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Gurugram News: मानसून की पहली फुहार में तैरे दावे, अरमान डूबे

Sun, 05 Jul 2026 07:28 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 07:28 PM IST
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Claims floated away in the first downpour; aspirations drowned.
शहर में झमाझम बारिश से गुरुग्राम बेहाल, निगम व जीएमडीए के दावों की खुली पोलअमर उजाला ब्यूरो
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गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी में मानसून की पहली फुहार ने नगर निगम और जीएमडीए की तैयारियों के दावों को पानी में तैरा दिया। वहीं, भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के अरमानों को जलभराव के गंदे पानी में डुबो दिया। रविवार दोपहर हुई तेज बारिश के बाद दावों की हकीकत खुलकर सामने आ गई। करोड़ों रुपये खर्च कर नालों की सफाई और त्वरित जल निकासी का दम भरने वाले प्रशासन की नाकामी से पूरा शहर जलमग्न हो गया। बसई रोड, राजेंद्र पार्क, द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास और अशोक विहार जैसी मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों तक कई फीट पानी जमा हो गया। सड़कें देखते ही देखते तालाब बन गईं, जिससे गाड़ियां रेंगने लगीं और लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा।
यहां स्थिति रही ज्यादा खराब
सबसे खराब स्थिति दौलताबाद औद्योगिक क्षेत्र, शिवमूर्ति और शनि मंदिर के आसपास रही, जहां कई फीट तक पानी जमा हो गया। कई वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए और वाहन चालकों को घुटनों तक भरे पानी में उतरकर उन्हें धक्का लगाकर निकालना पड़ा। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर हीरो होंडा चौक की सर्विस रोड और वाटिका चौक के आसपास भी जलभराव की समस्या देखने को मिली। हालांकि, सूचना मिलने के बाद जीएमडीए की टीमें मौके पर पहुंचीं और पानी निकासी का काम शुरू कराया। इसके अलावा एसपीआर में भी जलभराव की समस्या रही। मानसून अभी शुरुआत में ही है, लेकिन पहली बारिश ने साफ कर दिया है कि शहर की जल निकासी व्यवस्था अब भी कमजोर कड़ी बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में लगातार या अधिक तीव्र बारिश होती है तो कई इलाकों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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समय पर किया होता काम तो नहीं डूबता शहर
हर साल मानसून से पहले करोड़ों रुपये का बजट नाला सफाई और जलभराव से निपटने के नाम पर बहाया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। रविवार को हुई बारिश के बाद पूरे शहर में भयंकर जलभराव हो गया, जिससे नागरिकों का आवागमन पूरी तरह ठप रहा और लोग घंटों जाम में फंसे रहे। यदि निगम प्रशासन ने समय रहते ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया होता और नालों की सफाई सही ढंग से कराई होती, तो आज शहरवासियों को यह भारी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। अपनी इसी नाकामी को छिपाने के लिए नगर निगम की टीमें रविवार को आनन-फानन में फील्ड में दौड़ती नजर आईं। विभिन्न क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर जाने के बाद, प्रशासन ने खानापूर्ति के लिए पंप, ट्रैक्टर माउंटेड पंप और सक्शन टैंकर तैनात किए।
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मानसून प्रबंधन कॉल सेंटर से भी लगातार निगरानी
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि नगर निगम का मानसून प्रबंधन कॉल सेंटर बारिश के दौरान लगातार सक्रिय है। विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों, फील्ड टीमों और अधिकारियों के माध्यम से स्थिति की निगरानी की जा रही है। किसी भी क्षेत्र से जलभराव की सूचना मिलने पर संबंधित टीम को तुरंत मौके पर भेजकर आवश्यक मशीनरी की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना और नागरिकों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम करना है।
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मानसून की दस्तक के साथ बढ़ा मच्छरों का खतरा
मानेसर। मानसून की दस्तक के साथ ही मानेसर क्षेत्र में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। बारिश के मौसम में गंदा पानी जमा होने और गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। नगर निगम मानेसर के कई इलाकों में नालियों का गंदा पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका अधिक रहती है। स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी लगातार जागरूक कर रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले और टंकियों की नियमित सफाई करें तथा पूरी बाजू के कपड़े पहनें। संवाद

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आफत बनी राहत देने वाली बारिश
पटौदी। प्रचंड गर्मी और उमस से परेशान लोगों को रविवार दोपहर हुई बारिश ने बड़ी राहत दी। झमाझम बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, किसानों के चेहरों पर भी खुशी लौट आई, क्योंकि यह बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक मानी जा रही है। हालांकि, बारिश के साथ ही पटौदी और हेलीमंडी में जलभराव की समस्या भी सामने आई। पटौदी के गुरुग्राम रोड, भोड़ाकलां रोड, सब्जी मंडी, रेवाड़ी रोड व हेलीमंडी रोड पर बारिश का पानी भर गया। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मुख्य सड़कों पर जलभराव होने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक दिक्कत हुई। संवाद
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