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Ghaziabad News: सेवानिवृत्त शिक्षिका को 27 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर 56 लाख ठगे
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गाजियाबाद। साइबर ठगों ने वैशाली निवासी सेवानिवृत्त शिक्षिका अर्चना खरे को 27 दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान उनके अलग-अलग बैंक खातों से 56,06,377 रुपये ट्रांसफर करा लिए। उनके बैंक खातों से मनी लॉड्रिंग होने का झांसा देकर ठगों ने अपने जाल में फंसाया था। पीड़िता से साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
एडीसीपी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि अर्चना खरे को एक अनजान कॉलर ने एक अप्रैल को कॉल कर बताया कि उनका मोबाइल नंबर दो दिन में बंद हो जाएगा। कारण पूछने पर बताया कि उनके मोबाइल नंबर का गलत प्रयोग हुआ है। अधिक जानकारी लेने के लिए कॉलर ने दूसरे के पास कॉल ट्रांसफर कर दी। उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल की जांच सीबीआई कर रही है। इसके बाद उसने भी दूसरे को कॉल ट्रांसफर कर दी। कॉल उठाने वाले खुद को सीबीआई अधिकारी बताया।
इसके बाद कथित सीबीआई अधिकारी ने अर्चना से कहा कि एचडीएफसी के सेंट्रल ब्रांच मैनेजर अशोक गुप्ता के ऊपर मनी लॉड्रिंग के केस दर्ज हैं। अशोक गुप्ता ने उनके आधार कार्ड से सिम खरीदा है, जिससे 100 से अधिक बैंक खाते खोलकर हवाला के रुपये ट्रांसफर किए हैं। कुछ अश्लील मैसेज भी भेजे गए हैं। धमकी देते हुए कहा कि सीनियर सिटीजन होने के नाते अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। इसके बाद उन्होंने अर्चना को वीडियो कॉल पर ले लिया।
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अर्चना ने बताया कि उनका नई दिल्ली के संसद मार्ग पर स्थित पीएनबी में खाता है। आरोपियों ने दो अप्रैल को उन्हें बैंक जाने के लिए कहा। साथ में धमकी भी दी कि जांच अधिकारी लगातार पीछा कर रहा है, कोई चालाकी की तो गिरफ्तार कर ली जाएगी। इसे बाद दो अप्रैल को 8,08,288 रुपये, 15 अप्रैल को 20,50,000 रुपये और 24,88,089 और 28 अप्रैल को 2,60,000 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए।
एडीसीपी ने बताया कि साइबर ठगों के खिलाफ बीएनएस के अंतर्गत धोखाधड़ी की धारा 318(4), जाली दस्तावेज बनाने की धारा 340(2), फर्जी तरीके से लोकसेवक बताने की धारा 204, जबरन वसूली करने की धारा 308(2), आपराधिक धमकी की धारा 351(4), गिरोहबंद अपराध करने की धारा 3(5) और कंप्यूटर संसाधनों से धनराशि ट्रांसफर की धारा 66डी में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बेटे को यूके से बुलाने की दी धमकी
सेवानिवृत्त शिक्षिका ने बताया कि सीबीआई अधिकारी बताने वाले युवक ने धमकी दी कि उनका बेटा यूके में रहता है। मनी लॉड्रिंग की जांच के दौरान उसको भी यूके से बुलाया जाएगा। इसके साथ ही पति से भी पूछताछ होगी और आय के स्रोत और मनी लॉड्रिंग कहां-कहां हुई इस बाबत भी पूछताछ की धमकी दी। इससे अर्चना डर गईं।
ऐसे बीते 27 दिन
पीड़िता अर्चना के अनुसार उनके पति रोजाना सुबह नौ बजे ड्यूटी पर चले जाते हैं। दो अप्रैल को खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले युवक ने अर्चना खरे को वीडियो कॉल की और सुबह से शाम तक वीडियो कॉल पर रहने की धमकी दी। पुलिस इंस्पेक्टर की वर्दी पहने व्यक्ति, जो खुद का नाम राकेश बरा रहा था, वीडियो कॉल पर मौजूद रहता था। महिला दवाई खाती तो वह पूछताछ करता कि कौन सी दवाई खा रही हैं, आज खाने में क्या-क्या बना है, किचन में साथ में कौन कौन है। नौकरानी का नाम क्या है और कहां रहती है। एक दिन कहा कि वाशिंग मशीन कहां रखी है, जरा दिखाओ। दरवाजे की बेल बजती को पूछता कि कौन आया है और क्या काम है आदि। सारी जानकारी वीडियो कॉल पर रहने वाला व्यक्ति एक कागज पर नोट करता रहता था। कुछ दिन बाद उन्हें माता जी बोलने लगा था। पीड़िता का कहना है कि 28 अप्रैल तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा गया।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम की करें पहचान
डराने वाली भाषा :
अगर कॉल, मैसेज या ईमेल में डराने-धमकाने वाले शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है तो सतर्क रहें।
तत्काल कार्रवाई का दबाव : यदि आपसे तुरंत जुर्माना भरने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को कहा जाए, तो यह स्कैम हो सकता है।
फर्जी दस्तावेज:
भेजे गए दस्तावेजों की वैधता को हमेशा चेक करें।
संदिग्ध संपर्क नंबर:
ऐसे कॉल या मैसेज अक्सर अनजान या निजी नंबरों से आते हैं।
ऐसे करें बचाव
-आधिकारिक पुष्टि करें : किसी भी कानूनी मामले की जानकारी के लिए संबंधित सरकारी एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क करें।
-पर्सनल डेटा न दें : कभी भी फोन या ईमेल के जरिए अपनी बैंक डिटेल्स या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
