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Ghaziabad News: पूर्व डीएम के नाम पर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर 50 हजार ठगे
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गाजियाबाद। आईएएस व गौतमबुद्धनगर के पूर्व जिलाधिकारी की फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर घरेलू सामान कम कीमत पर बेचने के नाम पर 50 हजार रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में पीड़ित ने वेव सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया कि इकला गांव के रहने वाले नीरज नागर के मुताबिक साइबर ठगों ने आईएएस व गौतमबुद्धनगर के पूर्व जिलाधिकारी डाॅ. ब्रजेश नारायण सिंह के नाम व पहचान का दुरुपयोग करते हुए एक फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाई। फिर इस फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से उनके पिता से संपर्क किया। इसके बाद व्हाट्सएप पर खुद को सीआरपीएफ का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका स्थानांतरण होने वाला है, इसलिए वह अपना फर्नीचर एवं अन्य घरेलू सामान कम मूल्य पर बेच रहे हैं। साथ ही यह विश्वास दिलाया गया कि भुगतान प्राप्त होने के बाद अगले दिन आर्मी ट्रक के माध्यम से सामान बताए पते पर भिजवा दिया जाएगा। बातों पर विश्वास कर उनके पिता ने 50 हजार रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद न तो कोई सामान आया और फोन भी उठाना बंद कर दिया। जांच करने पर पता चला कि जिस फेसबुक प्रोफाइल के माध्यम से संपर्क किया था, वह फर्जी थी। एसीपी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जिन खातों में रकम गई है। उनका पता लगाया जा रहा है, ताकि रकम फ्रीज कराई जा सके।
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एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया कि इकला गांव के रहने वाले नीरज नागर के मुताबिक साइबर ठगों ने आईएएस व गौतमबुद्धनगर के पूर्व जिलाधिकारी डाॅ. ब्रजेश नारायण सिंह के नाम व पहचान का दुरुपयोग करते हुए एक फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाई। फिर इस फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से उनके पिता से संपर्क किया। इसके बाद व्हाट्सएप पर खुद को सीआरपीएफ का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका स्थानांतरण होने वाला है, इसलिए वह अपना फर्नीचर एवं अन्य घरेलू सामान कम मूल्य पर बेच रहे हैं। साथ ही यह विश्वास दिलाया गया कि भुगतान प्राप्त होने के बाद अगले दिन आर्मी ट्रक के माध्यम से सामान बताए पते पर भिजवा दिया जाएगा। बातों पर विश्वास कर उनके पिता ने 50 हजार रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद न तो कोई सामान आया और फोन भी उठाना बंद कर दिया। जांच करने पर पता चला कि जिस फेसबुक प्रोफाइल के माध्यम से संपर्क किया था, वह फर्जी थी। एसीपी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जिन खातों में रकम गई है। उनका पता लगाया जा रहा है, ताकि रकम फ्रीज कराई जा सके।
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