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Ghaziabad News: मोदीनगर की हाईप्रोफाइल सोसायटी में शराब और गांजा की तस्करी, तीन गिरफ्तार
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निवाड़ी पुलिस व स्वाट टीम ने शराब तस्कर गिरोह के तीन सदस्य पकड़े। संवाद
मोदीनगर। दिल्ली-मेरठ मार्ग स्थित हाई-प्रोफाइल कनन ग्रीन सोसायटी का एक फ्लैट अंतरराज्यीय शराब और गांजा तस्करी का अड्डा बन गया था। निवाड़ी पुलिस व स्वाट टीम ग्रामीण जोन ने सोमवार रात छापा मारकर गिरोह का भंडाफोड़ किया। मौके से बिहार के तीन तस्करों को गिरफ्तार कर छह पेटी से ज्यादा हरियाणा मार्का शराब, 739 ग्राम गांजा और 1,120 रुपये नकद बरामद किए गए।
एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि कनन ग्रीन सोसायटी के फ्लैट से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी की पुख्ता सूचना मिली थी। इस पर निवाड़ी थाना प्रभारी और स्वाट टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई। रात करीब 10 बजे टीम ने फ्लैट को घेरा। अंदर मौजूद हिमांशु कुमार, अनमोल और मनीष कुमार निवासी मोकामा, पटना पुलिस को देखकर भागने लगे। टीम ने घेराबंदी कर तीनों को दबोच लिया। तलाशी में फ्लैट से शराब की पेटियां और गांजे के पैकेट मिले।
ऐसे बुना था तस्करी का जाल
पूछताछ में मुख्य आरोपी हिमांशु ने बताया कि वह चार साल पहले मोदीनगर में एक दोस्त के पास रह चुका है। यहीं उसने अनमोल और मनीष के साथ मिलकर तस्करी का प्लान बनाया। गिरोह का नेटवर्क तीन राज्यों में फैला था। तस्कर हरियाणा के मुरथल से टैक्सी बुक कर महंगे ब्रांड की शराब लाते थे। पुलिस चेकिंग से बचने के लिए लग्जरी कार का इस्तेमाल करते थे। कार की कभी चेकिंग नहीं हुई।
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मोदीनगर लाई गई शराब को फ्लैट पर कागज और टेप से पैक किया जाता था। इसके बाद ट्रेन के जरिए बिहार भेज दिया जाता। हिमांशु ने बताया कि हरियाणा में 600 रुपये की मिलने वाली बोतल बिहार में 2,000 रुपये तक बिकती है। 13 मई को भी दो पेटी शराब बिहार भेजी गई थी। वहीं बिहार से गांजा लाकर मोदीनगर, मुरादनगर, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर सप्लाई किया जाता था। तस्करी का पूरा लेनदेन ऑनलाइन किया जाता था ताकि कैश ट्रेल न मिले।
बड़े तस्करों को देख बना गिरोह, बिहार में 6 केस
हिमांशु ने पुलिस को बताया कि बिहार में शराबबंदी के बाद तस्करी बड़े स्तर पर हो रही है। वहां कई बड़े तस्कर करोड़ों रुपये महीना कमाते हैं। उन्हीं को देखकर उसने भी गिरोह बनाया। एसीपी ने बताया कि हिमांशु पर बिहार के मोकामा थाने में मारपीट, आर्म्स एक्ट समेत छह मुकदमे दर्ज हैं। बाकी दोनों आरोपियों का भी आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
सुरक्षा पर सवाल: बिना सत्यापन मिला फ्लैट
कनन ग्रीन सोसायटी को पॉश और सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद तस्करों ने एक महीने पहले ही ब्रोकर के जरिए यहां फ्लैट किराए पर ले लिया। न पुलिस सत्यापन हुआ, न सोसायटी ने जांच की। पुलिस का दावा है कि जिले में हर किरायेदार का सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन इस घटना ने दावों की पोल खोल दी। मोदीनगर पहले से ही हिस्ट्रीशीटरों की गैंगवार और आपराधिक घटनाओं के लिए संवेदनशील है।
एसीपी ने बताया कि गिरोह के बिहार और हरियाणा में बैठे अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। सप्लाई चेन और फाइनेंशियल लिंक भी खंगाले जा रहे हैं। बरामद शराब और गांजे को सील कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि कनन ग्रीन सोसायटी के फ्लैट से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी की पुख्ता सूचना मिली थी। इस पर निवाड़ी थाना प्रभारी और स्वाट टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई। रात करीब 10 बजे टीम ने फ्लैट को घेरा। अंदर मौजूद हिमांशु कुमार, अनमोल और मनीष कुमार निवासी मोकामा, पटना पुलिस को देखकर भागने लगे। टीम ने घेराबंदी कर तीनों को दबोच लिया। तलाशी में फ्लैट से शराब की पेटियां और गांजे के पैकेट मिले।
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ऐसे बुना था तस्करी का जाल
पूछताछ में मुख्य आरोपी हिमांशु ने बताया कि वह चार साल पहले मोदीनगर में एक दोस्त के पास रह चुका है। यहीं उसने अनमोल और मनीष के साथ मिलकर तस्करी का प्लान बनाया। गिरोह का नेटवर्क तीन राज्यों में फैला था। तस्कर हरियाणा के मुरथल से टैक्सी बुक कर महंगे ब्रांड की शराब लाते थे। पुलिस चेकिंग से बचने के लिए लग्जरी कार का इस्तेमाल करते थे। कार की कभी चेकिंग नहीं हुई।
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मोदीनगर लाई गई शराब को फ्लैट पर कागज और टेप से पैक किया जाता था। इसके बाद ट्रेन के जरिए बिहार भेज दिया जाता। हिमांशु ने बताया कि हरियाणा में 600 रुपये की मिलने वाली बोतल बिहार में 2,000 रुपये तक बिकती है। 13 मई को भी दो पेटी शराब बिहार भेजी गई थी। वहीं बिहार से गांजा लाकर मोदीनगर, मुरादनगर, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर सप्लाई किया जाता था। तस्करी का पूरा लेनदेन ऑनलाइन किया जाता था ताकि कैश ट्रेल न मिले।
बड़े तस्करों को देख बना गिरोह, बिहार में 6 केस
हिमांशु ने पुलिस को बताया कि बिहार में शराबबंदी के बाद तस्करी बड़े स्तर पर हो रही है। वहां कई बड़े तस्कर करोड़ों रुपये महीना कमाते हैं। उन्हीं को देखकर उसने भी गिरोह बनाया। एसीपी ने बताया कि हिमांशु पर बिहार के मोकामा थाने में मारपीट, आर्म्स एक्ट समेत छह मुकदमे दर्ज हैं। बाकी दोनों आरोपियों का भी आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
सुरक्षा पर सवाल: बिना सत्यापन मिला फ्लैट
कनन ग्रीन सोसायटी को पॉश और सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद तस्करों ने एक महीने पहले ही ब्रोकर के जरिए यहां फ्लैट किराए पर ले लिया। न पुलिस सत्यापन हुआ, न सोसायटी ने जांच की। पुलिस का दावा है कि जिले में हर किरायेदार का सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन इस घटना ने दावों की पोल खोल दी। मोदीनगर पहले से ही हिस्ट्रीशीटरों की गैंगवार और आपराधिक घटनाओं के लिए संवेदनशील है।
एसीपी ने बताया कि गिरोह के बिहार और हरियाणा में बैठे अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। सप्लाई चेन और फाइनेंशियल लिंक भी खंगाले जा रहे हैं। बरामद शराब और गांजे को सील कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।