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Ghaziabad News: दर्द-एसिडिटी की दवाई और नशे का नकली इंजेक्शन बरामद, स्टोर सील
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गाजियाबाद। औषधि विभाग ने रविवार को शास्त्रीनगर में पाल मेडिकल स्टोर में छापा मारकर दर्द निवारक, गैस व एसिडिटी की नकली दवाई और नशा करने के लिए बेचा जा रहा इंजेक्शन बरामद किया है। विभाग ने पकड़ी गई दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला लखनऊ भेजा है। साथ ही मेडिकल स्टोर को सील कर दिया है। इसके अलावा जांच में स्टोर पर कई अन्य दवाइयों के स्टॉक संबंधित कोई रिकार्ड नहीं मिला। औषधि निरीक्षक के अनुसार, इस अवैध कारोबार के तार बुलंदशहर के सिकंदराबाद, उत्तराखंड, गोविंदपुरम और शास्त्रीनगर से भी जुड़ा हुआ है। मामले में अभी तक रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई गई है।
औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्र ने बताया कि शास्त्रीनगर में पॉल मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण के दौरान दर्द निवारक अल्ट्रासेट के 610 डिब्बे में 9150 टैबलेट, गैस और एसिडिटी के इलाज में प्रयोग होने वाली पेनटॉप 1020 डिब्बे में 10,200 टैबलेट और साइड इफेक्ट कम करने व नशे के रूप में प्रयोग होने वाली इंजेक्शन की 1525 वायल मिली। मेडिकल स्टोर संचालक नरेंद्र कुमार किसी भी दवाई का बिल नहीं दिखा पाया। पूछताछ में उसने बताया कि दवाई दिलाने में सहकारी नगर निवासी प्रतीक मलिक मध्यस्थता करता था। उसने कहा था कि नकली दवाई कम दाम में दिलवा देगा, जो असली दवाई की तरह दिखती है।
इसके बाद प्रतीक गोविंदपुरम निवासी परवेज अहमद से दवाइयां दिलवाता था। इसके अलावा साइड इफेक्ट कम करने व नशे के रूप में प्रयोग होने वाली इंजेक्शन की वायल सिकंदराबाद के गुप्ता मेडिकल स्टाेर के संचालक से खरीदता था। उसने अभी तक आठ हजार वायल खरीदी थी, जिसमें से 1525 वायल बिक चुकी हैं। औषधि निरीक्षक ने बताया कि यह दवाइयां उत्तराखंड से लाकर बेची जा रही थी। उत्तराखंड में कहां से दवाई की आपूर्ति हो रही थी, इसकी जांच के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है, इसके अलावा उत्तराखंड सरकार को भी सूचना भेजी गई है।
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तीन माह में पकड़ में आया मामला
औषधि निरीक्षक का कहना है कि नशे के कारोबार की जानकारी जुटाने में तीन महीने से औषधि विभाग लगा हुआ था। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद मेडिकल स्टोर पर छापा मारा गया। कार्रवाई के दौरान पता चला कि मेडिकल स्टोर के संचालन का लाइसेंस जुलाई 2024 तक है लेकिन दवाई बेचने के लिए पंजीकृत व्यक्ति भी मौके पर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि दवा के पैकेट पर एक पासकोड होता है, जिसकी जांच करने पर पता चल जाता है कि दवाई असली है या नकली। इन दवाओं के पैकेट पर असली दवाओं की तरह नामचीन कंपनियों का नाम लिखा गया था, ताकि खरीदने वाले झांसे में आ जाएं।
सख्त कार्रवाई करने की मांग
गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी का कहना है कि यह जांच लगातार चलनी चाहिए। विभाग को मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अगर स्टोर पर बिना बिल के या नकली दवाई बेची जा रही थी तो इसमें स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। यह फर्जीवाड़े का धंधा गाजियाबाद से लेकर कई राज्यों तक फैला है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण किसी भी आरोपी को कोई गंभीर सजा नहीं हो पाती है। इसलिए इस धंधे से जुड़े लोगों में प्रशासनिक हस्तक्षेप का कोई खौफ नहीं होता है। पिछले तीन साल में जहां से नकली दवाएं पकड़ी गई हैं, वे मधुमेह, रक्तचाप और गैस सरीखी गंभीर बीमारियों की ब्रांडेड औषधियों की नकली दवाएं थीं। दवा बनाने वाली कंपनी ने ब्रांडेड औषधियों के असली पत्तों, पैकेजिंग और प्रिंटिंग मशीनों का जुगाड़ कहां से किया, नकली बार कोड कैसे छाप दिए या फर्जी बैच नंबर कैसे लिख दिए गए। यह गंभीर मुद्दा है। इनकी भी जांच होनी चाहिए।
