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Ghaziabad News: टाउनशिप बसाने की शर्तें तोड़ीं, दो बिल्डरों पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट
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गाजियाबाद। बम्हेटा में करीब 300 एकड़ जमीन पर बसाई गई इंटीग्रेटेड टाउनशिप में तय शर्तों का पालन नहीं करने पर जीडीए ने बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। जीडीए जोन-5 के जेई मनोज कुमार सिंह की शिकायत पर एसएमवी एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सूर्यकांत जयपुरिया और शौर्यपुरम इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनिल जैन को प्राथमिकी में नामजद किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जेई मनोज कुमार सिंह के मुताबिक, शाहपुर-बम्हेटा की करीब 300 एकड़ जमीन पर टाउनशिप बसाने के लिए दोनों बिल्डरों ने वर्ष 2003 में आवेदन किया था। वर्ष 2006 में जीडीए ने करीब 180 एकड़ जमीन पर टाउनशिप बसाने के नक्शे को कई शर्तों के साथ मंजूरी दी थी। आरोप है कि बिल्डरों ने इन शर्तों का पालन नहीं किया।
ईडब्ल्यूएस आवास के नाम पर सिर्फ ढांचा खड़ा किया
जीडीए के मुताबिक, बिल्डरों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित आवास नहीं बनाए। केवल दिखावे के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा किया गया। टाउनशिप में पार्क, सड़क, सीवर, पेयजल, चहारदीवारी और कूड़ा निस्तारण जैसी मूलभूत सुविधाएं भी विकसित नहीं की गईं। बिजली के खंभे, खुले तार के अलावा नई इमारत बनाने के लिए करीब 30 फीट गहरा गड्ढा खोद दिया गया। गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग भी नहीं कराई गई। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासी लगातार इसकी शिकायत जीडीए में करते रहे हैं, लेकिन सुधार नहीं किया गया। मामले को लेकर जीडीए उपाध्यक्ष भी नाराजगी जता चुके हैं। एसीपी प्रियाश्री पाल ने बताया कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय निवासियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। नामजद आरोपियों से पूछताछ समेत आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।
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50 से अधिक शिकायतें, फिर भी सुनवाई नहीं
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिल्डरों की कार्यशैली शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही है। इसको लेकर जीडीए में लगातार शिकायतें की गईं। 50 से अधिक शिकायतें आईजीआरएस के माध्यम से भी की गईं। आरोप है कि शिकायतों का कागजों में निस्तारण होता रहा, लेकिन बिल्डरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई अब हुई है। स्थानीय निवासी सुनीता ने बताया कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की गई थी। इसके बावजूद टाउनशिप में बिल्डरों की मनमानी पर रोक नहीं लगी।
दो साल से अवैध प्लाटिंग का आरोप
जीडीए के जेई के मुताबिक, लगातार पत्राचार के बावजूद बिल्डरों ने अपना पक्ष नहीं रखा। सुरक्षा राशि जब्त करने के लिए भी वर्ष 2023 में चेतावनी जारी की गई थी। इसके बावजूद करीब दो साल से टाउनशिप के आसपास अवैध प्लाटिंग की जा रही थी। बड़ी संख्या में लोगों से प्लॉट के नाम पर रकम ली गई और कई लोगों के बैनामे भी कराए गए। कुछ लोगों से मोटी पेशगी लेने का भी आरोप है।
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जेई मनोज कुमार सिंह के मुताबिक, शाहपुर-बम्हेटा की करीब 300 एकड़ जमीन पर टाउनशिप बसाने के लिए दोनों बिल्डरों ने वर्ष 2003 में आवेदन किया था। वर्ष 2006 में जीडीए ने करीब 180 एकड़ जमीन पर टाउनशिप बसाने के नक्शे को कई शर्तों के साथ मंजूरी दी थी। आरोप है कि बिल्डरों ने इन शर्तों का पालन नहीं किया।
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ईडब्ल्यूएस आवास के नाम पर सिर्फ ढांचा खड़ा किया
जीडीए के मुताबिक, बिल्डरों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित आवास नहीं बनाए। केवल दिखावे के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा किया गया। टाउनशिप में पार्क, सड़क, सीवर, पेयजल, चहारदीवारी और कूड़ा निस्तारण जैसी मूलभूत सुविधाएं भी विकसित नहीं की गईं। बिजली के खंभे, खुले तार के अलावा नई इमारत बनाने के लिए करीब 30 फीट गहरा गड्ढा खोद दिया गया। गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग भी नहीं कराई गई। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासी लगातार इसकी शिकायत जीडीए में करते रहे हैं, लेकिन सुधार नहीं किया गया। मामले को लेकर जीडीए उपाध्यक्ष भी नाराजगी जता चुके हैं। एसीपी प्रियाश्री पाल ने बताया कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय निवासियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। नामजद आरोपियों से पूछताछ समेत आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।
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50 से अधिक शिकायतें, फिर भी सुनवाई नहीं
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिल्डरों की कार्यशैली शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही है। इसको लेकर जीडीए में लगातार शिकायतें की गईं। 50 से अधिक शिकायतें आईजीआरएस के माध्यम से भी की गईं। आरोप है कि शिकायतों का कागजों में निस्तारण होता रहा, लेकिन बिल्डरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई अब हुई है। स्थानीय निवासी सुनीता ने बताया कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की गई थी। इसके बावजूद टाउनशिप में बिल्डरों की मनमानी पर रोक नहीं लगी।
दो साल से अवैध प्लाटिंग का आरोप
जीडीए के जेई के मुताबिक, लगातार पत्राचार के बावजूद बिल्डरों ने अपना पक्ष नहीं रखा। सुरक्षा राशि जब्त करने के लिए भी वर्ष 2023 में चेतावनी जारी की गई थी। इसके बावजूद करीब दो साल से टाउनशिप के आसपास अवैध प्लाटिंग की जा रही थी। बड़ी संख्या में लोगों से प्लॉट के नाम पर रकम ली गई और कई लोगों के बैनामे भी कराए गए। कुछ लोगों से मोटी पेशगी लेने का भी आरोप है।