Ghaziabad By-Poll 2024: उप चुनाव में एक तिहाई ने ही किया मतदान, जो प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों में सबसे कम
मतदान कम होने की कई वजह मानी जा रही है। इनमें सबसे प्रमुख नोएडा और गुरुग्राम समेत एनसीआर के शहरों में छुट्टी न होना है। उम्मीदवारों का भी यही कहना है कि नौकरी पर जाने वाले लोग सुबह ही निकल गए। सदर क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो गाजियाबाद से बाहर नौकरी करते हैं।
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गाजियाबाद सदर सीट पर बुधवार को हुए मतदान में 4.61 लाख मतदाताओं में से एक तिहाई ने ही मतदान किया। सुबह सात से शाम के पांच बजे तक सिर्फ 33.33 फीसदी मतदान हुआ, जो प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों में सबसे कम है। दो तिहाई मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल ही नहीं किया।
हालांकि, शहर के मतदाता वोट डालने में पहली बार पीछे नहीं रहे हैं। 20 साल पहले 2004 में ऐसी ही परिस्थितियों में हुए उप चुनाव में इससे भी पांच फीसदी कम मतदान हुआ था। तब 28 फीसदी ने वोट डाले थे। 2017 में महापौर के लिए हुए उप चुनाव में तो और भी कम वोट पड़े थे। तब मतदान प्रतिशत 18 ही रहा था।
उप चुनाव के इतिहास से इन आंकड़ों को देखकर इस बार बहुत कम मतदान होने को भी प्रमुख दलों के उम्मीदवार बहुत खराब नहीं मान रहे हैं। इस बार मतदाता जैसे तैसे थर्ड डिवीजन से पास हुए हैं। 119 मतदान केंद्रों के 507 बूथों पर हुए मतदान के बाद कुल 14 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। मतगणना 23 को होगी।
छह महीने में 14 फीसदी घटा मतदान
लोकसभा चुनाव के लिए छह महीने पहले 26 अप्रैल को हुए गाजियाबाद सदर विधानसभा क्षेत्र में 47.06 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे। इस चुनाव में भाजपा विधायक अतुल गर्ग के जीत जाने से ही सीट खाली होने पर उप चुनाव हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में 53.27 फीसदी वोट डाले गए थे।
00 विधानसभा चुनाव में यहां लगभग 50 से 54 फीसदी वोट पड़ते रहे हैं। 2012 में 54.08, 2017 में 53.26 और 2022 में 51.77 फीसदी वोट पड़े थे। 2022 के मुकाबले दो साल में मतदान में 18 फीसदी घट गया है। नगर निगम के चुनाव में भी शहर में 40 से 45 फीसदी ही वोट पड़ते हैं।
उम्मीदवारों ने किया जीत का दावा, 50 हजार वोटों से मिलेगी विजय
मतदान कम होना चिंता की बात नहीं। पिछले उप चुनाव में और भी कम वोट पड़े थे। भाजपा की जीत कम से कम 50 हजार वोटों से होगी। लोगों ने विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए वोट दिया है। कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाएगी। - संजीव शर्मा, भाजपा
मतदान कम होने के कई कारण हैं, लेकिन इसका असर सपा के लिए नकारात्मक नहीं है। लोगों ने अपने मुद्दों पर वोट किया है। विकास के अछूते क्षेत्रों में लोग बदलाव चाह रहे थे। सपा 20 हजार वोटों से जीत रही है। - सिंहराज जाटव, सपा
20 हजार वोटों से होगी जीत
पूरे चुनाव में लोगों का भरपूर समर्थन मिला। कम मतदान का नतीजे पर असर नहीं पड़ने वाला। बसपा 20 हजार वोटों से जीत रही है। मतदाताओं का रुझान देखकर कार्यकर्ताओं में उत्साह साफ नजर आ रहा है।- परमानंद गर्ग, बसपा
समय मतदान प्रतिशत
सुबह नौ बजे तक 05.3
सुबह 11:00 बजे तक 12.87
दोपहर एक बजे तक 20.92
शाम तीन बजे तक 27.44
शाम पांच बजे 33.30
कुल मतदाता 4.61 लाख
मतदान किया 1.52 लाख
मतदान नहीं किया 3.09 लाख
मतदान कम होने की कई वजह मानी जा रही है। इनमें सबसे प्रमुख नोएडा और गुरुग्राम समेत एनसीआर के शहरों में छुट्टी न होना है। उम्मीदवारों का भी यही कहना है कि नौकरी पर जाने वाले लोग सुबह ही निकल गए। सदर क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो गाजियाबाद से बाहर नौकरी करते हैं।
वायु प्रदूषण भी मतदान प्रतिशत गिरने की एक वजह है। हवा में सेहत के लिए नुकसानदायक तत्व ज्यादा होने की वजह से कई दिन से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घरों से निकलने में परहेज कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से मतदाता जागरूकता के लिए कम प्रयास किए गए। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ज्यादा प्रयास किए थे। इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखा। लोगों में चुनाव के प्रति बहुत उत्साह भी नहीं था। रैलियां और रोड शो कम हुए। बड़े नेताओं में सिर्फ सीएम योगी का रोड शो हुआ। यह भी 1200 मीटर का ही था। जल्दी-जल्दी चुनाव होने से भी लोगों में मतदान का उत्साह घट जाता है। चार महीने पहले ही लोगों ने लोकसभा चुनाव के लिए मतदान किया था। कई जगह आनलाइन वोटर पर्ची न निकलने की शिकायत रही। कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए। इससे भी मतदान प्रतिशत पर असर पड़ा।
(ये कारण सपा, बसपा और भाजपा के नेताओं ने बताए)