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गाजियाबाद: 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही महिला, बाहर निकलते समय हड़बड़ाहट में लगाई छलांग, टूट गया पैर
Thu, 28 Oct 2021 11:19 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 28 Oct 2021 11:19 AM IST
सार
बिजली जाने के बाद आदित्य वर्ल्ड सिटी के सिटी अपार्टमेंट में तीसरे-चौथे तल के बीच लिफ्ट फंस गई थी। 15 मिनट के बाद महिला को गार्ड खोज सके। अंधेरे में फंसी महिला ने बाहर निकलते वक्त लिफ्ट से छलांग लगा दी, जिससे उनका पैर टूट गया।
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विस्तार
गाजियाबाद के आदित्य वर्ल्ड सिटी स्थित सिटी अपार्टमेंट में बिजली कट जाने से 51 वर्षीय स्वाति तायल 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही। पावर बैकअप का यूपीएस नहीं लगा होने से लिफ्ट में अंधेरा छा गया। ई-टावर में तीसरे व चौथे तल के बीच फंसी लिफ्ट और पीड़ित महिला को खोजने में ही गार्ड को 15 मिनट लग गए।
जैसे-तैसे लिफ्ट में थोड़ी जगह कर महिला को निकालने का प्रयास किया गया। 20 मिनट तक अंधेरे में फंसे रहने और निकाले जाने के वक्त हड़बड़ाहट में महिला ने लिफ्ट से छलांग लगा दी। जिससे उसका पैर टूट गया। घटना के बाद रेजिडेंट्स में गुस्सा है।
ई-टावर में रहने वाली महिला स्वाति तायल मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे आठवीं मंजिला पर अपने फ्लैट में आने के लिए लिफ्ट में चढ़ी। बिजली जाने से उनकी लिफ्ट तीसरे व चौथे माले पर जाकर फंस गई। स्वाति के पति रमणिक तायल का कहना है कि उनकी पत्नी 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही, लेकिन लिफ्ट में यूपीएस का प्रबंध नहीं होने से गार्ड 15 मिनट तक खोजता ही रहा।
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थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। पिछले सप्ताह एफ टावर में कई बच्चे लिफ्ट में फंस गए थे। 17 अक्तूबर को लग्जूरिया एस्टेट सोसायटी में भी डीजी सेट का डीजल खत्म होने और बिजली कटौती होने से तीन बच्चे 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे थे। घटना के बाद सोसायटी में खूब हंगामा हुआ था।
लिफ्ट में यूपीएस की नहीं व्यवस्था, बढ़ रहा खतरा
रेजिडेंट्स का आरोप है कि बिल्डर ने दो लाख रुपये बचाने के चक्कर में लिफ्ट के लिए यूपीएस नहीं लगाया है। कटौती होते ही लिफ्ट रुकने के साथ पूरी तरह से अंधेरा हो जाता है। यूपीएस लगाने के बाबत कई बार बिल्डर से गुहार लगाई गई है, लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं है। सोसायटी में वर्तमान में अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन पदाधिकारी की कोरोना से मौत के बाद इकाई के सक्रिय नहीं होने का खामियाजा भी उठाना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने अब तक नहीं बनाया लिफ्ट एक्ट
आरडब्ल्यूए फेडरेशन ऑफ गाजियाबाद के चेयरमैन टीपी त्यागी ने कहा कि लिफ्ट में लोगों के फंसने की बढ़ती घटनाओं पर फेडरेशन ने पूर्व में यूपी सरकार से लिफ्ट एक्ट बनाने की मांग की थी। इस पर कोई कार्रवाई न होने पर 20 पेजों की ड्राफ्ट रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजा गया। उसे की स्वीकृत नहीं किया गया। ऐसे में एक्ट बनाए जाने के साथ लिफ्ट लगाने वाली एजेंसी को ही मेटेंनेंस का जिम्मा दिए जाने की जरूरत है।
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जैसे-तैसे लिफ्ट में थोड़ी जगह कर महिला को निकालने का प्रयास किया गया। 20 मिनट तक अंधेरे में फंसे रहने और निकाले जाने के वक्त हड़बड़ाहट में महिला ने लिफ्ट से छलांग लगा दी। जिससे उसका पैर टूट गया। घटना के बाद रेजिडेंट्स में गुस्सा है।
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ई-टावर में रहने वाली महिला स्वाति तायल मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे आठवीं मंजिला पर अपने फ्लैट में आने के लिए लिफ्ट में चढ़ी। बिजली जाने से उनकी लिफ्ट तीसरे व चौथे माले पर जाकर फंस गई। स्वाति के पति रमणिक तायल का कहना है कि उनकी पत्नी 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही, लेकिन लिफ्ट में यूपीएस का प्रबंध नहीं होने से गार्ड 15 मिनट तक खोजता ही रहा।
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थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। पिछले सप्ताह एफ टावर में कई बच्चे लिफ्ट में फंस गए थे। 17 अक्तूबर को लग्जूरिया एस्टेट सोसायटी में भी डीजी सेट का डीजल खत्म होने और बिजली कटौती होने से तीन बच्चे 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे थे। घटना के बाद सोसायटी में खूब हंगामा हुआ था।
लिफ्ट में यूपीएस की नहीं व्यवस्था, बढ़ रहा खतरा
रेजिडेंट्स का आरोप है कि बिल्डर ने दो लाख रुपये बचाने के चक्कर में लिफ्ट के लिए यूपीएस नहीं लगाया है। कटौती होते ही लिफ्ट रुकने के साथ पूरी तरह से अंधेरा हो जाता है। यूपीएस लगाने के बाबत कई बार बिल्डर से गुहार लगाई गई है, लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं है। सोसायटी में वर्तमान में अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन पदाधिकारी की कोरोना से मौत के बाद इकाई के सक्रिय नहीं होने का खामियाजा भी उठाना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने अब तक नहीं बनाया लिफ्ट एक्ट
आरडब्ल्यूए फेडरेशन ऑफ गाजियाबाद के चेयरमैन टीपी त्यागी ने कहा कि लिफ्ट में लोगों के फंसने की बढ़ती घटनाओं पर फेडरेशन ने पूर्व में यूपी सरकार से लिफ्ट एक्ट बनाने की मांग की थी। इस पर कोई कार्रवाई न होने पर 20 पेजों की ड्राफ्ट रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजा गया। उसे की स्वीकृत नहीं किया गया। ऐसे में एक्ट बनाए जाने के साथ लिफ्ट लगाने वाली एजेंसी को ही मेटेंनेंस का जिम्मा दिए जाने की जरूरत है।