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कोविड-19 पॉजिटिव लोगों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं, संक्रमण का बढ़ा खतरा
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गुरुग्राम। कोविड-19 पॉजिटिव लोगों को स्वास्थ्य विभाग सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा रहा है। जांच के दौरान कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर मरीजों को बिना दवा दिए घर भेजा जा रहा है। मरीजों को आश्वासन दिया जा रहा है कि 24 घंटे के भीतर अस्पताल से चिकित्सक उन्हें फोन कर उनसे बात करेंगे व दवा उनके घर भेज दी जाएगी, लेकिन यह आश्वासन झूठे साबित हो रहे हैं। वहीं, होम क्वारंटीन का समय पूरा होने के बाद भी पीड़ित को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई निर्देश नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही जिलेवासियों पर संक्रमण का कहर बनकर टूट रही है।
धनवापुर निवासी नरेंद्र दहिया ने बताया कि खांसी-बुखार होने पर 12 जून को वह नागरिक अस्पताल सेक्टर-10 गए थे। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें कोरोना संदिग्ध बताते हुए घर भेज दिया। आरोप है कि उन्हें दवा देने की बजाय चिकित्सकों ने उन्हें होम क्वारंटीन होने की बात कही। दवा के लिए 24 घंटे के भीतर चिकित्सकों का फोन आने की बात कही। उन्होंने बताया कि दो दिन बीतने के बाद भी जब नागरिक अस्पताल से फोन नहीं आया तो उन्होंने निजी अस्पताल के अपने पारिवारिक चिकित्सक से इलाज शुरू करवाया। चार दिन बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 24 घंटे का ही समय दिया जा रहा है।
सेक्टर-51 मेफील्ड गार्डन निवासी जीनेश ने बताया कि वह 30 मई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। प्रोटोकॉल के अनुसार वह उसी दिन से होम क्वारंटीन हैं। नगर निगम ने उनके घर के बाहर पोस्टर तो चस्पा कर दिया, लेकिन उनके परिवार के अन्य सदस्यों की जांच नहीं की गई। उनके दो बच्चे और बूढ़ी मां हैं जिन्हें संक्रमण का खतरा काफी अधिक है।
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12 जून को उनका क्वारंटीन समय भी पूरा हो गया है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं उनका दोबारा टेस्ट भी नहीं किया गया है कि वह कोरोना नेगेटिव हुए हैं अथवा नहीं। अधिकारियों की लापरवाही से परेशान होकर लोगों ने इसकी शिकायत जिला उपायुक्त अमित खत्री से की है। जिला उपायुक्त ने मामले की जांच करवाकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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धनवापुर निवासी नरेंद्र दहिया ने बताया कि खांसी-बुखार होने पर 12 जून को वह नागरिक अस्पताल सेक्टर-10 गए थे। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें कोरोना संदिग्ध बताते हुए घर भेज दिया। आरोप है कि उन्हें दवा देने की बजाय चिकित्सकों ने उन्हें होम क्वारंटीन होने की बात कही। दवा के लिए 24 घंटे के भीतर चिकित्सकों का फोन आने की बात कही। उन्होंने बताया कि दो दिन बीतने के बाद भी जब नागरिक अस्पताल से फोन नहीं आया तो उन्होंने निजी अस्पताल के अपने पारिवारिक चिकित्सक से इलाज शुरू करवाया। चार दिन बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 24 घंटे का ही समय दिया जा रहा है।
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सेक्टर-51 मेफील्ड गार्डन निवासी जीनेश ने बताया कि वह 30 मई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। प्रोटोकॉल के अनुसार वह उसी दिन से होम क्वारंटीन हैं। नगर निगम ने उनके घर के बाहर पोस्टर तो चस्पा कर दिया, लेकिन उनके परिवार के अन्य सदस्यों की जांच नहीं की गई। उनके दो बच्चे और बूढ़ी मां हैं जिन्हें संक्रमण का खतरा काफी अधिक है।
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12 जून को उनका क्वारंटीन समय भी पूरा हो गया है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं उनका दोबारा टेस्ट भी नहीं किया गया है कि वह कोरोना नेगेटिव हुए हैं अथवा नहीं। अधिकारियों की लापरवाही से परेशान होकर लोगों ने इसकी शिकायत जिला उपायुक्त अमित खत्री से की है। जिला उपायुक्त ने मामले की जांच करवाकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।