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Ghaziabad News: विदेशी संपत्ति और आय छिपाने वाले आयकर विभाग के रडार पर, 150 से ज्यादा करदाताओं की जांच

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:10 AM IST
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Taxpayers concealing foreign assets and income on Income Tax Department's radar; over 150 under scrutiny
धीरेंद्र मिश्र
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गाजियाबाद। विदेशी संपत्तियों, वास्तविक आय और वित्तीय लेनदेन की जानकारी छिपाकर आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं पर आयकर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फाइनेंशियल एसेट्स इंटेलिजेंस यूनिट (एफएआईयू) की रिपोर्ट में गाजियाबाद में 150 से अधिक ऐसे करदाताओं की पहचान हुई है, जिन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल करते समय विदेशी परिसंपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वास्तविक आय का पूरा ब्योरा नहीं दिया। इनमें रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े कई बिल्डर और बड़े कारोबारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।


आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आयकर विभाग अब इन मामलों का डेटा एनालिसिस, बैंकिंग रिकॉर्ड, विदेशी वित्तीय सूचनाओं और अन्य एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मिलान कर रहा है। जिन मामलों में जानबूझकर जानकारी छिपाने के साक्ष्य मिलेंगे, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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विदेशी संपत्ति छिपाना पड़ सकता है भारी



चार्टर्ड अकाउंटेंट व आयकर मामलों के जानकार डीके गोयल का कहना है कि आयकर कानून के तहत विदेशी बैंक खाते, शेयर, अचल संपत्ति, कंपनी में हिस्सेदारी और अन्य विदेशी वित्तीय संपत्तियों की जानकारी आयकर रिटर्न में देना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने या जानकारी छिपाने को गंभीर उल्लंघन माना जाता है। सीए अर्पित गोयल का कहना है कि सबसे पहले आयकर विभाग की ओर से मैसेज और मेल करके सही जानकारी के साथ आईटीआर रिवाइज करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद भी कमी को दुरुस्त नहीं करने पर नोटिस दिया जाता है। अघोषित संपत्ति का मामला पकड़े जाने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत उस संपत्ति पर 30 फीसदी कर के साथ 90 फीसदी तक जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। 20 लाख से ऊपर की विदेशी संपत्ति छिपाने पर 10 लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है। गंभीर मामलों में तलाशी और सर्वे की कार्रवाई और जानबूझकर गलत जानकारी देने पर अभियोजन शुरू किया जा सकता है, जिसमें कारावास का भी प्रावधान है। विदेशी अघोषित संपत्तियों के मामलों में अलग से दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।
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बिल्डरों पर भी निगाह



रिपोर्ट में रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कुछ बिल्डरों के नाम भी सामने आए हैं। आशंका है कि कई मामलों में विदेशों में निवेश, विदेशी बैंक खातों या अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों का खुलासा नहीं किया गया। विभाग ऐसे मामलों में आय के स्रोत और धन के प्रवाह की भी जांच करेगा।



डेटा मिलान से पकड़ा गया मामला



आयकर विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और विभिन्न सरकारी एवं अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का मिलान कर रहा है। इससे आय, निवेश और विदेशी संपत्तियों को छिपाने वाले मामलों की पहचान पहले की तुलना में अधिक तेजी से हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि करदाताओं को स्वेच्छा से सही और पूर्ण जानकारी देकर ही रिटर्न दाखिल करना चाहिए। गलत घोषणा भविष्य में बड़ी कानूनी और वित्तीय परेशानी का कारण बन सकती है।




जिले में 19 लाख करदाता



गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले एक वर्ष में करीब 42 हजार नए करदाता आईटीआर फाइलिंग प्रक्रिया से जुड़े हैं। इसके साथ ही गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में आईटीआर दाखिल करने वालों की कुल संख्या बढ़कर 22.17 लाख हो गई है। इनमें अकेले गाजियाबाद में ही 19 लाख से अधिक आयकरदाता हैं।
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