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Ghaziabad News: तलाक का केस लड़ते-लड़ते राजी हो गए साथ रहने के लिए

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 06 Dec 2023 12:29 AM IST
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While fighting the divorce case, they agreed to live together.
आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन के निवासी दिल्ली शिक्षा विभाग के अधिकारी और नोएडा में निजी कंपनी में साॅफ्टेयवर इंजीनियर युवती ने तीन साल तक परिवार न्यायालय में तलाक का मुकदमा लड़ने के बाद फिर से साथ रहने का फैसला लिया। दोनों तारीख दर तारीख से परेशान हो गए थे। एक दिन युवक ने पत्नी से पूछा कि आखिर वह चाहती क्या है? जवाब मिला, अगर तुम्हारी मां मेरे काम में दखल देना बंद कर तो कोई मसला ही न बचे। बस फिर क्या था, युवक ने मां से बात की। मां ने लिखित में दे दिया कि वह बहू के किसी काम में हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसी पर पति-पत्नी फिर से साथ रहने पर राजी हो गए।


यह अकेला मामला नहीं है, जिसमें तलाक का केस लड़ते-लड़ते पति-पत्नी ने फिर से साथ रहने का फैसला लिया हो। इस साल 30 नवंबर तक 11 महीने में ऐसे 108 दंपती ने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से साथ रहने का फैसला लिया है। अदालत ने भी इनके जज्बात देखते हुए दोनों को नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की अनुमति दी है। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें छोटी सी बात के लिए पति-पत्नी ने तलाक लेकर अलग होने का फैसला ले लिया था। कुछ वक्त गुजर जाने पर उन्हें गलती का अहसास हुआ और फिर से एक छत के नीचे आने पर राजी हो गए।
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पति ने कहा अब अब घर चलो



और मिट गईं सारी दूरियां



अधिवक्ता परविंदर नागर ने बताया कि लोनी निवासी युवती की शादी दिल्ली के सकलपुरा निवासी युवक के साथ हुई थी। दोनों अलग-अलग निजी कपंनी में नौकरी करते थे। शादी के दो साल बाद पत्नी ने दहेज मांगने का आरोप लगाकर अदालत में मुकदमा दाखिल कर दिया। छह महीने दोनों एक दूसरे से अलग रहे तो छोटी-छोटी बातों पर होने वाली तकरार को भुलाकर एक दूसरे की कमी महसूस करने लगे। एक दिन अदालत में सुनवाई के बाद दोनों एक साथ बाहर निकले तो युवक ने कहा, बहुत हुआ, अब घर चलो, उसके बाद बिना किसी आपत्ति के वह ससुराल चली गई। तीन महीने के बाद कोर्ट ने दोनों को साथ रहने की अनुमति दे दी।
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पांच साल में मिला तलाक



छह माह बाद फिर से की शादी



अधिवक्ता राजकुमार चौहान ने बताया कि इंदिरापुरम निवासी युवती ने लखनऊ निवासी युवक का तलाक पांच साल चले मुकदमे के बाद हुआ। इसके छह महीने बाद दोनों ने फिर से शादी की। इसकी वजह बना उनका बेटा। उसकी खातिर दोनों फिर से एक हुए हैं। दोनों की मुलाकात नोएडा की एक कंपनी में काम करते समय हुई थी। दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया। शादी के तीन साल बाद गौतमबुद्धनगर की अदालत में तलाक का मुकदमा डाल दिया। केस चलने के दौरान ही बेटे का जन्म हुआ था।





खत्म हो रही सुनने-सहने की क्षमता



परिवार न्यायालय के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एससी त्रिपाठी का कहना है कि बदलते परिवेश में अब युवक-युवतियों में एक दूसरे की बात सुनने व सहने की क्षमता खत्म हो रही है। छोटी-छोटी बात पर अदालत चले जाते हैं, लेकिन अदालत में लंबी तारीख लगने के बाद कुछ लोगों का भूल का एहसास होता है। ऐसे लोग मुकदमा वापस ले लेते हैं और दोबारा से नई जिंदगी शुरू करते हैं।




11 माह में 3,869 मुकदमे दर्ज



जनवरी से नवंबर तक परिवार न्यायालय में 3,986 लोगों ने अलग रहने के लिए मुकदमा दायर किया है। पांच परिवार न्यायालय में 13,510 मुकदमे चल रहे हैं। ये मुकदमे पिछले तीन साल में दायर किए गए हैं। 80 फीसदी मुकदमे पत्नियों की तरफ से दायर कर आरोप लगाया है कि ससुराल में उनका शोषण हो रहा है। वहीं 20 फीसदी मामलों में पति का आरोप है कि पत्नी ससुराल में किसी का कहना नहीं मानती है और मां-बाप को प्रताड़ित करती है।
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