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कमेटी तक सीमित हैं कोविड को हराने के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाएं
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गुरुग्राम। जिला प्रशासन कोरोना संक्रमितों के इलाज में सुविधाओं के लिए कमेटी दर कमेटी बना रहा है। लेकिन उन कमेटियों का तीमारदारों को कोई फायदा नहीं मिलता। कमेटी में जिन अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे घरों से नहीं निकल रहे हैं और न ही तीमारदारों का फोन उठा रहे हैं। जिसकी वजह से लोगों को ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन और कोरोना कर्फ्यू पास के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं।
जिला प्रशासन की ओर से चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों, स्वास्थ्य मंत्री और सीएम को दिखाने के लिए के लिए आठ कमेटियां बना दी गईं हैं। कागजों में ही मरीजों और तीमारदारों को उनके माध्यम से राहत दिखाई जा रही है। हकीकत तो यह है कि इन कमेटियों से खास राहत नहीं मिल रही है। एक महीने पहले सरकार और प्रशासन ने अपर मुख्य सचिव टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। यह कमेटी अभी तक अतिरिक्त बेड की व्यवस्था नहीं कर पाई है। इतना ही नहीं, एम-3 एम ने वायु सेना को 150 बेड का अस्पताल सौंप दिया है। यहां पर कब से मरीज भर्ती होंगे, इस बारे में प्रशासन की ओर से नागरिकों के लिए कोई संदेश नहीं है।
ऑक्सीजन के लिए कमेटी
ऑक्सीजन वितरण के लिए पहली कमेटी निगमायुक्त की अध्यक्षता में बनी थी। इसी के लिए दूसरी कमेटी मानेसर के तीन प्लांटों में ऑक्सीजन वितरण के लिए निगम के जेई की बनी थी। चिरंजीवी अस्पताल में ऑक्सीजन के खाली सिलिंडर दे दिए थे, इस दौरान दो मरीजों की मौत हो गई थी। जिसको लेकर आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने मुख्य सचिव तक शिकायत की थी। इसी मामले में तीसरी कमेटी टोकन सिस्टम से तीन स्थानों पर ऑक्सीजन वितरण को लेकर बनाई थी। यह कमेटी पर तीमारदारों का परेशान करने का आरोप है। चार दिन हो गए, यहां के तीमारदारों को टोकन भी नहीं दिए गए।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कमेटी
दो दिन पहले प्रशासन ने मरीजों को उपचार के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत के लिए कमेटी बनाई है। तीमारदारों का आरोप है कि यह कमेटी उलझा रही है। सिफारिश के आधार पर जिनको इंजेक्शन देने होते हैं, उनको दे दिए जाते हैं। जिनकी सिफारिश नहीं होती, उनके आवेदन में आपत्ति लगाकर खारिज कर दिया जाता है।
शर्तों का उल्लंघन कर रहे बड़े अस्पताल
गुरुग्राम। बड़े प्राइवेट और कारपोरेट अस्पतालों ने सरकार से एक रुपये गज के हिसाब से सशर्त जमीन ली। हुडा की ओर से दी गई जमीन में यह शर्त रखी गई था कि गुरुग्राम के मरीजों के इलाज के लिए प्राथमिकता रहेगी। इसके अलावा उनसे लिए जाने वाले भुगतान में 10 फीसदी की रियायत होगी। लेकिन कोविड काल में देखा गया कि यहां के मेडिसिटी, फोर्टिस, अर्टेमिस, मेदांता जैसे अस्पतालों में गुरुग्राम के मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। इतना ही नहीं जो भी मरीज भर्ती हुए उनसे ज्यादा रकम वसूली गई। इस मुद्दे को विधायक सुधीर सिंगला ने उठाया है। पीएम से लेकर सीएम और स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि जिन शर्तों के तहत जमीन दी गई थी, उनके अनुसार यह प्राथमिकता से गुरुग्राम के मरीजों का इलाज करें।
हालात जस के तस, नहीं मिल रहा लाभ
गुरुग्राम। जिले के प्राइवेट हो या फिर सरकारी अस्पताल। सभी में नए मरीजों की भर्ती नहीं हो रही है। सोमवार को भी अस्पताल संचालकों ने मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि भर्ती होना है तो ऑक्सीजन की व्यवस्था अपने स्तर से करें। संचालकों की इस शर्त के कारण तीमारदार अपने मरीजों को भर्ती कराने से तो घरों पर आइसोलेट कराकर इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं।
अंतिम संस्कार का तय रेट से ज्यादा लेने पर होगी कार्रवाई
