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Ghaziabad News: दो साल में दो गुना बढ़ गई अदालतों में लंबित केसों की संख्या

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2024 04:58 AM IST
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The number of cases pending in courts has doubled in two years
गाजियाबाद। दो साल में गाजियाबाद की अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़कर दो गुना हो गया है। इस समय अदालतों में 4,09,316 मामले विचााराधीन हैं। जबकि, 2022 में 2.41 लाख केस लंबित थे। लगातार कई अदालतों का रिक्त रहना और आए दिन कचहरी में हो रही हड़ताल इसका प्रमुख कारण है। वर्तमान में एक महीने में तीन से चार हजार मुकदमे दाखिल हो चुके हैं जबकि, निस्तारण एक से डेढ़ हजार तक का ही हो पा रहा है।
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एनजेडीजी (नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड) के आंकड़ों के अनुसार इस समय 4,09,316 मामले गाजियाबाद की अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं, जबकि दो साल पहले इनकी संख्या 2,41,080 थी। हालांकि पिछले एक महीने में 60 फीसदी मुकदमों का निस्तारण हुआ है। इन केसों में जमानत अर्जी पर सुनवाई और उनका निस्तारण भी शामिल है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक साल के 2,13,173 केस विचाराधीन हैं। इनमें से 6,638 केसों का निस्तारण हुआ।
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हाईकोर्ट को लिखा जाएगा पत्र

बार अध्यक्ष दीपक शर्मा का कहना है कि अदालतों के रिक्त रहने से मुकदमों के निस्तारण में समय लग रहा है। जल्द निस्तारण के लिए जरूरी है कि खाली सभी अदालतें भरी जाएं। बार एसोसिएशन की तरफ से हाईकोर्ट को पत्र लिखकर न्यायाधीशों की नियुक्ति की मांग की जाएगी।
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30 साल से चल रहे हैं मामले
अधिवक्ता राजकुमार चौहान का कहना है कि तीस साल पुराने कई मुकदमे ऐसे हैं जो सिर्फ मारपीट या दो पार्टियों में गाली-गलौज के हैं। ऐसे मुकदमों का भी निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कचहरी में कई चेहरे ऐसे हैं जो युवावस्था में न्याय की आस में मुकदमा दाखिल कराया था लेकिन अब बुजुर्ग हो चुके हैं और उन्हें अभी भी तारीख मिल रही है।




गवाह नहीं आने से निस्तारण में देरी

जिला शासकीय अधिवक्ता राजेशचंद्र शर्मा का कहना है कि कई केसों में गवाह पुलिसकर्मियों या संबंधित डॉक्टर के अन्य जिलों में तबादले हो जाते हैं। उन्हें अदालत तक बुलाने में कई महीने लग जाते हैं। पता चलता है कि जिस दिन वह केस में बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित होते हैं, उस दिन शोक प्रस्ताव या किसी न किसी कारण से हड़ताल होने पर फिर कई महीने के लिए गवाही टल जाती है।



19 अदालतें हैं रिक्त

लंबे समय से 19 अदालतें रिक्त चल रही है। इस कारण से संबंधित इन अदालतों के केस संबद्ध अदालतों में चल रहे हैं, इस कारण से संबद्ध अदालतों पर भी दबाव बढ़ गया है। इस समय अपर जिला सत्र एवं न्यायालय के अदालत संख्या एक, पांच, 11, 17, 18, सिविल जज सीनियर डिवीजन 1,3, 5, 6, 7, 8 व 9,अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या 4, 7 व 8, सीबीआई कोर्ट के 1 व 3, एडिशनल कोर्ट नं.-1 विशेष एनआई एक्ट, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट रिक्त है।


मुकदमों की स्थिति

वर्ष विचाराधीन केस
0-1 2,14,428

2-3 53,162
4-5 47,730
6-10 47,477

10 वर्ष से अधिक 46,519
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कुल 4,09,316
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