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Ghaziabad News: 28 प्रकार के वाहनों की फिटनेस फिर से कर सकेंगे परिवहन अधिकारी, 1.5 लाख लोगों को मिलेगी राहत

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:58 AM IST
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Transport officials will once again be able to conduct fitness checks for 28 types of vehicles; 1.5 lakh people to get relief
गाजियाबाद। सड़क परिवहन और राज्य मंत्रालय की ओर से ट्रांसपोर्टरों की सुविधा का विस्तार किया गया है। नए आदेश के तहत विशेष श्रेणी के 28 प्रकार के वाहनों को ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) की अनिवार्य जांच से छूट देते हुए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में दोबारा अधिकारियों द्वारा मैनुअल फिटनेस परीक्षण कराने की अनुमति दे दी गई है। इस फैसले से अकेले शहर के लगभग 1.5 लाख वाहन स्वामियों और ट्रांसपोर्टरों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
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दरअसल, अभी पिछले दिनों केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत सभी वाहनों की फिटनेस जांच निजी व अधिकृत ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर (एटीएस) में कराना अनिवार्य किया गया था। इस नियम के लागू होने के बाद राज्यों में कृषि, निर्माण और विशेष आकार वाले भारी वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर गंभीर तकनीकी समस्याएं सामने आने लगी थीं।
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कई राज्यों के परिवहन विभागों ने मंत्रालय को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि स्वचालित मशीनों पर कृषि ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, क्रेन, रोड रोलर, बुलडोजर और हाइड्रोलिक ट्रेलरों जैसे वाहनों का भौतिक परीक्षण संभव नहीं हो पा रहा है। इन व्यावहारिक दिक्कतों और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के स्पष्टीकरण मांगने के बाद मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। आदेश के अनुसार, अब कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली, पावर टिलर, हार्वेस्टर, निर्माण क्षेत्र में चलने वाले फोर्क लिफ्ट, रोड रोलर, डंपर, बुलडोजर, एक्सावेटर, क्रेन माउंटेड वाहन, विभिन्न प्रकार के ट्रेलर, रिग युक्त वाहन व दोनों श्रेणियों (मालवाहक व सवारी) के ई-रिक्शा की फिटनेस जांच पूर्व की भांति आरटीओ कार्यालयों में ही मैनुअल तरीके से संपन्न हो सकेगी।
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तकनीकी खामियां और मनमानी रुकने का दावा : एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि कार्यालय में अधिकारियों के समक्ष फिटनेस होने से गड़बड़ी और मनमानी की संभावना काफी कम रहेगी। अधिकारियों के मुताबिक, ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर भारी निर्माण उपकरणों व कृषि वाहनों की बनावट के अनुकूल नहीं थे, जिससे अनावश्यक रूप से जांच निरस्त हो रही थी और वाहन चालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।

अब आरटीओ स्तर पर सीधे भौतिक सत्यापन होने से कागजी प्रक्रिया और वास्तविक वाहन की स्थिति का मौके पर मिलान पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों के परिवहन आयुक्तों और वाहन पोर्टल प्रबंधन को नए दिशानिर्देशों के तहत तत्काल पोर्टल पर बदलाव करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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