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Ghaziabad News: दूधेश्वरनाथ मंदिर में श्रावणी पूर्णिमा पर लोगों ने किया जलाभिषेक
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गाजियाबाद। श्रावणी पूर्णिमा पर शनिवार को दूधेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। बहनों ने भगवान शंकर को रक्षासूत्र अर्पित कर भाइयों के लंबी उम्र की कामना की। भाइयों ने भी बहनों की सलामती के लिए प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने सावन के अंतिम दिन पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया।
इस मौके पर हवन-पूजन का आयोजन किया। शाम को भोले का शृंगार किया गया। उनके मोहक रूप को देखने के लिए काफी संख्या में लोग जुटे। महंत नारायण गिरि महाराज की अध्यक्षता में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान में श्रावणी पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म महोत्सव का आयोजन किया गया। विद्यालय के सभी नए विद्यार्थियों का मुंडन, कर्णभेदन व उपनयन संस्कार किया गया। इस मौके पर महंत ने कहा कि हिंदू धर्म में श्रावणी उपाकर्म का बहुत अधिक महत्व है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है और इसमें दशविध स्नान प्रायश्चित संकल्प, ऋषि पूजन नूतन, यज्ञोपवीत (पवित्र धागा) धारण, वैदिक मंत्रों का पाठ व जाप करना आदि शामिल हैं। इसे यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है, यह हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है। इस संस्कार में बालक को यज्ञोपवीत (जनेऊ) पहनाया जाता है, जो तीन धागों वाला एक पवित्र सूत्र होता है। इसे त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु व महेश का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वेदों का अध्ययन कर पूरे विश्व में सनातन धर्म, भारतीयता व भारतीय संस्कृति की ध्वजा फहराएं। इस मौके पर विश्व संवाद संपर्क सचिव अमित गोस्वामी, विद्यालय के सचिव लक्ष्मीकांत पाढ़ी, प्रधानाचार्य तोयराज उपाध्याय, आचार्य नित्यानंद, आचार्य रोहित त्रिपाठी, आचार्य किशन शर्मा, आचार्य अजय दाधीच, विद्यालय के कोषाध्यक्ष विवेक गोयल मौजूद रहे।
प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है रक्षाबंधन
विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर बीके शर्मा हनुमान ने बताया कि रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रति प्यार का प्रतीक है।
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इस मौके पर हवन-पूजन का आयोजन किया। शाम को भोले का शृंगार किया गया। उनके मोहक रूप को देखने के लिए काफी संख्या में लोग जुटे। महंत नारायण गिरि महाराज की अध्यक्षता में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान में श्रावणी पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म महोत्सव का आयोजन किया गया। विद्यालय के सभी नए विद्यार्थियों का मुंडन, कर्णभेदन व उपनयन संस्कार किया गया। इस मौके पर महंत ने कहा कि हिंदू धर्म में श्रावणी उपाकर्म का बहुत अधिक महत्व है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है और इसमें दशविध स्नान प्रायश्चित संकल्प, ऋषि पूजन नूतन, यज्ञोपवीत (पवित्र धागा) धारण, वैदिक मंत्रों का पाठ व जाप करना आदि शामिल हैं। इसे यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है, यह हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है। इस संस्कार में बालक को यज्ञोपवीत (जनेऊ) पहनाया जाता है, जो तीन धागों वाला एक पवित्र सूत्र होता है। इसे त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु व महेश का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वेदों का अध्ययन कर पूरे विश्व में सनातन धर्म, भारतीयता व भारतीय संस्कृति की ध्वजा फहराएं। इस मौके पर विश्व संवाद संपर्क सचिव अमित गोस्वामी, विद्यालय के सचिव लक्ष्मीकांत पाढ़ी, प्रधानाचार्य तोयराज उपाध्याय, आचार्य नित्यानंद, आचार्य रोहित त्रिपाठी, आचार्य किशन शर्मा, आचार्य अजय दाधीच, विद्यालय के कोषाध्यक्ष विवेक गोयल मौजूद रहे।
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प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है रक्षाबंधन
विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर बीके शर्मा हनुमान ने बताया कि रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रति प्यार का प्रतीक है।
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