{"_id":"66ef5e415da5d58e090e33c4","slug":"took-loan-for-sons-education-ration-card-canceled-ghaziabad-news-c-30-noi1096-471972-2024-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: बेटे की पढ़ाई के लिए लिया कर्ज, निरस्त हो गया राशन कार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: बेटे की पढ़ाई के लिए लिया कर्ज, निरस्त हो गया राशन कार्ड
विज्ञापन
रश्मि ओझा
गाजियाबाद। आयकर की श्रेणी में आने के कारण जिले में 13 हजार राशनकार्ड धारकों के राशन कार्ड निरस्त हो गए हैं। आयकर की श्रेणी में आने के बाद राशनकार्ड धारक शपथपत्र दे रहे हैं कि वह आयकरदाता नहींं हैं उन्होंने बच्चे की शिक्षा, बाइक या मोबाइल लेने के लिए लोन लिया था, जिसकी वजह से रिटर्न भरना जरूरी था। उनकी आय तीन लाख से कम है इसलिए उनके राशनकार्ड निरस्त ना किया जाएं। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी रिटर्न फाइल नहीं कि उनका नाम सूची में कैसे आया इसकी जानकारी नहीं।
शासन से सभी जिलों के 26930 राशनकार्डधारकों की सूची भेजी थी जो आयकरदाता हैं। इस सूची के आधार पर विभाग की तरफ से सभी की जांच कराई जा रही है। अभी तक हुई जांच में 16 हजार से अधिक राशनकार्ड धारक पात्र नहीं पाए गए हैं। इनमें से अभी तक 13 हजार कार्डधारकों के कार्ड निरस्त हो गए हैं। बाकियों के निरस्त करने की प्रक्रिया चल रही है। जांच में महज एक हजार राशनकार्ड धारक ही पात्र मिले हैं।
-- -- -- --
कुल आयकर दाता - 26930
कुल मिले अपात्र - 16271
जिनके कार्ड निरस्त हुए - 13000
कुल मिले पात्र - 1036
-- -- --
केस-1अर्थला निवासी महिला कौशल्या पाठक ने शपथपत्र दिया है कि किसी आवश्यकता की वजह से उन्होंने जीरो बैलेंस आईटीआर फाइल की थी। उनकी आय तीन लाख से काफी कम है। इसलिए उनका राशन कार्ड निरस्त ना किया जाए।
विज्ञापन
केस-2 आनंद औद्योगिक क्षेत्र मोहननगर निवासी इसरत जहां ने अपने शपथपत्र में कहा है कि बेटे की शिक्षा के लिए उन्होंने लोन लिया था। इसके लिए उनको आईटीआर फाइल करनी पड़ी थी लेकिन उनकी आय अधिक नहीं है। इसलिए राशनकार्ड निरस्त ना किया जाए।
केस-3
साहिबाबाद निवासी काश्मीरी सक्सेना ने अपने शपथपत्र में यह जानकारी दी है कि उनको 1205 रुपये की पेंशन मिलती है, जिससे गुजारा होता है। उन्होंने कभी आयकर रिटर्न नहीं भरा है। सत्यापन के दौरान उन्होंने बताया कि उनका नाम आयकर सूची में कैसे आया उनको इसकी जानकारी नहीं है।
केस-4
साहिबाबाद निवासी प्रभुनाथ सिंह का कहना है कि वह गरीबी रेखा के नीचे की श्रेणी मेंं आते हैं उनकी वार्षिक आय एक लाख 20 हजार है। उन्होंने रिटर्न कभी फाइल नहीं की।
इनसेट:
यह है मानक
राशन कार्ड पाने के लिए शासन से पात्रता निर्धारित है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में एक परिवार की सालाना आय दो लाख और शहरी क्षेत्रों में तीन लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ज्यादा आय होने पर राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाता है। प्रत्येक जिले में राशन कार्ड की संख्या निर्धारित है। वहीं, ऐसे में जिन परिवारों की आय इस निर्धारित मानक से ज्यादा हो जाती है, उनके राशन कार्ड निरस्त करके गरीबी की रेखा वाले जरूरतमंदों को दे दिए जाते हैं।
कोट्स
आयकरदाताओ की जो सूची मिली थी उसके आधार पर सभी का सत्यापन कराया गया है। इसमें बड़ी संख्या में अपात्र मिले हैं। सत्यापन में जो पात्र मिले हैं, उनसे शपथ पत्र लिया जा रहा है उनके कार्ड बहाल रहेंगे। इसके अलावा कई लोग अपात्र होने की दशा में खुद अपने राशन कार्ड निरस्त कराने के लिए जमा करा रहे हैं। जिन लोगों के कार्ड निरस्त होंगे उनकी जगह जरूरतमंदों के राशनकार्ड बनाए जाएंगे।