गुरुग्राम। नगर निगम में सोमवार शाम एक बैठक का आयोजन किया गया। अपर निगमायुक्त हरीश अत्री ने बताया कि कोविड के शवों के अंतिम संस्कार की राशि साढ़े पांच हजार रुपये तय की गई है। अगर कोई इससे ज्यादा लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिन लोगों को सिलिंडर दिए जाएंगे, उनसे ऑनलाइन पेमेंट लिया जाएगा। ब्यूरो
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जिला प्रशासन की ओर से चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों, स्वास्थ्य मंत्री और सीएम को दिखाने के लिए के लिए आठ कमेटियां बना दी गईं हैं। कागजों में ही मरीजों और तीमारदारों को उनके माध्यम से राहत दिखाई जा रही है। हकीकत तो यह है कि इन कमेटियों से खास राहत नहीं मिल रही है। एक महीने पहले सरकार और प्रशासन ने अपर मुख्य सचिव टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। यह कमेटी अभी तक अतिरिक्त बेड की व्यवस्था नहीं कर पाई है। इतना ही नहीं, एम-3 एम ने वायु सेना को 150 बेड का अस्पताल सौंप दिया है। यहां पर कब से मरीज भर्ती होंगे, इस बारे में प्रशासन की ओर से नागरिकों के लिए कोई संदेश नहीं है।
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ऑक्सीजन के लिए कमेटी
ऑक्सीजन वितरण के लिए पहली कमेटी निगमायुक्त की अध्यक्षता में बनी थी। इसी के लिए दूसरी कमेटी मानेसर के तीन प्लांटों में ऑक्सीजन वितरण के लिए निगम के जेई की बनी थी। चिरंजीवी अस्पताल में ऑक्सीजन के खाली सिलिंडर दे दिए थे, इस दौरान दो मरीजों की मौत हो गई थी। जिसको लेकर आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने मुख्य सचिव तक शिकायत की थी। इसी मामले में तीसरी कमेटी टोकन सिस्टम से तीन स्थानों पर ऑक्सीजन वितरण को लेकर बनाई थी। यह कमेटी पर तीमारदारों का परेशान करने का आरोप है। चार दिन हो गए, यहां के तीमारदारों को टोकन भी नहीं दिए गए।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कमेटी
दो दिन पहले प्रशासन ने मरीजों को उपचार के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत के लिए कमेटी बनाई है। तीमारदारों का आरोप है कि यह कमेटी उलझा रही है। सिफारिश के आधार पर जिनको इंजेक्शन देने होते हैं, उनको दे दिए जाते हैं। जिनकी सिफारिश नहीं होती, उनके आवेदन में आपत्ति लगाकर खारिज कर दिया जाता है।
शर्तों का उल्लंघन कर रहे बड़े अस्पताल
गुरुग्राम। बड़े प्राइवेट और कारपोरेट अस्पतालों ने सरकार से एक रुपये गज के हिसाब से सशर्त जमीन ली। हुडा की ओर से दी गई जमीन में यह शर्त रखी गई था कि गुरुग्राम के मरीजों के इलाज के लिए प्राथमिकता रहेगी। इसके अलावा उनसे लिए जाने वाले भुगतान में 10 फीसदी की रियायत होगी। लेकिन कोविड काल में देखा गया कि यहां के मेडिसिटी, फोर्टिस, अर्टेमिस, मेदांता जैसे अस्पतालों में गुरुग्राम के मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। इतना ही नहीं जो भी मरीज भर्ती हुए उनसे ज्यादा रकम वसूली गई। इस मुद्दे को विधायक सुधीर सिंगला ने उठाया है। पीएम से लेकर सीएम और स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि जिन शर्तों के तहत जमीन दी गई थी, उनके अनुसार यह प्राथमिकता से गुरुग्राम के मरीजों का इलाज करें।
हालात जस के तस, नहीं मिल रहा लाभ
गुरुग्राम। जिले के प्राइवेट हो या फिर सरकारी अस्पताल। सभी में नए मरीजों की भर्ती नहीं हो रही है। सोमवार को भी अस्पताल संचालकों ने मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि भर्ती होना है तो ऑक्सीजन की व्यवस्था अपने स्तर से करें। संचालकों की इस शर्त के कारण तीमारदार अपने मरीजों को भर्ती कराने से तो घरों पर आइसोलेट कराकर इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं।
अंतिम संस्कार का तय रेट से ज्यादा लेने पर होगी कार्रवाई
गुरुग्राम। नगर निगम में सोमवार शाम एक बैठक का आयोजन किया गया। अपर निगमायुक्त हरीश अत्री ने बताया कि कोविड के शवों के अंतिम संस्कार की राशि साढ़े पांच हजार रुपये तय की गई है। अगर कोई इससे ज्यादा लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिन लोगों को सिलिंडर दिए जाएंगे, उनसे ऑनलाइन पेमेंट लिया जाएगा। ब्यूरो