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एशियाड पदक विजेता ने बताई अपनी पीड़ा
राहुल श्याम/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 23 Sep 2014 09:16 AM IST
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फरीदाबाद की अनीसा सैयद ने इंचियोन एशियन गेम्स के टीम इवेंट में देश के लिए कांस्य पदक विषम परिस्थितियों में जीता है। परिवार के लोगों का कहना है कि यदि उन्हें सरकार, प्रशासन से आर्थिक मदद मिली होती तो शायद उनके पदक का रंग स्वर्ण होता।
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अनीसा के पति मुबारक उनकी इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं। लेकिन इस खुशी के साथ उनके मन में सरकारी तंत्र के खिलाफ गुस्सा व टीस भी है। परिजनों का कहना है कि अनीसा देश के लिए पदक पर पदक ले आ रही है, लेकिन सरकारी तंत्र ने उनकी मेहनत नहीं समझी।
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पति मुबारक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि अनीसा इंचियोन के लिए रवाना होने से पहले कई बार भावुक हो गईं थीं। वह बार-बार पति से यह कह कर रो पड़ती थीं कि हरियाणा सरकार व सरकारी तंत्र कब और कैसे उनकी सुनेंगे, वह थक चुकी हैं।
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वर्ष 2010 से अब तक उन्हें एक नौकरी तक नहीं दी गई। पति भी भावुक हो कर बताते हैं कि अनीसा को यही दुख है कि अन्य खिलाड़ियों को एक-दो मेडल के बाद भी बड़े पदों पर बैठा दिया जाता है लेकिन उनसे चक्कर लगवाए जा रहे हैं। एक तरह से सरकारी तंत्र ने उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की।
रुपयों के अभाव में नहीं कर पातीं प्रैक्टिस:
अनीसा सैयद आर्थिक मदद के अभाव में प्रतियोगिता की प्रैक्टिस पूरी तरह नहीं कर पाती हैं। ऊपर से नौकरी की टेंशन। अनीसा की नौकरी न होने के कारण पति मुबारक को ही खर्च चलाना पड़ता है। परिवार की सीमित आय होने के कारण अनीसा अपनी प्रैक्टिस भी पूरी नहीं कर पाती हैं।
पति मुबारक के मुताबिक अनीसा के पास व्यक्तिगत कोच नहीं है। यदि अनीसा रोजाना फुल प्रैक्टिस करें तो उन्हें करीब 300 से 400 राउंड (गोलियां) प्रतिदिन चाहिए। एक गोली की कीमत 14 से 25 रुपये तक आती है, इस हिसाब से एक दिन का खर्चा 4200 रुपये से 10 हजार रुपये तक बैठ जाता है जो इस हालत में संभव नहीं है। वह अपने इवेंट से केवल 10-12 दिन पहले से ही प्रैक्टिस पर ध्यान दे पाती हैं।
अनीसा का पूरा परिवार उनके इसी जज्बे को सलाम करता है कि अनीसा ने विषम परिस्थितियों में धैर्य कायम रखा है। मुबारक ने बताया कि अनीसा ने अपने कमरे में ही प्रैक्टिस के लिए छोटा सा सैटअप बना रखा है।