पहले भी बरामद की जा चुकी हैं नकली दवाइयां
06 मार्च 2024 : दिल्ली बॉर्डर पर भोपुरा में नकली दवाइयां बरामद
24 सितंबर 2023 : रेलवे स्टेशन के वार्ड में उत्तराखंड से लाई गई दवाइयां बरामद
28 मई 2023 : मोदीनगर में डेयरी में रखी नकली दवाइयां बरामद
21 फरवरी 2023 : ट्रॉनिका सिटी में नकली दवाइयां बरामद
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औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्र ने बताया कि शास्त्रीनगर में पॉल मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण के दौरान दर्द निवारक अल्ट्रासेट के 610 डिब्बे में 9150 टैबलेट, गैस और एसिडिटी के इलाज में प्रयोग होने वाली पेनटॉप 1020 डिब्बे में 10,200 टैबलेट और साइड इफेक्ट कम करने व नशे के रूप में प्रयोग होने वाली इंजेक्शन की 1525 वायल मिली। मेडिकल स्टोर संचालक नरेंद्र कुमार किसी भी दवाई का बिल नहीं दिखा पाया। पूछताछ में उसने बताया कि दवाई दिलाने में सहकारी नगर निवासी प्रतीक मलिक मध्यस्थता करता था। उसने कहा था कि नकली दवाई कम दाम में दिलवा देगा, जो असली दवाई की तरह दिखती है।
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इसके बाद प्रतीक गोविंदपुरम निवासी परवेज अहमद से दवाइयां दिलवाता था। इसके अलावा साइड इफेक्ट कम करने व नशे के रूप में प्रयोग होने वाली इंजेक्शन की वायल सिकंदराबाद के गुप्ता मेडिकल स्टाेर के संचालक से खरीदता था। उसने अभी तक आठ हजार वायल खरीदी थी, जिसमें से 1525 वायल बिक चुकी हैं। औषधि निरीक्षक ने बताया कि यह दवाइयां उत्तराखंड से लाकर बेची जा रही थी। उत्तराखंड में कहां से दवाई की आपूर्ति हो रही थी, इसकी जांच के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है, इसके अलावा उत्तराखंड सरकार को भी सूचना भेजी गई है।
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तीन माह में पकड़ में आया मामला
औषधि निरीक्षक का कहना है कि नशे के कारोबार की जानकारी जुटाने में तीन महीने से औषधि विभाग लगा हुआ था। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद मेडिकल स्टोर पर छापा मारा गया। कार्रवाई के दौरान पता चला कि मेडिकल स्टोर के संचालन का लाइसेंस जुलाई 2024 तक है लेकिन दवाई बेचने के लिए पंजीकृत व्यक्ति भी मौके पर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि दवा के पैकेट पर एक पासकोड होता है, जिसकी जांच करने पर पता चल जाता है कि दवाई असली है या नकली। इन दवाओं के पैकेट पर असली दवाओं की तरह नामचीन कंपनियों का नाम लिखा गया था, ताकि खरीदने वाले झांसे में आ जाएं।
सख्त कार्रवाई करने की मांग
गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी का कहना है कि यह जांच लगातार चलनी चाहिए। विभाग को मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अगर स्टोर पर बिना बिल के या नकली दवाई बेची जा रही थी तो इसमें स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। यह फर्जीवाड़े का धंधा गाजियाबाद से लेकर कई राज्यों तक फैला है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण किसी भी आरोपी को कोई गंभीर सजा नहीं हो पाती है। इसलिए इस धंधे से जुड़े लोगों में प्रशासनिक हस्तक्षेप का कोई खौफ नहीं होता है। पिछले तीन साल में जहां से नकली दवाएं पकड़ी गई हैं, वे मधुमेह, रक्तचाप और गैस सरीखी गंभीर बीमारियों की ब्रांडेड औषधियों की नकली दवाएं थीं। दवा बनाने वाली कंपनी ने ब्रांडेड औषधियों के असली पत्तों, पैकेजिंग और प्रिंटिंग मशीनों का जुगाड़ कहां से किया, नकली बार कोड कैसे छाप दिए या फर्जी बैच नंबर कैसे लिख दिए गए। यह गंभीर मुद्दा है। इनकी भी जांच होनी चाहिए।
पहले भी बरामद की जा चुकी हैं नकली दवाइयां
06 मार्च 2024 : दिल्ली बॉर्डर पर भोपुरा में नकली दवाइयां बरामद
24 सितंबर 2023 : रेलवे स्टेशन के वार्ड में उत्तराखंड से लाई गई दवाइयां बरामद
28 मई 2023 : मोदीनगर में डेयरी में रखी नकली दवाइयां बरामद
21 फरवरी 2023 : ट्रॉनिका सिटी में नकली दवाइयां बरामद