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Ghaziabad News: जिला कारागार के विद्युत कक्ष में बंदी ने फंदा लगाकर दी जान
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गाजियाबाद/डासना। जिला कारागार में दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामले में निरूद्ध शिवम (19) पुत्र सुंदर निवासी गांव रवानी कटीरी, स्याना, बुलंदशहर ने विद्युत कक्ष में फंदा लगाकर जान दे दी। मंगलवार रात गिनती के समय जब बंदियों की संख्या कम हुई तो उसकी तलाश शुरू हुई। रात करीब दस बजे शिवम का शव पंखे से लटका मिला। मौके से एक मेज पर दो पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला है। शिवम के पिता ने पिलखुवा पुलिस पर उनके बेटे को झूठे केस में फंसाने और जेल में उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।
शिवम के पिता सुंदर ने बताया कि वह पिलखुवा में मदर डेयरी में काम करते थे। उनका बेटा भी एक महीने के लिए काम पर आया था। उस दौरान उनकी बेटे का संपर्क छिजारसी की एक किशोरी हो गया। उसकी मां ने पहले उनके बेटे को बुलाया और बाद में पुलिस को बुलाकर झूठे केस में फंसा दिया। आरोप है कि मामला खत्म करने के लिए पुलिस ने एक लाख रुपये और किशोरी की मां दो लाख रुपये की मांग कर रही थी। वह रुपये का इंतजाम नहीं कर पाए तो पुलिस ने उनके बेटे पर दुष्कर्म का केस लगाकर 10 सितंबर को जेल भेज दिया। इससे पूरा परिवार परेशान हो गया। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि शिवम वेल्डिंग का काम कर रहा था। मामले में जांच की जा रही है। वीडियोग्राफी कराकर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया है।
मां मुझे एक बार बाहर निकाल लो...
मौके से मिले दो पन्नों के सुसाइड नोट में शिवम ने एक पेज पर उदास बच्चे की फोटो बनाई है। जबकि, दूसरे पेज पर लिखा है मां मुझे माफ कर देना। मुझे एक बार बाहर निकाल लो। इसके अलावा जिस केस में वह जेल में आया। इस मामले में उसने लिखा उस लड़की मां और नानी इस सबकी जिम्मेदार हैं। जिनकी वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ रहा है।
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बयान घटनास्थल से दो पेज का सुसाइड नोट मिला है। जिसे कब्जे में ले लिया है। मामले में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - सिद्धार्थ गौतम, एसीपी मसूरी
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(पिता को बताई आपबीती)
पापा रुपये दे जाओ बहुत परेशान कर रहे हैं...
राहुल सिंघल
गाजियाबाद। शिवम के पिता सुंदर ने बताया कि 14 सितंबर को मिलाई के दौरान उन्होंने बेेटे को पांच हजार रुपये दिए थे। उस दौरान शिवम ने उन्हें बताया कि बैरक आवंटन के 2500 रुपये और तीन सौ रुपये की मांग कर रहे हैं। जब उनकी मंगलवार को दिन में बात हुई तो वह फिर से रुपये मांगने लगा और कहने लगा कि पापा रुपये दे जाओ यहां बहुत परेशान कर रहे हैं। रुपये नहीं देने पर मारपीट करते हैं और उल्टा सीधा काम कराते हैं।
सुंदर ने बताया कि 23 सितंबर को शिवम की पेशी हुई थी तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। मंगलवार को जब शिवम ने फोन पर बात की तो कहा कि पापा आप मिलने नहीं आए तो उन्होंने उसे बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। 25 सितंबर की तारीख लगी है। 25 को आएंगे। रोते हुए सुंदर ने बताया कि लेकिन 24 सितंबर की रात को जेल से सूचना मिली की उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली है। मामले में उन्होंने जेल प्रशासन पर लापरवाही और पिलखुवा पुलिस के उत्पीड़न से परेशान होकर जान देने का आरोप लगाया है। सुंदर ने बताया कि उनका एक बेटा था और एक बेटी है। बेटी की शादी कर चुके हैं। अब उनके घर का चिराग ही खत्म हो गया।
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शिवम के पिता सुंदर ने बताया कि वह पिलखुवा में मदर डेयरी में काम करते थे। उनका बेटा भी एक महीने के लिए काम पर आया था। उस दौरान उनकी बेटे का संपर्क छिजारसी की एक किशोरी हो गया। उसकी मां ने पहले उनके बेटे को बुलाया और बाद में पुलिस को बुलाकर झूठे केस में फंसा दिया। आरोप है कि मामला खत्म करने के लिए पुलिस ने एक लाख रुपये और किशोरी की मां दो लाख रुपये की मांग कर रही थी। वह रुपये का इंतजाम नहीं कर पाए तो पुलिस ने उनके बेटे पर दुष्कर्म का केस लगाकर 10 सितंबर को जेल भेज दिया। इससे पूरा परिवार परेशान हो गया। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि शिवम वेल्डिंग का काम कर रहा था। मामले में जांच की जा रही है। वीडियोग्राफी कराकर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया है।
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मां मुझे एक बार बाहर निकाल लो...
मौके से मिले दो पन्नों के सुसाइड नोट में शिवम ने एक पेज पर उदास बच्चे की फोटो बनाई है। जबकि, दूसरे पेज पर लिखा है मां मुझे माफ कर देना। मुझे एक बार बाहर निकाल लो। इसके अलावा जिस केस में वह जेल में आया। इस मामले में उसने लिखा उस लड़की मां और नानी इस सबकी जिम्मेदार हैं। जिनकी वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ रहा है।
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बयान घटनास्थल से दो पेज का सुसाइड नोट मिला है। जिसे कब्जे में ले लिया है। मामले में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - सिद्धार्थ गौतम, एसीपी मसूरी
(पिता को बताई आपबीती)
पापा रुपये दे जाओ बहुत परेशान कर रहे हैं...
राहुल सिंघल
गाजियाबाद। शिवम के पिता सुंदर ने बताया कि 14 सितंबर को मिलाई के दौरान उन्होंने बेेटे को पांच हजार रुपये दिए थे। उस दौरान शिवम ने उन्हें बताया कि बैरक आवंटन के 2500 रुपये और तीन सौ रुपये की मांग कर रहे हैं। जब उनकी मंगलवार को दिन में बात हुई तो वह फिर से रुपये मांगने लगा और कहने लगा कि पापा रुपये दे जाओ यहां बहुत परेशान कर रहे हैं। रुपये नहीं देने पर मारपीट करते हैं और उल्टा सीधा काम कराते हैं।
सुंदर ने बताया कि 23 सितंबर को शिवम की पेशी हुई थी तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। मंगलवार को जब शिवम ने फोन पर बात की तो कहा कि पापा आप मिलने नहीं आए तो उन्होंने उसे बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। 25 सितंबर की तारीख लगी है। 25 को आएंगे। रोते हुए सुंदर ने बताया कि लेकिन 24 सितंबर की रात को जेल से सूचना मिली की उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली है। मामले में उन्होंने जेल प्रशासन पर लापरवाही और पिलखुवा पुलिस के उत्पीड़न से परेशान होकर जान देने का आरोप लगाया है। सुंदर ने बताया कि उनका एक बेटा था और एक बेटी है। बेटी की शादी कर चुके हैं। अब उनके घर का चिराग ही खत्म हो गया।