{"_id":"678c00830f1701af6407b18e","slug":"supreme-court-dismissed-the-petition-filed-against-wave-city-ghaziabad-news-c-30-gbd1013-555917-2025-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: वेव सिटी के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: वेव सिटी के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
विज्ञापन
गाजियाबाद। वेव सिटी के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की दलील देते हुए खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस प्रकरण में कोई मामला नहीं बनता है इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
भारतीय किसान यूनियन पथिक ने उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके यह दलील दी थी कि वेव सिटी में गैरकानूनी तरीके से किसानों की जमीन का अधिग्रहण करके वेव सिटी को दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की इस दलील को पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। इसी को आधार बनाते हुए 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाईजस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि चार अप्रैल 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस तरह की याचिका को यह कहते हुए खारिज किया यह कोई मुद्दा ही नहीं बनता है। इससे पहले भी अलग-अलग तरह की याचिकाओं को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज किया था कि इस तरह की याचिकाओं से कोर्ट का समय खराब होता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता ऐसे मुद्दों को बार-बार घुमा फिराकर जनहित के नाम पर दायर करते हैं, इसका पहले ही निष्कर्ष निकाला जा चुका है।
विज्ञापन
भारतीय किसान यूनियन पथिक ने उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके यह दलील दी थी कि वेव सिटी में गैरकानूनी तरीके से किसानों की जमीन का अधिग्रहण करके वेव सिटी को दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की इस दलील को पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। इसी को आधार बनाते हुए 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाईजस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि चार अप्रैल 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस तरह की याचिका को यह कहते हुए खारिज किया यह कोई मुद्दा ही नहीं बनता है। इससे पहले भी अलग-अलग तरह की याचिकाओं को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज किया था कि इस तरह की याचिकाओं से कोर्ट का समय खराब होता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता ऐसे मुद्दों को बार-बार घुमा फिराकर जनहित के नाम पर दायर करते हैं, इसका पहले ही निष्कर्ष निकाला जा चुका है।
विज्ञापन