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एमएमजी अस्पताल : रेडियोलॉजी विभाग में कर्मचारियों का विवाद गहराया, रेडियोग्राफर पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल का रेडियोलॉजी विभाग इन दिनों जांच के साथ कर्मचारियों के आपसी विवाद को लेकर भी चर्चा में है। ड्यूटी को लेकर स्थायी और संविदा कर्मचारियों के बीच मतभेद के बाद मामला बढ़ गया है। कुछ कर्मचारियों ने विभाग के एक रेडियोग्राफर पर मानसिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार और अनावश्यक दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि विवाद का असर मरीजों पर भी पड़ रहा है। जांच कराने पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों पक्षों की ओर से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को अलग-अलग लिखित शिकायतें दी गई हैं। इनमें संबंधित रेडियोग्राफर के व्यवहार की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनके व्यवहार को लेकर कर्मचारियों के बीच तनाव बना रहता है। एक महिला कर्मचारी ने भी उसके व्यवहार से असहज होने की बात शिकायत में कही है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि रेडियोग्राफर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई कराने का प्रयास किया। इसके बाद एक कर्मचारी की ड्यूटी दूसरे स्थान पर लगा दी गई, जबकि अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी भी अलग-अलग कर दी गई। कर्मचारियों ने एक प्रशासनिक अधिकारी पर संबंधित रेडियोग्राफर को लगातार समर्थन देने का आरोप भी लगाया है।
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पहले भी कुछ मामलों में शुरू हुई थी जांच
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित रेडियोग्राफर के खिलाफ पहले भी दो से तीन मामलों में जांच शुरू हुई थी, लेकिन इनमें कुछ जांच अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। वर्तमान मामले में भी जांच में देरी का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने सभी शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
समिति ने किया जांच से इन्कार
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय चिकित्सकों की समिति गठित की गई थी। इसमें अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. शेखर यादव, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. अशोक कुमार, पीएमएस अध्यक्ष डॉ. एके दीक्षित, डॉ. सुपेंद्र और डॉ. आलोक रंजन को शामिल किया गया था। सीएमएस के मुताबिक, शिकायतकर्ता राहुल ने समिति पर अविश्वास जताते हुए शासन स्तर से किसी स्वतंत्र अधिकारी से जांच कराने की मांग की। इसके बाद समिति ने जांच से खुद को अलग कर लिया। सीएमएस ने बताया कि मामले की रिपोर्ट जल्द शासन को भेजी जाएगी।
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दोनों पक्षों की ओर से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को अलग-अलग लिखित शिकायतें दी गई हैं। इनमें संबंधित रेडियोग्राफर के व्यवहार की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनके व्यवहार को लेकर कर्मचारियों के बीच तनाव बना रहता है। एक महिला कर्मचारी ने भी उसके व्यवहार से असहज होने की बात शिकायत में कही है।
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शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि रेडियोग्राफर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई कराने का प्रयास किया। इसके बाद एक कर्मचारी की ड्यूटी दूसरे स्थान पर लगा दी गई, जबकि अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी भी अलग-अलग कर दी गई। कर्मचारियों ने एक प्रशासनिक अधिकारी पर संबंधित रेडियोग्राफर को लगातार समर्थन देने का आरोप भी लगाया है।
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पहले भी कुछ मामलों में शुरू हुई थी जांच
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित रेडियोग्राफर के खिलाफ पहले भी दो से तीन मामलों में जांच शुरू हुई थी, लेकिन इनमें कुछ जांच अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। वर्तमान मामले में भी जांच में देरी का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने सभी शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
समिति ने किया जांच से इन्कार
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय चिकित्सकों की समिति गठित की गई थी। इसमें अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. शेखर यादव, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. अशोक कुमार, पीएमएस अध्यक्ष डॉ. एके दीक्षित, डॉ. सुपेंद्र और डॉ. आलोक रंजन को शामिल किया गया था। सीएमएस के मुताबिक, शिकायतकर्ता राहुल ने समिति पर अविश्वास जताते हुए शासन स्तर से किसी स्वतंत्र अधिकारी से जांच कराने की मांग की। इसके बाद समिति ने जांच से खुद को अलग कर लिया। सीएमएस ने बताया कि मामले की रिपोर्ट जल्द शासन को भेजी जाएगी।