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गुड़गांव की सिटी बसों का हाल बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 24 Apr 2014 02:43 PM IST
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12 मई 2012 को शहरवासियों को सिटी बसों की सौगात मिली। मौजूदा समय में शहर की लाइफ लाइन बन चुकी सिटी बसें अव्यवस्थाओं की शिकार हो रही हैं।
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इनके रखरखाव से लेकर उनके बेहतर संचालन के लिए तमाम दावे समय बढ़ने के साथ हवा हो रहे हैं। हालांकि इनके संचालन के लिए रोडवेज विभाग ने अलग सेल बना रखी है। लेकिन बगैर किसी प्लानिंग और देखभाल के बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं।
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महिला सीटों पर पुरुषों का कब्जा
सिटी बसों में महिला सुरक्षा के बंदोबस्तों का दावा किया जा रहा है। बाकायदा महिलाओं के लिए 32 सीटर बस में 14 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, लेकिन इन सीटों पर पुरुष यात्री इत्मीनान से विराजमान रहते हैं। ऐसे यात्रियों को आरक्षित सीटों से उठाने की हिम्मत न महिलाएं जुटाती हैं और न यह जहमत बस में तैनात स्टाफ उठाने को तैयार हैं।
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16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में गैंगरेप की घटना के बाद महिला सुरक्षा के लिए नई-नई योजनाएं तैयार की गई। आरक्षित सीटें भी उन्हीं योजनाओं का हिस्सा थी। लेकिन बदइंतजामी के कारण महिलाएं ठसाठस भरी बस में खड़े होकर सफर करने को मजबूर है।
उस समय प्रबंधन की ओर से चालक-परिचालक को महिलाओं के लिए सीट सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। खड़े होकर सफर कर रही महिलाओं में इस मजबूरी के लिए बेबसी साफ देखी जा सकती है।
बस ड्राइवर अमरजीत सिंह कहते हैं, पुरुष यात्रियों को बस में चढ़ने के समय ही हिदायत दे दी जाती है कि महिला सीटों पर न बैठें, लेकिन कोई मानता नहीं।
वहीं बस कंडक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि पुरुष यात्रियों से बार-बार आग्रह किया जाता है, जब थोड़ा सा नियमों का हवाला दों तो लोग झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
नहीं बन पाए बस क्यू शेल्टर
सिटी बसों के संचालन को दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन अभी तक बस क्यू शेल्टर नहीं बन पाए। हालांकि रोडवेज ने शुरुआती दौर में 160 स्थान चिन्हित कर नगर निगम और हुडा विभाग को क्षेत्रवार शेल्टरों की सूची सौंप दी थी, लेकिन दोनों विभागों में तालमेल की कमी के चलते इनका निर्माण लटका है।
शेल्टरों के लिए नित नई योजनाएं जरूर बनाई जा रही हैं। नगर निगम ने ट्रायल के तौर पर आठ क्यू शेल्टर बनाने आरंभ किए। जिनमें से छह महीने के भीतर महज चार ही बन पाए। इनमें से न्यू कॉलोनी मोड़ के पास बना शेल्टर चार दिन पहले किसी ने जेसीबी से उखाड़ दिया। बस क्यू शेल्टर की कमी के चलते लोग यहां-वहां खड़े रहकर चलती बसों में ही चढ़ने का प्रयास करते हैं।
बसों का नहीं कोई टाइम टेबल
सिटी बसों के संचालन का कोई टाइम टेबल निर्धारित नहीं है। हालांकि बस क्यू शेल्टरों में बस के आने और जाने का समय चस्पा करने की योजना बनाई गई थी। सड़क पर खड़े लोगों को यही नहीं पता कि बस कितनी देर में आएगी? हालांकि सभी रूटों पर बसों की फ्रिक्वेंसी सात से 20 मिनट तक निर्धारित है। कई रूटों पर देर तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बस देखकर लोग एकदम से दौड़कर चढ़ने का प्रयास करते हैं।
कार्यवाहक महाप्रबंधक अश्वनी डोगरा ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए कड़ाई से कदम उठाया जाएगा। दूसरी अव्यवस्थाओं के लिए सर्वे कराकर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। बस क्यू शेल्टर विभाग का इश्यू नहीं है। विभाग ने अपनी तरफ से बस स्टैंड के बोर्ड लगाकर स्टैंड निर्धारित कर रखे हैं।