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Ghaziabad News: दिन में चली तेज हवा, आंशिक रूप से छाए रहे बादल
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हवा से उड़ती धूल.... दोपहर तीन बजे विजयनगर में तेज हवा चलने से उड़ती धूल से परेशान होते लोग। स
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। बृहस्पतिवार को 11 बजे से चार बजे तक हवा 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली। आंशिक रूप से बादल भी छाए रहे। तेज धूप निकलने के बावजूद भी बुधवार की तरह लोगों को दोपहर में गर्मी का अहसास नहीं हुआ। अधिकतम तापमान 22 व न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शाम को हवा की गति कम हो गई। शुक्रवार को अधिकतम व न्यूनतम तापमान में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ.यूपी शाही ने बताया कि रविवार तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। हवा की गति कम-ज्यादा होती रहेगी। अगले सप्ताह सोमवार को मौसम बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण बादल छाएंगे और बूंदाबांदी भी हो सकती है।
फसलों पर विपरीत असर
कृषि वैज्ञानिक डॉ.अरविंद यादव ने बताया कि इस बार पाला कम पड़ा है, जिससे अधिकतम व न्यूनतम तापमान में इजाफा हो रहा है, जो गेहूं की पछेती फसल के लिए काफी नुकसानदेय है। खास बात यह है कि पश्चिम में ज्यादातर किसान ईख व आलू की फसल को काटकर उसमें गेहूं की बुआई करते हैं। कई किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने जनवरी में गेहूं की बुआई की है। इस फसल के उत्पादन को लेकर किसानों की भी चिंता बढ़ गई है।
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गाजियाबाद। बृहस्पतिवार को 11 बजे से चार बजे तक हवा 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली। आंशिक रूप से बादल भी छाए रहे। तेज धूप निकलने के बावजूद भी बुधवार की तरह लोगों को दोपहर में गर्मी का अहसास नहीं हुआ। अधिकतम तापमान 22 व न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शाम को हवा की गति कम हो गई। शुक्रवार को अधिकतम व न्यूनतम तापमान में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ.यूपी शाही ने बताया कि रविवार तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। हवा की गति कम-ज्यादा होती रहेगी। अगले सप्ताह सोमवार को मौसम बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण बादल छाएंगे और बूंदाबांदी भी हो सकती है।
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फसलों पर विपरीत असर
कृषि वैज्ञानिक डॉ.अरविंद यादव ने बताया कि इस बार पाला कम पड़ा है, जिससे अधिकतम व न्यूनतम तापमान में इजाफा हो रहा है, जो गेहूं की पछेती फसल के लिए काफी नुकसानदेय है। खास बात यह है कि पश्चिम में ज्यादातर किसान ईख व आलू की फसल को काटकर उसमें गेहूं की बुआई करते हैं। कई किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने जनवरी में गेहूं की बुआई की है। इस फसल के उत्पादन को लेकर किसानों की भी चिंता बढ़ गई है।
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