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Gurugram News: समय पर कर्मिश्यल यूनिट न देने पर आवंटियों को मिलेगा मुआवजा
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गुरुग्राम। समय पर कमर्शियल यूनिट का पजेशन न देने पर आवंटियों को हुए नुकसान पर बिल्डर उन्हें 14.42 लाख रुपये का मुआवजा देगा। यह आदेश हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) ने दिया है।
पारुल भार्गव और प्रशांत ने अपनी हरेरा में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने सेक्टर-109 में स्काईलाइन -109 प्रोजेक्ट में 2012 में 556 वर्ग फुट का एक कमर्शियल यूनिट बुक किया था। इसको लेकर कंपनी से 44.20 लाख रुपये में करार हुआ था। उनकी तरफ से 17.37 लाख रुपये जमा किए गए। कंपनी की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि जून 2018 तक पजेशन दे दिया जाएगा। लेकिन तय समय में पजेशन नहीं दिया गया और बाद में परियोजना बंद हो गई।
इससे पहले मार्च 2023 में हरेरा ने बिल्डर को जमा राशि 10.70 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ताओं ने समय से पजेशन न मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि कंपनी के अंदरूनी विवाद बिल्डर की जिम्मेदारी से मुक्ति का आधार नहीं हो सकते। समय पर कब्जा न देना और प्रोजेक्ट को छोड़ देना सेवा में कमी है। प्राधिकरण ने माना कि आवंटियों को हुए नुकसान पर 14.42 लाख रुपये कंपनी उन्हें मुआवजे के तौर पर दें। इस दाैरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर एक लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 50 हजार रुपये भी देने होंगे। संवाद
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पारुल भार्गव और प्रशांत ने अपनी हरेरा में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने सेक्टर-109 में स्काईलाइन -109 प्रोजेक्ट में 2012 में 556 वर्ग फुट का एक कमर्शियल यूनिट बुक किया था। इसको लेकर कंपनी से 44.20 लाख रुपये में करार हुआ था। उनकी तरफ से 17.37 लाख रुपये जमा किए गए। कंपनी की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि जून 2018 तक पजेशन दे दिया जाएगा। लेकिन तय समय में पजेशन नहीं दिया गया और बाद में परियोजना बंद हो गई।
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इससे पहले मार्च 2023 में हरेरा ने बिल्डर को जमा राशि 10.70 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ताओं ने समय से पजेशन न मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि कंपनी के अंदरूनी विवाद बिल्डर की जिम्मेदारी से मुक्ति का आधार नहीं हो सकते। समय पर कब्जा न देना और प्रोजेक्ट को छोड़ देना सेवा में कमी है। प्राधिकरण ने माना कि आवंटियों को हुए नुकसान पर 14.42 लाख रुपये कंपनी उन्हें मुआवजे के तौर पर दें। इस दाैरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर एक लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 50 हजार रुपये भी देने होंगे। संवाद
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