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खरना कर व्रतियों ने रखा 36 घंटे का निर्जला उपवास, छठी मइया को भोग लगाने के बाद ग्रहण किया प्रसाद

Tue, 09 Nov 2021 11:09 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 09 Nov 2021 11:09 PM IST
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After doing Kharna, the devotees kept fast for 36 hours, after offering the offerings on the sixth month, they accepted the Prasad.
छठ पूजा के लिए टोकरी में सामान रखकर ले जाता व्यक्ति। - फोटो : Gurgaon
गुरुग्राम। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को छठ पर्व के दूसरे दिन मंगलवार को खरना ग्रहण कर व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू किया। सब कुछ नियम धर्म के मुताबिक होता है। इस दिन व्रती सूर्योदय से सूर्यास्त तक कठिन निर्जला व्रत रखते हैं और चढ़ते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस व्रत में नमक व चीनी का प्रयोग वर्जित है। प्रसाद के लिए गुड़ या गन्ने के रस की खीर बनती है। इसके अलावा खरना की पूजा में मूली, केला व मौसमी फल रखकर भी पूजा की जाती है। साथ ही प्रसाद में पूड़ियां, गुड़ की पूड़ियां तथा मिठाइयां रखकर भी भगवान को भोग लगाया जाता है। छठी मइया को भोग लगाने के बाद प्रसाद को व्रत करने वाला व्यक्ति ग्रहण करता है।
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घर के सभी सदस्य भी यही प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के उपरांत 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। मान्यता है कि खरना पूजा के उपरांत घर में देवी षष्ठी (छठ मइया) का आगमन हो जाता है।
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कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि से छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है। छठ पूजा के चार दिनों के दौरान भक्त पूरी स्वच्छता के साथ सात्विक भोजन करते हैं, जिसमें प्याज या लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता। छठ पर्व को लेकर बाजारों में लोगों द्वारा खरीदारी की जा रही है। लोगों ने टोकरी, कोसी, पीतल या बांस का सूप, दउरा, साड़ी, गन्ना, नारियल, फल, सब्जी, पूजा सामग्री और कपड़े आदि की खरीदारी की।
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आज देंगे सूर्य को अर्घ्य
मुख्य छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी बुधवार को होगी। इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। सूप या बांस की टोकरी में नई फसल, सब्जियां, अदरक, नीबू आदि सजाए जाते हैं। छठ पूजा पर्व के तीसरे दिन की सुबह भक्त सूर्योदय से पहले नदी, घाट या तालाब पर पहुंचेंगे और सूर्योदय के दौरान भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद दिनभर पानी में खड़े रहेंगे। बुधवार को गुरुग्राम क्षेत्र में सूर्योदय 6.41 और सूर्यास्त 5.28 बजे होगा। फिर शाम को सूर्यास्त के समय भी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस व्रत में महिलाएं सूर्य देवता के डूबने के इंतजार में छठी मैया के गीत भी गाती हैं। सूर्य डूबने पर व्रती पीतल के कलश में दूध और जल से सूर्य को अर्घ्य देती हैं और प्रसाद चढ़ाती हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा।

30 घाटों पर होगी पूजा-अर्चना
छठ पर्व पर जिले में लगभग 30 घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी। इसमें कन्हई, सेक्टर-4/5 लेबर चौक, ओम विहार, शक्ति पार्क, देवीलाल कॉलोनी, सेक्टर-15 के पार्ट-2, न्यू पालम विहार, कादीपुर का सामुदायिक भवन, भीमगढ़ खेड़ी, बसई तालाब, सरस्वती एंक्लेव, सूरत नगर शामिल हैं। जिले के भोंडसी के निकट बसी मारुति कर्मचारियों की कॉलोनी मारुति कुंज क्षेत्र में भी 15 स्थानों पर छठ पूजा के आयोजन की व्यवस्था की गई है। कई जगहों पर अस्थायी घाट बनाए गए हैं। मारुति कुंज के आसपास बसी श्याम कुंज, वाटिका कुंज, स्नेह विहार, रेयान एंक्लेव, मोहन नगर, गोवर्धन कुंज, डिफेंस एंक्लेव में अस्थायी घाट बनाए गए हैं। शक्ति पार्क में होने वाली पूजा में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल शामिल होंगे। नगर निगम गुरुग्राम ने 14 स्थानों पर घाट बनाकर पूजा की व्यवस्था भी की है और इन घाटों पर पानी के टैंकरों, मोबाइल टॉयलेट, स्ट्रीट लाइट, सफाई की व्यवस्था भी की है।
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