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Ghaziabad News: दो माह पहले बना दी सड़क, अब निर्माण के लिए निकाला टेंडर
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डिबाई। नगर पालिका अधिकारियों ने ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में भी फर्जीवाड़ा करने का रास्ता निकाल लिया। करीब दो माह पहले जिस सड़क का निर्माण करा दिया गया, अब उसके लिए नगर पालिका की ओर से टेंडर जारी किया गया है। मामला खुलने के बाद अब अधिकारी टेंडर निरस्त कराने की बात कह रहे हैं।
मोहल्ला चौक दुर्गा प्रसाद में जामा मस्जिद के सामने नगर पालिका ने करीब दो माह पहले ही सीसी रोड का निर्माण करा दिया। शुक्रवार को नगर पालिका की ओर से इस कार्य के लिए टेंडर निकाला गया। करीब 4.62 लाख से सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रकाशित होने के बाद मामला अधिकारियों के साथ ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। कार्य होने के बाद टेंडर निकालना नगर पालिका अधिकारियों की मंशा और ई-टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहा है।
शासन ने पारदर्शिता के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन हेराफेरी करने वालों ने इसमें भी धांधली का रास्ता ढूंढ लिया है। क्षेत्र निवासी संजय सिंघल ने बताया कि करीब एक माह पहले ही सड़क का निर्माण किया गया था। टेंडर हुआ या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन एक-दो बार इस कार्य की निगरानी के लिए अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि अधिकारियों ने पहले चहेते ठेकेदार से कार्य करा लिया और अब खानापूर्ति के लिए टेंडर जारी किया, ताकि ठेकेदार को भुगतान किया जा सके।
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मामला संज्ञान में आया है। गलती से टेंडर प्रकाशित हो गया था, इसे निरस्त कराया जा रहा है। - रेनू यादव, ईओ, नगर पालिका
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मोहल्ला चौक दुर्गा प्रसाद में जामा मस्जिद के सामने नगर पालिका ने करीब दो माह पहले ही सीसी रोड का निर्माण करा दिया। शुक्रवार को नगर पालिका की ओर से इस कार्य के लिए टेंडर निकाला गया। करीब 4.62 लाख से सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रकाशित होने के बाद मामला अधिकारियों के साथ ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। कार्य होने के बाद टेंडर निकालना नगर पालिका अधिकारियों की मंशा और ई-टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहा है।
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शासन ने पारदर्शिता के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन हेराफेरी करने वालों ने इसमें भी धांधली का रास्ता ढूंढ लिया है। क्षेत्र निवासी संजय सिंघल ने बताया कि करीब एक माह पहले ही सड़क का निर्माण किया गया था। टेंडर हुआ या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन एक-दो बार इस कार्य की निगरानी के लिए अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि अधिकारियों ने पहले चहेते ठेकेदार से कार्य करा लिया और अब खानापूर्ति के लिए टेंडर जारी किया, ताकि ठेकेदार को भुगतान किया जा सके।
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मामला संज्ञान में आया है। गलती से टेंडर प्रकाशित हो गया था, इसे निरस्त कराया जा रहा है। - रेनू यादव, ईओ, नगर पालिका