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...शर्म करो, किस बात के इंजीनियर हो
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Mon, 27 Jan 2014 06:25 PM IST
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गुड़गांव के नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार ने इंजीनियरों की योग्यता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। उन्होंने सभी इंजीनियरों की करीब डेढ़ घंटे तक क्लास ली।
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इस दौरान उन्होंने स्कूल क्लास की तरह इंजीनियर से सवाल पूछे, जिनमें से अधिकांश के जवाब इंजीनियरों के पास नहीं थे। निगमायुक्त ने सीधे तौर पर उनके ज्ञान को कठघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि किस बात के इंजीनियर हो, जब अपने विषय के बारे में ही नहीं पता।
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सोमवार को लघु सचिवालय के सभागार में उन्होंने इंजीनियरों की बैठक बुलाई। डॉ. कुमार ने बैठक में जाते ही सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने आरएमसी की फुल फॉर्म से लेकर मिश्रण के उचित अनुपात के बारे में पूछा। उन्होंने कई शब्दों की स्पेलिंग के साथ उनका मतलब भी पूछा, जिन्हें सुनकर अधिकांश इंजीनियर शून्य भाव में चले गए।
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डॉ. कुमार ने इंजीनियरों को झाड़ पिलाते हुए कहा कि यहां रहकर काम करना होगा। उन्होंने योग्यता को अपडेट करने की नसीहत देते हुए कहा कि एक महीने बाद विषय से जुड़ी लिखित परीक्षा होगी। उस परीक्षा में जो फेल होगा, उसे जय हिंद कह दिया जाएगा।
जवाबदेही समझें और जिम्मेदार बनें
निगम आयुक्त ने कहा कि निगम में काम करने वाले हर कर्मचारी को जवाबदेही समझनी होगी और जिम्मेदार बनना होगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ठेकेदारों से पैसे लेने बंद करने होगे। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी इंजीनियर अपने-अपने क्षेत्र में साफ-सफाई के कार्यों में सहयोग करेंगे। हर काम की रिपोर्ट बनाकर उन्हें दिखाई जाए। सड़कों से मलबा हटाने के काम में निरंतरता आनी चाहिए।
हरबर्ट किचनेर की जीवनी पढ़ें
निगम आयुक्त ने सभी इंजीनियरों को ब्रिटेन के फील्ड मार्शल हॉरशियो हरबर्ट किचनेर की जीवनी पढ़ने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि हरबर्ट एक इंजीनियर थे, उन्होंने 1898 में सूडान के 600 मील एरिया में रेलवे लाइन डलवाई थी। उस काम को सभी असंभव मानते थे, लेकिन बगैर मशीनों के हरबर्ट ने असंभव को संभव कर दिया। ऐसे जज्बे से काम करने की जरूरत है।