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Delhi: दिल्ली के 300 छोटे नालों का ड्रोन सर्वे करेगी सरकार, यमुना की निर्मलता के लिए फैसला

Wed, 16 Jul 2025 04:56 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 16 Jul 2025 04:56 AM IST
सार

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि दिल्ली के 22 बड़े नाले जिनमें नजफगढ़, शाहदरा और पूरक नाला शामिल हैं, यमुना में गंदगी डाल रहे हैं। इन बड़े नालों में 300 छोटे नाले मिलते हैं जो बिना ट्रीटमेंट के सीवेज को नदी तक पहुंचा रहे हैं। इस समस्या का हल ढूंढने के लिए सरकार ने ड्रोन सर्वे शुरू किया है।

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government will conduct a drone survey of 300 small drains in Delhi
यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में यमुना नदी की निर्मलता वापस लाने के लिए सरकार ने नई योजना बनाई है। अब ड्रोन की मदद से उन 300 छोटे नालों का सर्वे होगा जो बिना ट्रीटमेंट के गंदगी को बड़े नालों में मिलाकर यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। नजफगढ़, शाहदरा और पूरक जैसे बड़े नाले यमुना के लिए सबसे बड़ी मुसीबत हैं। सरकार इन नालों की गंदगी का स्रोत ढूंढकर उसे रोकेगी।

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मंगलवार को सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि दिल्ली के 22 बड़े नाले जिनमें नजफगढ़, शाहदरा और पूरक नाला शामिल हैं, यमुना में गंदगी डाल रहे हैं। इन बड़े नालों में 300 छोटे नाले मिलते हैं जो बिना ट्रीटमेंट के सीवेज को नदी तक पहुंचा रहे हैं। इस समस्या का हल ढूंढने के लिए सरकार ने ड्रोन सर्वे शुरू किया है ताकि इन नालों का स्रोत, रास्ता और बहाव का पूरा नक्शा तैयार हो सके।
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45 सूत्रीय यमुना सफाई योजना का हिस्सा
ये कदम दिल्ली सरकार की 45 सूत्रीय यमुना सफाई योजना का हिस्सा है जिसमें इस साल के अंत तक इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट को पूरा करने की योजना है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सभी नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ना है। प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, ड्रोन सर्वे से हमें हर नाले की पूरी जानकारी मिलेगी। इसके बाद हम विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डी-एसटीपी) लगाएंगे। जहां बड़े एसटीपी नहीं बन सकते, वहां 40 डी-एसटीपी लगाने की योजना है जिसके लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं।
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सीवेज और स्टॉर्म वाटर ड्रेन को करेंगे अलग : मंत्री ने बताया कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के साथ दिल्ली जल बोर्ड बड़े नालों की गाद हटाने और गंदगी के ट्रीटमेंट पर काम कर रहा है। बारिश के पानी की निकासी और सीवेज सिस्टम के बीच तालमेल की कमी से जलभराव और प्रदूषण बढ़ता है। ड्रोन सर्वे से सीवेज और स्टॉर्म वाटर ड्रेन को अलग करने में मदद मिलेगी।


दिल्ली में यमुना का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित
नजफगढ़ नाला जो कभी साहिबी नदी था, अब यमुना में 800 मिलियन गैलन प्रतिदिन अनट्रीटेड सीवेज डाल रहा है। इसी तरह से शाहदरा और पूरक नाले भी यमुना को गंदा कर रहे हैं। सरकार इन नालों को नए सिरे से साफ करने की योजना बना रही है। वजीराबाद से ओखला तक यमुना का 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित है और इसे ठीक करने के लिए यह सर्वे अहम कदम है।

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