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Ghaziabad News: पार्षदों के विरोध के बीच संपत्ति कर बढ़ाने का आदेश टला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 16 Feb 2024 01:59 AM IST
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Order to increase property tax postponed amid opposition from councilors
गाजियाबाद। एक अप्रैल 2024 से डीएम सर्किल रेट के हिसाब संपत्ति कर बढ़ाने के आदेश का नगर निगम बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में जमकर विरोध हुआ हालांकि, नगर निगम अधिकारियों ने अन्य नगर निगमों से कम दरों का हवाला दिया लेकिन पार्षदों के विरोध के बीच महापौर सुनीता दयाल ने दरें बढ़ाने पर फिलहाल रोक लगाने की घोषणा की। बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में स्पष्ट नहीं किया गया कि आने वाले दिनों में बढ़े संपत्ति कर का आदेश लागू होगा या नहीं। निगम अधिकारियों ने इस मामले में चुप्पी साध ली। वहीं, पार्षदों ने चेतावनी दी कि डीएम सर्किल रेट के हिसाब से संपत्ति कर लागू नहीं होने दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो पार्षद खुलकर विरोध करेंगे और नगर निगम पर ताला जड़ने का काम करेंगे।
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पार्षदों का तर्क
कांग्रेस पार्षद अजय शर्मा ने कहा कि सदन को गुमराह कर निगम अधिकारियों ने डीएम सर्किल रेट के हिसाब से संपत्ति बढ़ाया है जो उचित नहीं है। आदेश को निरस्त किया जाए। कार्यकारिणी के उप सभापति राजीव शर्मा ने कहा कि डेढ़ वर्ष पूर्व जिस आदेश को निरस्त किया जा चुका है, उसे लागू किस आधार पर कर दिया गया। जब तक 90 प्रतिशत संपत्तियों से कर वसूली नहीं हो, तब तक किसी भी तरह की दरें नहीं बढ़नी चाहिए। भाजपा पार्षद मनोज त्यागी ने कहा कि नगर निगम 70 प्रतिशत लोगों से टैक्स ले रहा है और 30 प्रतिशत छूटे हुए हैं। दरें बढ़ाकर उन्हीं लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का काम किया जा रहा है जो पहले से टैक्स दे रहे हैं। टैक्स नहीं देने वालों से वसूली की जाए। अगर डीएम सर्किल रेट के हिसाब से टैक्स बढ़ा तो सभी पार्षद इसका खुलकर विरोध करेंगे। जरूरत पड़ी तो नगर निगम मुख्यालय पर पार्षद खुद ही ताला जड़ने का काम करेंगे। पार्षद गौरव सोलंकी ने कहा कि सर्वसम्मति से जिस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया, उसे जनता पर क्यों थोपा जा रहा है। पार्षद शीतल देओल ने कहा कि नगर निगम पहले उन 30 प्रतिशत संपत्तियों से कर वसूले, जो इसके दायरे से बाहर हैं।
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अधिकारियों का तर्क
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि संपत्ति कर बढ़ाने के आदेश में किसी तरह नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया। शासन नगर निगमों को स्वावलंबी बनाने पर जोर दे रहा है। जब निगम की आय नहीं बढ़ेगी तो विकास कार्य कैसे कराए जाएंगे। शासन ने अवस्थापना के तहत आने वाले बजट को बंद कर दिया है। इस साल सीएम ग्रिड से 100 करोड़ रुपया मिला है, अगली साल 25 प्रतिशत आय बढ़ेगी तब ही 100 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त मिलेगी।
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मुख्य कर अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने कहा कि नगर निगम अधिनियम में नगरायुक्त को संपत्ति कर लागू करने का अधिकार है। संपत्ति कर का नया स्लैब विसंगतियों को दूर करेगा। फिलहाल, पॉश कॉलोनियों और मलिन बस्तियों का एक ही टैक्स स्लैब है। नई व्यवस्था के तहत साल 2018 में लागू डीएम सर्किल रेट का न्यूनतम स्लैब अपनाया गया है, जिसका ज्यादा भार संपत्ति मालिकों पर नहीं पड़ेगा। मेरठ, पिलखुवा, बरेली, मुरादाबाद के नगर निगमों में संपत्ति कर गाजियाबाद से कहीं ज्यादा है जबकि बढ़ने के बाद भी गाजियाबाद नगर निगम में संपत्ति कर इन शहरों से कम होगा।


व्यवस्था पूरी तरह बदलने से समस्या होगी- महापौर
महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि पिछले सदन में संपत्ति कर में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हो चुकी है। निगम के अधिकारी लाख संपत्तियों से टैक्स वसूल नहीं पाए हैं और जो लोग टैक्स दे रहे हैं उन्हीं पर बोझ डालने की तैयारी कर रहे हैं। कच्ची कॉलोनियों पर सरकार ने रोक लगा रखी है और अधिकारी उन कॉलोनियों में नई दरों से टैक्स में राहत देने की बात कहकर अवैध निर्माण को बढ़ावा देना चाहते हैं। व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने से समस्या बढ़ जाएगी। इसलिए फिलहाल संपत्ति कर बढ़ाने के आदेश को टाला जाता है। इसे एक अप्रैल से लागू नहीं होने दिया जाएगा। इस संबंध में शासन से बात की जाएगी।
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संपत्ति दर की नई दरें
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(प्रति वर्गफीट में)
12 मी. से कम चौड़ी सड़क
श्रेणी ए में 3.50 रुपये तक
श्रेणी बी में 3 .00 रुपये तक
श्रेणी सी में 2.50 रुपये तक
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12 से 24 मी. चौड़ी सड़क
श्रेणी ए में 3.75 रुपये तक
श्रेणी बी में 3.25 रुपये तक
श्रेणी सी में 2.75 रुपये तक

24 मी. से अधिक चौड़ी सड़क
श्रेणी ए में 4.00 रुपये तक
श्रेणी बी में 3.50 रुपये तक
श्रेणी सी में 3.00 रुपये तक
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