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Gurugram News: बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट
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-उल्लंघन पर दो साल कैद व एक लाख का जुर्माना : एडीसी ज्योति
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। अक्षय तृतीया (अक्खा तीज) के अवसर पर संभावित बाल विवाह की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है। अतिरिक्त उपायुक्त ज्योति ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सजग और सतर्क है।
19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर विवाह-शादियों के लिए अबूझ सावा और शुभ मुहूर्त होने के कारण जिले में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है। ऐसे में किसी भी प्रकार के बाल विवाह को रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड में कार्य कर रहा है। एडीसी ने जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पुजारी, गांव के सरपंच, नंबरदार तथा शहरी क्षेत्रों के पूर्व पार्षदों को विशेष रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही किसी भी संदिग्ध विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
मैरिज पैलेस और बैंक्वेट हॉल संचालकों को भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि विवाह समारोह आयोजित करने से पहले दूल्हा-दुल्हन के आयु प्रमाण पत्रों की अनिवार्य जांच करें। यदि लड़के की आयु 21 वर्ष से कम या लड़की की आयु 18 वर्ष से कम पाई जाती है, तो इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें और दस्तावेज की प्रति अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखें। यह आयु सीमा बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में स्पष्ट रूप से निर्धारित है।
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बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन ने बताया कि कानून के तहत बाल विवाह कराना या इसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना पुलिस, एसडीएम, नजदीकी थाना, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 1091 या आपातकालीन नंबर 112 पर तुरंत दें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। अक्षय तृतीया (अक्खा तीज) के अवसर पर संभावित बाल विवाह की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है। अतिरिक्त उपायुक्त ज्योति ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सजग और सतर्क है।
19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर विवाह-शादियों के लिए अबूझ सावा और शुभ मुहूर्त होने के कारण जिले में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है। ऐसे में किसी भी प्रकार के बाल विवाह को रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड में कार्य कर रहा है। एडीसी ने जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पुजारी, गांव के सरपंच, नंबरदार तथा शहरी क्षेत्रों के पूर्व पार्षदों को विशेष रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही किसी भी संदिग्ध विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
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मैरिज पैलेस और बैंक्वेट हॉल संचालकों को भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि विवाह समारोह आयोजित करने से पहले दूल्हा-दुल्हन के आयु प्रमाण पत्रों की अनिवार्य जांच करें। यदि लड़के की आयु 21 वर्ष से कम या लड़की की आयु 18 वर्ष से कम पाई जाती है, तो इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें और दस्तावेज की प्रति अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखें। यह आयु सीमा बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में स्पष्ट रूप से निर्धारित है।
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बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन ने बताया कि कानून के तहत बाल विवाह कराना या इसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना पुलिस, एसडीएम, नजदीकी थाना, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 1091 या आपातकालीन नंबर 112 पर तुरंत दें।