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Ghaziabad News: नवंबर की बजाय जनवरी के अंतिम सप्ताह में रैन बसेरों में लगाए गए रूम हीटर
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साहिबाबाद। कड़ाके की ठंड के दौरान रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को जहां लकड़ियों के सहारे रात गुजारनी पड़ी, वहीं अब जब ठंड लगभग खत्म होने को है। उसके बाद ही अधिकारियों की नींद टूटी है। रैन बसेरों में गैस रूम हीटर लगाए जा रहे हैं। नगर निगम की यह व्यवस्था रैन बसेरों में ठहरने वालों को रास नहीं आ रही।
शहर के स्थायी और अस्थायी रैन बसेरों में ठहरने वाले लोग कडा़के की सर्दियों में ठंड से ठिठुरते रहे, लेकिन रूम हीटर नहीं लगवाए गए। अब सर्दी जाने के कगार पर है तो निगम अधिकारियों ने गैस हीटर लगवाए है। कौशांबी डिपो के अंदर और बाहर बने दोनों अस्थायी रैन बसेरों में 25 जनवरी को हीटर लगाए गए। जबकि इंदिरापुरम के मकनपुर स्थित स्थायी रैन बसेरे में 22 जनवरी और साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास बने रैन बसेरे में 27 जनवरी को गैस हीटर लगाए गए।
रैन बसेरों में ठहरने वाले लोगों का कहना है कि जब कड़ाके की ठंड थी तो हीटर की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उस समय तो लकड़ियां जलाकर किसी तरह समय गुजारा। जब सर्दी जाने को है तो रूम हीटर लगाए जा रहे है। नगर निगम को ठंड शुरू होते ही रैन बसेरों में हीटर की व्यवस्था करनी चाहिए थी। इससे बेसहारा और जरूरतमंद ठिठुरन से बच जाते। अब ठंड खत्म होने की ओर है, हीटर लगाए जाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
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शहर के स्थायी और अस्थायी रैन बसेरों में ठहरने वाले लोग कडा़के की सर्दियों में ठंड से ठिठुरते रहे, लेकिन रूम हीटर नहीं लगवाए गए। अब सर्दी जाने के कगार पर है तो निगम अधिकारियों ने गैस हीटर लगवाए है। कौशांबी डिपो के अंदर और बाहर बने दोनों अस्थायी रैन बसेरों में 25 जनवरी को हीटर लगाए गए। जबकि इंदिरापुरम के मकनपुर स्थित स्थायी रैन बसेरे में 22 जनवरी और साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास बने रैन बसेरे में 27 जनवरी को गैस हीटर लगाए गए।
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रैन बसेरों में ठहरने वाले लोगों का कहना है कि जब कड़ाके की ठंड थी तो हीटर की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उस समय तो लकड़ियां जलाकर किसी तरह समय गुजारा। जब सर्दी जाने को है तो रूम हीटर लगाए जा रहे है। नगर निगम को ठंड शुरू होते ही रैन बसेरों में हीटर की व्यवस्था करनी चाहिए थी। इससे बेसहारा और जरूरतमंद ठिठुरन से बच जाते। अब ठंड खत्म होने की ओर है, हीटर लगाए जाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
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