अमित तिवारी, जिला आपूर्ति अधिकार
विज्ञापन
गाजियाबाद। आयकर की श्रेणी में आने के कारण जिले में 13 हजार राशनकार्ड धारकों के राशन कार्ड निरस्त हो गए हैं। आयकर की श्रेणी में आने के बाद राशनकार्ड धारक शपथपत्र दे रहे हैं कि वह आयकरदाता नहींं हैं उन्होंने बच्चे की शिक्षा, बाइक या मोबाइल लेने के लिए लोन लिया था, जिसकी वजह से रिटर्न भरना जरूरी था। उनकी आय तीन लाख से कम है इसलिए उनके राशनकार्ड निरस्त ना किया जाएं। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी रिटर्न फाइल नहीं कि उनका नाम सूची में कैसे आया इसकी जानकारी नहीं।
शासन से सभी जिलों के 26930 राशनकार्डधारकों की सूची भेजी थी जो आयकरदाता हैं। इस सूची के आधार पर विभाग की तरफ से सभी की जांच कराई जा रही है। अभी तक हुई जांच में 16 हजार से अधिक राशनकार्ड धारक पात्र नहीं पाए गए हैं। इनमें से अभी तक 13 हजार कार्डधारकों के कार्ड निरस्त हो गए हैं। बाकियों के निरस्त करने की प्रक्रिया चल रही है। जांच में महज एक हजार राशनकार्ड धारक ही पात्र मिले हैं।
विज्ञापन
कुल आयकर दाता - 26930
कुल मिले अपात्र - 16271
जिनके कार्ड निरस्त हुए - 13000
कुल मिले पात्र - 1036
केस-1अर्थला निवासी महिला कौशल्या पाठक ने शपथपत्र दिया है कि किसी आवश्यकता की वजह से उन्होंने जीरो बैलेंस आईटीआर फाइल की थी। उनकी आय तीन लाख से काफी कम है। इसलिए उनका राशन कार्ड निरस्त ना किया जाए।
विज्ञापन
केस-2 आनंद औद्योगिक क्षेत्र मोहननगर निवासी इसरत जहां ने अपने शपथपत्र में कहा है कि बेटे की शिक्षा के लिए उन्होंने लोन लिया था। इसके लिए उनको आईटीआर फाइल करनी पड़ी थी लेकिन उनकी आय अधिक नहीं है। इसलिए राशनकार्ड निरस्त ना किया जाए।
केस-3
साहिबाबाद निवासी काश्मीरी सक्सेना ने अपने शपथपत्र में यह जानकारी दी है कि उनको 1205 रुपये की पेंशन मिलती है, जिससे गुजारा होता है। उन्होंने कभी आयकर रिटर्न नहीं भरा है। सत्यापन के दौरान उन्होंने बताया कि उनका नाम आयकर सूची में कैसे आया उनको इसकी जानकारी नहीं है।
केस-4
साहिबाबाद निवासी प्रभुनाथ सिंह का कहना है कि वह गरीबी रेखा के नीचे की श्रेणी मेंं आते हैं उनकी वार्षिक आय एक लाख 20 हजार है। उन्होंने रिटर्न कभी फाइल नहीं की।
इनसेट:
यह है मानक
राशन कार्ड पाने के लिए शासन से पात्रता निर्धारित है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में एक परिवार की सालाना आय दो लाख और शहरी क्षेत्रों में तीन लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ज्यादा आय होने पर राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाता है। प्रत्येक जिले में राशन कार्ड की संख्या निर्धारित है। वहीं, ऐसे में जिन परिवारों की आय इस निर्धारित मानक से ज्यादा हो जाती है, उनके राशन कार्ड निरस्त करके गरीबी की रेखा वाले जरूरतमंदों को दे दिए जाते हैं।
कोट्स
आयकरदाताओ की जो सूची मिली थी उसके आधार पर सभी का सत्यापन कराया गया है। इसमें बड़ी संख्या में अपात्र मिले हैं। सत्यापन में जो पात्र मिले हैं, उनसे शपथ पत्र लिया जा रहा है उनके कार्ड बहाल रहेंगे। इसके अलावा कई लोग अपात्र होने की दशा में खुद अपने राशन कार्ड निरस्त कराने के लिए जमा करा रहे हैं। जिन लोगों के कार्ड निरस्त होंगे उनकी जगह जरूरतमंदों के राशनकार्ड बनाए जाएंगे।
अमित तिवारी, जिला आपूर्ति अधिकार