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दूर हुए शिकवे गिले, मधुर मिलन में दिल मिले

Wed, 13 Jul 2016 01:16 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद Updated Wed, 13 Jul 2016 01:16 AM IST
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The grievance away wet, sweet hearts met in Milan
अन्य - फोटो : अमर उजाला
 महिला थाने में मंगलवार को एक दूसरे को गुलाब का फूल देकर प्यार का इजहार करते कई दंपति नजर आए। मौका था तीसरी बार आयोजित होने वाले ’मधुर मिलन’ कार्यक्रम का। सारे गिले शिकवे दूर कर 19 जोड़ों ने दुबारा अपना घर बसाने का वादा किया।
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 दंपतियों के झगड़े निपटाने के लिए पुलिस ने ‘मधुर मिलन’ नाम से कार्यक्रम चलाया हुआ है। इस बार जोड़ों ने एक दूसरे को गुलाब का फूल देकर एक दूसरे के प्रति प्यार का इजहार किया। इसमें से सात ऐसे जोड़े थे जिनकी सुलह परिवार परामर्श केंद्र में एक ही काउंसलिंग के दौरान हो गई।
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सभी जोड़ों को महिला थाने की तरफ से गिफ्ट भी दिया गया। इस मौके पर काउंसिलर गार्गी त्यागी, अनीता शर्मा, राजबीर गौतम, अनीता यादव, एन एल मित्तल, जसवंत अरोड़ा आदि मौजूद रहीं।
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परिवार के अन्य लोगों का दखल बना झगड़े का कारण
इस काउंसलिंग में अधिकतर मामले ऐसे रहे जिसमें सास-ससुर ननद आदि की दखलंदाजी झगड़े का कारण बनी। गंगापुरम के रहने वाले दंपति का कुछ ऐसा ही विवाद उन्हें महिला थाने तक ले आया। इसके अलावा एक मामला ऐसा था, जिसमें पत्नी ससुरवाल वालों के साथ नहीं रहना चाहती थी।

तीन महीने चली काउंसलिंग के बाद वह सबके साथ रहने को तैयार हो गई। इसमें ससुराल वालों को भी समझाया गया। एक सीए फैमिली ने भी काउंसलिंग के बाद साथ रहने का वादा किया।
एकाकी परिवार के कारण बढ़ रहे हैं मामले
महिला थाना प्रभारी अंजू तेवतिया ने बताया कि इस साल अब तक 1387 शिकायतें आई हैं, जिसमें से 187 पिछले साल के लंबित मामले शामिल हैं। अब तक 273 मुकदमे और 250 समझौते कराए गए हैं। आपसी गलतफहमी झगड़े का मुद्दा बनती है और आजकल सोशल साइट्स भी एक कारण बनता जा रहा है।

साहब! मुझे सिंदूर नहीं लगाने देता पति
शादी के ढाई वर्ष बाद भी पत्नी को सिंदूर न लगाने देने और अपने परिवार से न मिलवाने पर पति-पत्नी के बीच रार इतनी बढ़ी कि मामला अब जिला प्रोबेशन विभाग तक पहुंच गया है। पीड़िता ने पति के खिलाफ महिला कल्याण विभाग में शिकायत की है।

पति मोहन (काल्पनिक नाम) उससे तलाक चाहता है, जबकि पीड़िता पति के साथ ही रहना चाहती है। पीड़िता सरिता (काल्पनिक नाम) ने शिकायत की है कि वर्ष 2014 में उसने मोहन से आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। बाद में कोर्ट मैरिज भी की।

शादी के छह माह बाद सरिता ने अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दे दी, जबकि मोहन अब तक शादी की बात अपने घरवालों से छुपाए हुए है। सरिता की शिकायत है कि मोहन ने कहा था कि छह माह बाद वह उसे अपने परिवार में ले जाएगा जब उसके बड़े भाई की शादी हो जाएगी।

दूसरी ओर अब ढाई वर्ष गुजरने के बाद भी मोहन ने सरिता को परिवार वालों से नहीं मिलवाया है। सरिता का कहना है कि मोहन यह भी नहीं चाहता कि वह सिंदूर लगाए या किसी भी तरह से लोगों को मालूम हो कि वे दोनों पति-पत्नी हैं।

यहां तक कि वह अभी बच्चा भी नहीं चाहता। उसने परिजनों से मिलाने का दबाव बनाया तो पिछले एक वर्ष से वह उससे दूर रहने लगा है। इसकी वजह से दोनों के बीच कई गलतफहमियां भी पनप गईं हैं।


दूसरी ओर मोहन का कहना है कि सरिता का फ्रेंड सर्किल बहुत बड़ा है और वह हमेशा फेसबुक और व्हाट्स एप पर ही लगी रहती है। इसकी वजह से कई बार वह बेवजह गलतफहमी पाल लेती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी महेश कंडवाल ने फिलहाल दोनों को एक साथ रहने और एक दूसरे पर विश्वास बनाने को कहा है।
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