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पॉलिसी के समय बीमारी न बताने के नाम पर रोका गए क्लेम अमानवीय व्यवहार : उपभोक्ता आयोग
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उपभोक्ता आयोग
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- उपचार के दौरान बीमा धारक की हो गई थी मौत
- लीवर की बीमारी से थे ग्रसित, 60 लाख रुपये का रोका था क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बीमा पॉलिसी लेने के दौरान बीमारी न बताने के नाम पर रोके जाने वाले क्लेम को उपभोक्ता आयोग ने अमानवीय व्यवहार करार दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 60 लाख रुपये ब्याज समेत वापस करे। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
सेक्टर-39 निवासी मंजू अग्रवाल ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा लिया हुआ था। उनके पति मनोज कुमार मल्टी-ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (इस बीमारी में शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं) की बीमारी से ग्रसित होकर 28 दिसंबर 2022 से 12 फरवरी 2023 तक मेदांता अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुए थे। इसी दौरान उनकी मौत हो गई थी।
जब उनकी पत्नी ने बीमा कंपनी में 60 लाख रुपये क्लेम के लिए आवेदन किया तो कंपनी ने यह कहकर मना कर दिया कि उन्होंने लीवर सिरोसिस बीमारी के बारे में पहले नहीं बताया था। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि बीमा कंपनी की तरफ से ही मृतक मनोज कुमार की जांच कराई गई थी। उन्होंने पॉलिसी करने के नाम पर उनसे ज्यादा रुपये भी लिए थे।
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आयोग ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कंपनी का व्यवहार अत्यंत शर्मनाक, चौंकाने वाला और अमानवीय है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 29 मार्च 2023 से 60 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से शिकायतकर्ता को दें। इसके साथ ही उनको दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये देने होंगे।
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- उपचार के दौरान बीमा धारक की हो गई थी मौत
- लीवर की बीमारी से थे ग्रसित, 60 लाख रुपये का रोका था क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बीमा पॉलिसी लेने के दौरान बीमारी न बताने के नाम पर रोके जाने वाले क्लेम को उपभोक्ता आयोग ने अमानवीय व्यवहार करार दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 60 लाख रुपये ब्याज समेत वापस करे। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
सेक्टर-39 निवासी मंजू अग्रवाल ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा लिया हुआ था। उनके पति मनोज कुमार मल्टी-ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (इस बीमारी में शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं) की बीमारी से ग्रसित होकर 28 दिसंबर 2022 से 12 फरवरी 2023 तक मेदांता अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुए थे। इसी दौरान उनकी मौत हो गई थी।
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जब उनकी पत्नी ने बीमा कंपनी में 60 लाख रुपये क्लेम के लिए आवेदन किया तो कंपनी ने यह कहकर मना कर दिया कि उन्होंने लीवर सिरोसिस बीमारी के बारे में पहले नहीं बताया था। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि बीमा कंपनी की तरफ से ही मृतक मनोज कुमार की जांच कराई गई थी। उन्होंने पॉलिसी करने के नाम पर उनसे ज्यादा रुपये भी लिए थे।
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आयोग ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कंपनी का व्यवहार अत्यंत शर्मनाक, चौंकाने वाला और अमानवीय है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 29 मार्च 2023 से 60 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से शिकायतकर्ता को दें। इसके साथ ही उनको दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये देने होंगे।