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Ghaziabad News: बेटे को भी मारने की थी साजिश, पिता के साथ होने से बच गया

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2024 12:43 AM IST
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There was a conspiracy to kill the son too, he was saved by being with the father
आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। हत्यारों ने आशा, एंजिल व अनन्या की हत्या के बाद बेटे आर्यन (11) की हत्या करने के लिए रेकी की थी लेकिन आर्यन दुकान से पिता रामेश्वर के साथ ही घर आया था। तीनों हत्यारों ने गांव में पीपल के पेड़ के नीचे आर्यन के अकेले का आना का इंतजार भी किया था। विक्रांत और उसकी मां गीता ने एक टीवी सीरियल देखकर रामेश्वर व उनके परिवार के सभी सदस्यों को मारने की योजना बनायी थी। घटना को अंजाम भी दिया, लेकिन चाचा रामेश्वर व उनके बेटे आर्यन बच गए। तीन वर्षीय बच्ची अनन्या का उस वर्ष नर्सरी में दाखिला होना था जबकि एंजिल कक्षा एक में पढ़ रही थी।

पिता ने छोटे बेटे के नाम खेत व प्लाॅट की कर दी वसीयत
बहादुरपुर गांव निवासी रामेश्वर त्यागी के पिता जयप्रकाश ने गांव की पांच बीघा जमीन और लोनी बेहटा हाजीपुर के दो प्लॉट की वसीयत उनके नाम कर दी थी। इस कारण उनके बड़े भाई रामकिशन का परिवार रंजिश रखने लगा था। जबकि भाई के घर का खर्च भी रामेश्वर उठा रहे थे। उस समय विक्रांत सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता था, जबकि उसकी बहन प्रियंका बीए की छात्रा थी। हत्या की वारदात को आत्महत्या दर्शाने की कोशिश की गई थी। दूध में सल्फास मिलाकर जबरन पिलाने के बाद मां-बेटियों का गला घोंटा गया। आसपास से सल्फास की बदबू आने पर लोग समझते कि तीनों ने आत्महत्या की है। वसीयत की रंजिश रखते हुए नवंबर 2018 में भतीजी प्रियंका ने रामेश्वर के खिलाफ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की जांच में मामला फर्जी निकला था।
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हादसे के बाद घरों में नहीं जले थे चूल्हे
मां बेटियों की हत्या के बाद गांव का माहौल गमगीन हो गया, लोगों ने रात से अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाया। उस समय सबकी जबान पर यही एक शब्द था मासूम बच्चियों की हत्या करते समय हत्यारों का दिल नहीं पसीजा।
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बचाव पक्ष ने कहा, संपत्ति विवाद में गलत फंसाया
बचाव पक्ष ने कहा कि एक ही परिवार के सदस्यों में संपत्ति विवाद का मामला था। मुकदमा दर्ज कराने वाले रामेश्वर उनका सगा चाचा है। दोषी गीता बुजुर्ग महिला है। विक्रान्त व प्रियंका युवा हैं। संपत्ति के विवाद में उन्हें गलत फंसाया गया है। दोषियों की पारिवारिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। इसलिए परिस्थितियों के दृष्टिगत उनके प्रति नरम रुख अपनाकर कम से कम सजा दी जाए।
अभियोजन ने मांगी फांसी की सजा
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि यह सुनियोजित योजना के तहत की गई हत्या है। इसमें तीन व पांच वर्ष की मासूम बच्चियाें की भी गला घोंट कर हत्या की गई। दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।


अदालत ने कहा लालच में रिश्तों का हुआ कत्ल
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है। अभियुक्तों ने नजदीकी रिश्तेदारी में तीन हत्याएं की। जिनमें दो बच्चे तीन वर्ष व पांच हैं। लेकिन दुर्लभ में भी दुर्लभतम मामलों की श्रेणी / रेयरेस्ट ऑफ रेअर की श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।
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