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Ghaziabad News: सर्दी से लकवा और बधिरपन की परेशानी बढ़ी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2025 01:05 AM IST
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The problem of paralysis and deafness increased due to cold
संयुक्त जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
गाजियाबाद। सर्द हवाओं से कान में दर्द और बधिरपन की परेशानी बढ़ गई है। एमएमजी अस्पताल में रोजाना 35 से 40 ऐसे मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं, जो डॉक्टरों को बताते हैं कि सर्दी लगने के बाद सुनाई देना बंद हो गया है या कान में दर्द हो रहा है। इसके अलावा सप्ताह में पांच से सात मरीज पक्षाघात (लकवा) के भी आ रहे हैं लेकिन इलाज की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
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एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि सर्दी के मौसम में अस्थमा, हार्ट अटैक के लकवा के मरीज भी बढ़े हैं। यह परेशानी मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों में अधिक आ रही है। लकवा आने पर मरीज को बात करने और हाथ-पैर चलाने में तकलीफ होती है। मरीज को खड़े होने में दिक्कत होती है, वह अपने शरीर की पोजीशन भी नहीं बदल पाता है।
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नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. नृपेन विश्नोई ने बताया कि सर्दी बढ़ने के बाद कान के दर्द और बधिरपन के मरीज बढ़े हैं। सर्दी में ठंडी हवा लगने से दर्द कान से शुरू होकर नाक तक पहुंच सकता है। कान के अंदर की बनावट बेहद नाजुक होती है। इसकी नसें हमारे दिमाग और गले से होकर गुजरती हैं। डॉ. नृपेन ने बताया कि कान से गले तक जाने वाली यूस्टेशियन ट्यूब की मदद से बैक्टीरिया नाक तक पहुंच जाते हैं।
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रक्त संचार प्रभावित होने से लकवा
न्यूरोफिजिशयन डॉ. राकेश कुमार सिंह का कहना है कि तापमान में गिरावट की वजह से लोगों के शरीर का रक्त संचार ठीक तरह से नहीं हो रहा है। इस वजह से सर्दी में सबसे अधिक लकवा यानी कि पैरालिसिस अटैक सामान्य व्यक्तियों को भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सप्ताह में तीन से पांच मरीज लकवा के आ रहे हैं। मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों में यह खतरा अधिक है।



युवाओं में भी हो रहा लकवा
डॉ. राकेश का कहना है कि धूम्रपान और नशे की वजह से लकवे का खतरा युवाओं में बढ़ा है। रोजाना लकवा के शिकार दो-तीन मरीज इस मौसम में आ रहे हैं। सर्दी के मौसम में रक्तचाप और मधुमेह के मरीजों को अपनी दवाइयां का विशेष ख्याल रखना चाहिए। समय-समय पर थेरेपी लेनी चाहिए। युवाओं को नशा करने वाली चीजों से दूरी बनानी चाहिए।


इस तरह से करें बचाव
गले व कान को शॉल या मफलर या ऊनी कपड़ों से ढककर रखें।
खाना हल्का गर्म खाएं और पानी गुनगुना पीएं।
मधुमेह और रक्तचाप की नियमित जांच कराते रहें।

इनसे बनाएं दूरी
किसी भी तरह की नशे की लत से दूरी बनाएं।
अधिक खट्टी और ठंडी चीजें खाने से बचें।
अधिक मात्रा में चाय या कॉफी पीने से बचें।
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