-फिशिंग लिंक से बचें : अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
-साइबर क्राइम हेल्पलाइन: यदि आपको स्कैम का शक हो, तो तुरंत स्थानीय साइबर क्राइम विभाग को सूचित करें।
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एडीसीपी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि अर्चना खरे को एक अनजान कॉलर ने एक अप्रैल को कॉल कर बताया कि उनका मोबाइल नंबर दो दिन में बंद हो जाएगा। कारण पूछने पर बताया कि उनके मोबाइल नंबर का गलत प्रयोग हुआ है। अधिक जानकारी लेने के लिए कॉलर ने दूसरे के पास कॉल ट्रांसफर कर दी। उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल की जांच सीबीआई कर रही है। इसके बाद उसने भी दूसरे को कॉल ट्रांसफर कर दी। कॉल उठाने वाले खुद को सीबीआई अधिकारी बताया।
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इसके बाद कथित सीबीआई अधिकारी ने अर्चना से कहा कि एचडीएफसी के सेंट्रल ब्रांच मैनेजर अशोक गुप्ता के ऊपर मनी लॉड्रिंग के केस दर्ज हैं। अशोक गुप्ता ने उनके आधार कार्ड से सिम खरीदा है, जिससे 100 से अधिक बैंक खाते खोलकर हवाला के रुपये ट्रांसफर किए हैं। कुछ अश्लील मैसेज भी भेजे गए हैं। धमकी देते हुए कहा कि सीनियर सिटीजन होने के नाते अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। इसके बाद उन्होंने अर्चना को वीडियो कॉल पर ले लिया।
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अर्चना ने बताया कि उनका नई दिल्ली के संसद मार्ग पर स्थित पीएनबी में खाता है। आरोपियों ने दो अप्रैल को उन्हें बैंक जाने के लिए कहा। साथ में धमकी भी दी कि जांच अधिकारी लगातार पीछा कर रहा है, कोई चालाकी की तो गिरफ्तार कर ली जाएगी। इसे बाद दो अप्रैल को 8,08,288 रुपये, 15 अप्रैल को 20,50,000 रुपये और 24,88,089 और 28 अप्रैल को 2,60,000 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए।
एडीसीपी ने बताया कि साइबर ठगों के खिलाफ बीएनएस के अंतर्गत धोखाधड़ी की धारा 318(4), जाली दस्तावेज बनाने की धारा 340(2), फर्जी तरीके से लोकसेवक बताने की धारा 204, जबरन वसूली करने की धारा 308(2), आपराधिक धमकी की धारा 351(4), गिरोहबंद अपराध करने की धारा 3(5) और कंप्यूटर संसाधनों से धनराशि ट्रांसफर की धारा 66डी में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बेटे को यूके से बुलाने की दी धमकी
सेवानिवृत्त शिक्षिका ने बताया कि सीबीआई अधिकारी बताने वाले युवक ने धमकी दी कि उनका बेटा यूके में रहता है। मनी लॉड्रिंग की जांच के दौरान उसको भी यूके से बुलाया जाएगा। इसके साथ ही पति से भी पूछताछ होगी और आय के स्रोत और मनी लॉड्रिंग कहां-कहां हुई इस बाबत भी पूछताछ की धमकी दी। इससे अर्चना डर गईं।
ऐसे बीते 27 दिन
पीड़िता अर्चना के अनुसार उनके पति रोजाना सुबह नौ बजे ड्यूटी पर चले जाते हैं। दो अप्रैल को खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले युवक ने अर्चना खरे को वीडियो कॉल की और सुबह से शाम तक वीडियो कॉल पर रहने की धमकी दी। पुलिस इंस्पेक्टर की वर्दी पहने व्यक्ति, जो खुद का नाम राकेश बरा रहा था, वीडियो कॉल पर मौजूद रहता था। महिला दवाई खाती तो वह पूछताछ करता कि कौन सी दवाई खा रही हैं, आज खाने में क्या-क्या बना है, किचन में साथ में कौन कौन है। नौकरानी का नाम क्या है और कहां रहती है। एक दिन कहा कि वाशिंग मशीन कहां रखी है, जरा दिखाओ। दरवाजे की बेल बजती को पूछता कि कौन आया है और क्या काम है आदि। सारी जानकारी वीडियो कॉल पर रहने वाला व्यक्ति एक कागज पर नोट करता रहता था। कुछ दिन बाद उन्हें माता जी बोलने लगा था। पीड़िता का कहना है कि 28 अप्रैल तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा गया।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम की करें पहचान
डराने वाली भाषा :
अगर कॉल, मैसेज या ईमेल में डराने-धमकाने वाले शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है तो सतर्क रहें।
तत्काल कार्रवाई का दबाव : यदि आपसे तुरंत जुर्माना भरने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को कहा जाए, तो यह स्कैम हो सकता है।
फर्जी दस्तावेज:
भेजे गए दस्तावेजों की वैधता को हमेशा चेक करें।
संदिग्ध संपर्क नंबर:
ऐसे कॉल या मैसेज अक्सर अनजान या निजी नंबरों से आते हैं।
ऐसे करें बचाव
-आधिकारिक पुष्टि करें : किसी भी कानूनी मामले की जानकारी के लिए संबंधित सरकारी एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क करें।
-पर्सनल डेटा न दें : कभी भी फोन या ईमेल के जरिए अपनी बैंक डिटेल्स या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
-फिशिंग लिंक से बचें : अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
-साइबर क्राइम हेल्पलाइन: यदि आपको स्कैम का शक हो, तो तुरंत स्थानीय साइबर क्राइम विभाग को सूचित करें।