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Gurugram News: बैंक की लापरवाही से उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी

Sun, 11 Oct 2026 12:20 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:20 AM IST
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Consumer suffered mental distress due to the bank's negligence.
15 हजार रुपये का मुआवजा देने का दिया आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। लोन की किस्त जमा करने के बाद भी बैंक की लापरवाही से एक महिला के बैंक खाते को दूसरे महिला के लोन के भुगतान से लिंक कर दिया गया। इससे परेशान होकर महिला ने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण ने सुनवाई में पाया कि बैंक की लापरवाही से महिला को मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा। आयोग ने आईडीएफसी फर्स्ट और एचडीएफसी बैंक मिलकर 15 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि भले ही ग्राहक के खाते से कोई रकम नहीं कटी, लेकिन बैंक की लापरवाही के कारण उन्हें मानसिक परेशानी और कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
हीरा नगर निवासी रेशमा ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से लिया गया अपना पूरा कर्ज चुका दिया था। इसके बाद उनके बैंकर एचडीएफसी बैंक की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया था। हालांकि, कर्ज चुकाने के बावजूद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ओर से रेशमा के खाते के साथ नई दिल्ली निवासी एक अन्य महिला, रेशमा अजित सिंह, के लोन खाते की किस्त का भुगतान लिंक कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में एचडीएफसी बैंक से भी संपर्क कर आपत्ति जताई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। आयोग में मामले की सुनवाई के दौरान एचडीएफसी बैंक की तरफ से कोई भी पेश नहीं हुआ। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपने जवाब में बताया कि सिस्टम में तकनीकी खामी के कारण लोन बंद होने के बाद भी भुगतान का अनुरोध चला गया था। बैंक के अनुसार, बाद में इस अनुरोध को बंद कर दिया गया और शिकायतकर्ता के खाते से कोई राशि नहीं काटी गई।
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आयोग ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए माना कि खाते से रुपये नहीं कटने के बावजूद बैंक की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग ने दोनों बैंक का आदेश दिया है कि वह मिलकर 15 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 11 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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