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Ghaziabad News: व्यवस्था बदली तो थम गई प्रदूषण जांच की रफ्तार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 01:55 AM IST
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When the system changed, the pace of pollution testing slowed down
गाजियाबाद। वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) में दर्ज मोबाइल नंबर पर ओटीपी पहुंचने की अनिवार्यता होने के बाद जिले में प्रदूषण जांच की रफ्तार थम सी गई है। बीते नौ दिन में करीब 1500 वाहनों के प्रदूषण की जांच ही हो सकी है। रोजाना प्रदूषण जांच केंद्रों से 95 फीसदी वाहन बिना जांच किए लौटाए जा रहे हैं। इससे बिना प्रदूषण जांच कराए दौड़ने वाले वाहनों की संख्या जिले में और बढ़ने का अनुमान है।
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जिले में करीब 200 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। इन केंद्रों पर जनवरी में पेट्रोल के 97,000 और डीजल के 9,300 वाहनों की जांच करके प्रमाणपत्र जारी किए गए। 17 फरवरी 2026 को नया नियम लागू होने के बाद अब रोजाना 160 से 170 वाहनों की जांच की हो पा रही है। इससे पहले तक सभी केंद्रों पर रोजाना तीन हजार से अधिक वाहनों की प्रदूषण जांच हो रही थी।
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पिछले आंकड़ों के हिसाब से 17 फरवरी के बाद से अब तक 27,000 से अधिक वाहनों की फिटनेस जांच हो जानी चाहिए थी, लेकिन यह आकड़ा मात्र 1500 तक पहुंच पाया है। ऐसे में केंद्रों को चलाना संचालकों के लिए चुनौती बन रहा है।
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इस बारे में एआरटीओ प्रशासन अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि कोई भी नई व्यवस्था लागू होती है तो थोड़ी समस्या आती है। विभाग का प्रयास है कि फर्जीवाड़ा रुके और एकीकृत व्यवस्था होने से आने वाले समय में लोगों के लिए कम समस्या हो।
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कर चुके हड़ताल, उग्र हो सकता है आंदोलन
नई व्यवस्था लागू होने से पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) संचालकों में भारी नाराजगी पनप रही है। इसके विरोध में सोमवार को जिले के सभी प्रदूषण जांच केंद्र बंद रहे थे। मंगलवार को आरटीओ में प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों के साथ अधिकारियों ने बैठक भी की थी। पीयूसी ऑपरेटर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष दीपक अनेजा ने बताया कि नया नियम लागू करने से पहले न तो किसी वाहन स्वामी को जागरूक किया गया कि वह अपनी आरसी में मोबाइल नंबर अपडेट करा लें, न इस संंबंध में पूर्व में कोई सूचना ही जारी की गई। बिना तैयारी के नया नियम लागू कर दिया। इसमें समस्या होनी तय है।
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यह आ रही दिक्कत
एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अनेजा ने बताया कि 16 फरवरी से पहले पुराने नियम के तहत जब भी कोई वाहन की प्रदूषण जांच कराने आता था तो जो मोाबइल उसके पास होता था, उसी नंबर को डालकर ओटीपी जारी हो जाता था। संचालक की ओर से ओटीपी डालते ही प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी हो जाता था। अब नई व्यवस्था में ओटीपी उसी नंबर पर जा रहा है, जो आरसी में दर्ज है। खास बात यह है कि 75 फीसदी वाहनों में नंबर अपडेट नहीं है। जिन लोगों के नंबर अपडेट हैं, उसमें कई बार ऐसा होता है कि वाहन लेकर कोई अन्य व्यक्ति प्रदूषण जांच कराने के लिए आ जाता है। कई बार तकनीकी खामी की वजह से भी ओटीपी नहीं पहुंच पाता।

ऐसे तो बढ़ जाएगी बिना प्रदूषण जांच कराने वाले वाहनों की संख्या
जिले में 9.83 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें करीब पौने चार लाख वाहन पहले से बिना जांच कराए ही दौड़ रहे हैं। अब नई व्यवस्था में प्रदूषण जांच कराने की रफ्तार थम सी गई है तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा।

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