का भुगतान करने पर सहमति जताई और चेक सौंपे। चेक बाउंस हो गया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि विनोद गौर के पास डीएचएल में ग्राहक खातों को संभालने की जिम्मेदारी थी। सेवाओं का भुगतान डीएचएल के बजाय उनकी पत्नी की फर्म के खाते में प्राप्त किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। डीएचएल लॉजिस्टिक्स कंपनी में करीब 2.85 करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी के मामले में जिला अदालत ने दंपती को एक साल की सजा देते हुए दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हरि किशन की अदालत ने विनोद कुमार गौर और उनकी पत्नी शांति देवी को अमानत में खयानत का दोषी करार दिया है। हालांकि, अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दोनों को धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी कर दिया।
डीएचएल लॉजिस्टिक्स कंपनी की तरफ से नरेंद्र कुमार ने 2015 में अदालत में दायर की याचिका में बताया कि 2008 से 2013 के बीच कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव रहे विनोद गौर ने क्रेडिट एंड कलेक्शन मैनेजर विवेक सिन्हा और अपनी पत्नी शांति देवी के साथ मिलकर ग्राहकों से मिलने वाले भुगतान में हेराफेरी की। आरोपी की पत्नी शांति देवी के नाम से प्रोपराइटरशिप फर्म आर.के. लॉजिस्टिक सॉल्यूशंस का पंजीकरण कराया गया। हालांकि, इस फर्म के इनवॉइस 2009-10 से ही जारी किए जा रहे थे, जिन पर आरोपियों का आवासीय पता और विनोद गौर का मोबाइल नंबर दर्ज था।
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वर्ष 2013 - 2014 में कंपनी में हुए आंतरिक ऑडिट और एक पूर्व कर्मचारी के कबूलनामे के बाद कंपनी को अपने खातों में करीब 2.85 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का पता चला। 8 जुलाई 2014 को विवाद सुलझाने के लिए गुरुग्राम के कंट्री सूट्स एंड इन में एक सेटलमेंट एग्रीमेंट हुआ, जिसमें विनोद गौर ने एक करोड़ का भुगतान करने पर सहमति जताई और चेक सौंपे। चेक बाउंस हो गया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि विनोद गौर के पास डीएचएल में ग्राहक खातों को संभालने की जिम्मेदारी थी। सेवाओं का भुगतान डीएचएल के बजाय उनकी पत्नी की फर्म के खाते में प्राप्त किया गया।
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