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Ghaziabad: मंकी पॉक्स से संबंधित नहीं है पटना से आई बच्ची की बीमारी, डॉक्टर ने बताया पैपोलर आर्टिकेरिया

Sun, 05 Jun 2022 03:37 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 05 Jun 2022 03:37 PM IST
सार

गाजियाबाद जिला एमएमजी अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दीक्षित ने जांच के बाद बताया है कि बच्ची में जो लक्षण मिले हैं, वह पैपोलर आर्टिकेरिया (त्वचा रोग) के हैं।

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Patna girl suffering from Skin disease not Monkey Pox says Ghaziabad doctors
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

गाजियाबाद में मंकी पॉक्स से ग्रसित संदिग्ध बच्ची की जानकारी मिली है। उसके सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि बच्ची की रिपोर्ट आने में पांच से सात दिन लग सकते हैं। लेकिन इससे पहले जिला एमएमजी अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दीक्षित ने जांच के बाद बताया है कि बच्ची में जो लक्षण मिले हैं, वह पैपोलर आर्टिकेरिया (त्वचा रोग) के हैं।

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इस बीमारी में बच्चों में गर्मी के मौसम में दाने और फुंसियां निकलती हैं। धूप में जाने पर यह परेशानी और बढ़ जाती है। जो भी लक्षण मिले हैं उन्हें देखते हुए डॉ. दीक्षित ने कहा कि ये मंकी पॉक्स के लक्षण नहीं हैं।
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हालांकि नमूनों की रिपोर्ट आने तक बच्ची को आइसोलेशन में रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बच्ची को पटना ले जाने की अनुमति दी दी है। मालूम हो कि पटना से आरडीसी स्थित हर्ष ईएनटी अस्पताल में बधिरपन का इलाज कराने आई छह वर्षीय बच्ची में मंकी पॉक्स के लक्षण मिले थे। 
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मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्ची के नमूने को जांच के लिए पुणे भेजा था हालांकि बच्ची की सेहत में सुधार है। सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि बच्ची के शरीर पर जो लक्षण मिले हैं, वह मंकी पॉक्स में होते हैं, लेकिन शुरुआती जांच में मंकी पॉक्स नहीं मिला है। परिजनों ने बताया कि परिवार के एक बच्चे को कुछ दिनों में इसी तरह की खुजली और रैशेज हुए थे, लेकिन वह अपने आप सही हो गया। 


परिवार में इस बच्ची के अलावा दो और बच्चों में भी इसी तरह के लक्षण हैं। मंकी पॉक्स में इससे कुछ अलग तरह के दाने होते हैं और संक्रमित को तेज बुखार हो जाता है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने तक बच्ची को आइसोलेशन में रखने के निर्देश दिए गए हैं। परिजन चाहें तो उसे वापस ले जा सकते हैं, लेकिन उसे आइसोलेशन में ही रखना होगा।

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