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बेहतर ट्रांसपोर्ट सेवा और सुरक्षित माहौल चाहें युवा

Tue, 07 Feb 2017 10:43 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 07 Feb 2017 10:43 PM IST
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Youth want better transport service and secure environment
चुनाव - फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद। एनसीआर का हिस्सा होने के बावजूद गाजियाबाद के लोगों को लोकल सिटी बस सेवा की सुविधा मुहैया नहीं हैं। स्कूल, कॉलेज जाने या फिर सफर तय करने के लिए स्टूडेंट्स के साथ लोगों को प्राइवेट बसों और ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता है।
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एक ओर ऑटो चालकों की ओर से मनमाना किराया वसूले जाने से लोगों की पॉकेट ढीली हो रही है, तो दूसरी ओर ओवरलोड होकर चलने वाली प्राइवेट बसें दुर्घटना का सबब बन सकती हैं। वहीं, शहर में क्राइम का बढ़ता ग्राफ भी स्टूडेंट्स को डराता है।
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वोट के लिए दर-दर जाने वाले प्रत्याशियों से एबीईएस आईटी के बीटेक  स्टूडेंट्स ने केवल बेहतर ट्रांसपोर्ट सेवा और सुरक्षित माहौल मुहैया करवाने की ओर कदम उठाने की मांग की। महानगर के 10 डिग्री कॉलेज, 48 इंजीनियरिंग, 65 बीएड, 34 मैनेजमेंट सहित 145 स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स रोजाना ट्रांसपोर्ट सेवा से दो-चार होते हैं।
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ओवरलोड होकर चलने वाले ऑटो व बसों से उनकी जान पर खतरा तो मंडराता रहता है, दूसरी ओर रूट वाइस किराया फिक्स नहीं होने से मनमानी वसूली भी जारी है। पॉकेट मनी लेकर घर से निकलने वाले स्टूडेंट्स की जेब तो ऑटो का किराया भरने में ही खर्च हो जाती है।

दूसरी ओर ऑटो व बसों में सफर करने वाली छात्राओं और उनके परिजनों को अपनी सुरक्षा का डर सताने लगता है। कॉलेज से घर तक के सफर में परिजनों के फोन घनघनाते रहते हैं। घर की दहलीज पर कदम रखने के बाद पैरेंट्स की सांस में सांस आती है।

दूसरी ओर लोगों की सुरक्षा के लिए शुरू  हुई डायल 100 सेवा पर कई बार फोन लगाने के बावजूद नंबर नहीं मिलने से भी स्टूडेंट्स में भारी रोष देखने को मिला। ऐसे में स्टूडेंट्स ने अपने नेताओं से उन्हें अच्छी लोकल सिटी बस सेवा मुहैया करवाने की मांग की। वहीं बिना डर के आने-जाने की स्वतंत्रता मिलने के लिए भी सरकार, प्रशासन और पुलिस के साथ सहभागिता से प्लान बनाए जाने की मांग की।

वायदे नहीं धरातल पर काम कराए नेताजी
1. कॉलेज जाने के लिए केवल ऑटो पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऑटो चालक ओवरलोडिंग करने के साथ ज्यादा किराया वसूलते हैं। अगर लोकल सिटी बस सेवा हो तो इस समस्या से निजात मिल सकती है। - जया मिश्रा, बीटेक स्टूडेंट

2. एनसीआर में होने के बावजूद गाजियाबाद में लोकल सिटी बस सेवा नहीं है। शाम होते ही ऑटो में सफर करने से डर लगता है। सुरक्षित माहौल व अच्छी यातायात सेवा के लिए कदम उठाने चाहिए। - कंचन सिंह, बीटेक  स्टूडेंट

3. खुद का वाहन नहीं है तो सुरक्षित सफर का अहसास नहीं होता। ऑटो वालों पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। विभिन्न चैक पोस्ट से भी पुलिस के नदारद रहने से हालत और खराब हो जाते हैं। इस ओर कदम उठाए जाने चाहिए। - अनमोल गर्ग, बीटेक स्टूडेंट

4. दिल्ली से लालकुआं तक का सफर हर रोज मुश्किलों भरा होता है। आधा घंटे की जगह एक घंटे से पहले बस नहीं मिलती। एक एक्सीडेंट्स होने पर 100 पर डायल किया तो फोन ही नहीं मिला। इसलिए हर एक किलोमीटर पर पुलिस की तैनाती होनी चाहिए। - देवराज कुमार, बीटेक स्टूडेंट

5. ओवरलोड ऑटो व प्राइवेट बसों के साथ वाहनों के प्रदूषण की नियमित चैकिंग नहीं होने से भी जीवन पर खतरा मंडराता रहता है। ऑटो व प्राइवेट वाहनों को भी जीपीएस से जोड़कर उनकी निगरानी की जानी चाहिए। - हर्षित अग्रवाल, बीटेक स्टूडेंट


6. लोकल सिटी बस सेवा शहरवासी की लाइफलाइन होती है। गाजियाबाद के लोग इससे कटे हुए हैं। टैक्स देने वाले लोगों का हक है कि उन्हें बेहतर लोकल बस सेवा व सुरक्षित माहौल मिले। - पंकज अग्रवाल, बीटेक स्टूडेंट

बेहतर ट्रांसपोर्ट सेवा और सुरक्षा संबंधी स्टूडेंट्स के सुझाव:
- प्रमुख मार्गों पर सरकारी सिटी बस सेवा हो शुरू
- ऑटो की हो अलग लेन, रूट वाइस तय हो किराया
- ओवरलोडिंग करने वालो वाहनों पर हो कड़ी कार्रवाई
- ऑटो और बसों को जीपीएस से किया जाए कनेक्ट
- वाहनों की प्रदूषण चेकिंग के लिए बनाया जाए सिस्टम
- व्यस्ततम मार्गों और चौराहों पर लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे
- हर एक किलोमीटर पर पुलिस की हो तैनाती
- डायल-100 सेवा को और किया जाए उन्नत
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