एलआईसी के आईपीओ लाने का विरोध - तीनों शाखाओं में कर्मचारियो ने की नारेबाजी, कहा निजीकरण न करे सरकार माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारी संगठन आल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाॅयज एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को एलआईसी की तीनों शाखाओं के कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने एलआईसी का आईपीओ के निर्णय पर केंद्र सरकार का विरोध किया। मेरठ डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लाॅयज यूनियन के मंडलीय उपाध्यक्ष संजय कौशिक ने बताया कि चाहे देश में दैवीय आपदा हो या आर्थिक आपदा सरकार और देश को जब भी आर्थिक की जरूरत पड़ी है, एलाईसी ने हमेशा सरकार को सहारा दिया है। एलआईसी हमेशा आत्मनिर्भर रही है और आजतक सरकार से एक पैसा भी नहीं लिया। इसलिए एलआईसी में सरकार के हिस्सेदारी बेचने के निर्णय का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का ये कदम जनविरोधी है। एलआईसी में सरकारी हिस्सेदारी में किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बीमाधारकों के भरोसे को भी ठेस पहुंचेगी। बीएस नेगी ने कहा कि एक सितंबर 1956 को भारत में 245 निजी जीवन बीमा कंपनियों के घोटालों से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों के कारण ही बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण करके एलआईसी एक्ट लाया गया था। ताकि देश की जनता की गाढ़ी कमाई से की गई बचत को सुरक्षित रखा जा सके। अब सरकार वापस एलआईसी को बड़े व्यापारिक घरानों के हाथों कौड़ियों के भाव बेचना चाहती है। दिनेश कुमार ने बताया कि सरकार से हमने अपनी मांगें रखी हैं, जिसमें एलआईसी और सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों को और मजबूत बनाने, निजीकरण न करने, एलआईसी की किस्तों से जीएसटी हटाने जैसी मांगें शामिल हैं। उन्हीने कहा कि हम एलआईसी के आईपीओ, बीमा उद्योग में विदेशी निवेश, पेंशन सेक्टर में विदेशी निवेश, लेबर नियमों में मजदूर विरोधी बदलावों और सार्वजनिक विभागों के विनिवेशीकरण का विरोध करते हैं। इस अवसर पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए केवी सिंह, नीलम, अरुण, सुनील, राजू, अर्चना जैन, अर्नव, मोहित, प्रीति, अनुज,यामेश, चंचल, पूजा, दिनेश कुमार, रोहित, मयंक, अमित, शिवांग, सुमित, बीनम, सुरभि आदि मौजूद रहे।