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गाजियाबाद: ट्रांसफॉर्मर और वाहनों के पुराने ऑयल को फिल्टर कर बनाया जा रहा था नकली इंजन ऑयल, पांच करोड़ का सामान बरामद
Wed, 13 Oct 2021 10:34 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 13 Oct 2021 10:34 PM IST
सार
नकली ऑयल की फैक्टरी चलाने वाला लच्छी गिरी करीब डेढ़ दशक से इस धंधे में लिप्त है। इस दौरान वह 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुका है। अवैध फैक्टरी में बन रहा नकली लुब्रिकेंट उत्तर भारत में सप्लाई किया जा रहा था।
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नकली लुब्रिकेंट की फैक्टरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजियाबाद के कविनगर में संचालित अवैध फैक्टरी में बन रहा नकली लुब्रिकेंट उत्तर भारत में सप्लाई किया जा रहा था। पुलिस ने अभी तक यूपी, दिल्ली और हरियाणा में ऐसी 42 जगह चिन्हित की हैं जहां नकली इंजन ऑयल, 2-टी ऑयल, ब्रेक ऑयल और गियर ऑयल खपाया जा रहा था। फैक्टरी संचालक के बेटे समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस अब नकली ऑयल बेचने वालों की तलाश में जुटी है।
एएसपी सदर आकाश पटेल ने बताया कि थाना बीबीनगर, बुलंदशहर के गांव अल्लीपुर चितसोना निवासी लच्छी गिरी नामी कंपनियों के नकली इंजन ऑयल का धंधा चला रहा था। उसने कविनगर के लालकुआं में फैक्टरी चला रखी थी, जबकि पिलखुवा में उसने गोदाम बनाया हुआ था, जहां पुराने तेल को फिल्टर कर पैक किया जाता था। मसूरी में लच्छी गिरी ने दफ्तर के साथ गोदाम भी खोला हुआ था। लच्छी गिरी के बेटे सौरभ गिरी निवासी आरकेपुरम गोविंदपुरम और उसके साथी जयचंद निवासी गांव कुराली थाना जानी मेरठ को गिरफ्तार कर लिया गया है। लच्छी गिरी की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
दो तरीके से बनाया जा रहा था नकली ऑयल
बड़े वाहनों (ट्रक, बस और कार) के लिए: ट्रांसफॉर्मर के पुराने तेल को रिसाइकिल कर उसका कालापन दूर किया जाता था। इसके बाद उसमें हरा व लाल रंग मिलाकर ब्रेक ऑयल, 2-टी ऑयल, गियर ऑयल और डिस्क ब्रेक का ऑयल तैयार किया जा रहा था।
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दोपहिया वाहनों (बाइक और स्कूटी) के लिए: वाहनों से निकलने वाले पुराने तेल को रिसाइकिल करने के बाद उसमें केमिकल और रंग मिलाकर इंजन ऑयल बनाया जा रहा था। रिसाइक्लिंग के लिए मशीनें लगाई हुई हैं।
एक लीटर ऑयल की 80 रुपये लागत, मुनाफा दोगुना
ट्रांसफार्मर और वाहनों के पुराने ऑयल को फिल्टर करने में 65 रुपये और उसकी पैकिंग में 15 रुपये का खर्च आकर कुल 80 रुपये लागत आ रही थी। फैक्टरी संचालक द्वारा यह नकली ऑयल दुकानदारों को 150 रुपये में बेचा जा रहा था। दुकानदार भी एक लीटर ऑयल पर 250 रुपये कमा रहे थे।
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एएसपी सदर आकाश पटेल ने बताया कि थाना बीबीनगर, बुलंदशहर के गांव अल्लीपुर चितसोना निवासी लच्छी गिरी नामी कंपनियों के नकली इंजन ऑयल का धंधा चला रहा था। उसने कविनगर के लालकुआं में फैक्टरी चला रखी थी, जबकि पिलखुवा में उसने गोदाम बनाया हुआ था, जहां पुराने तेल को फिल्टर कर पैक किया जाता था। मसूरी में लच्छी गिरी ने दफ्तर के साथ गोदाम भी खोला हुआ था। लच्छी गिरी के बेटे सौरभ गिरी निवासी आरकेपुरम गोविंदपुरम और उसके साथी जयचंद निवासी गांव कुराली थाना जानी मेरठ को गिरफ्तार कर लिया गया है। लच्छी गिरी की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
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दो तरीके से बनाया जा रहा था नकली ऑयल
बड़े वाहनों (ट्रक, बस और कार) के लिए: ट्रांसफॉर्मर के पुराने तेल को रिसाइकिल कर उसका कालापन दूर किया जाता था। इसके बाद उसमें हरा व लाल रंग मिलाकर ब्रेक ऑयल, 2-टी ऑयल, गियर ऑयल और डिस्क ब्रेक का ऑयल तैयार किया जा रहा था।
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दोपहिया वाहनों (बाइक और स्कूटी) के लिए: वाहनों से निकलने वाले पुराने तेल को रिसाइकिल करने के बाद उसमें केमिकल और रंग मिलाकर इंजन ऑयल बनाया जा रहा था। रिसाइक्लिंग के लिए मशीनें लगाई हुई हैं।
एक लीटर ऑयल की 80 रुपये लागत, मुनाफा दोगुना
ट्रांसफार्मर और वाहनों के पुराने ऑयल को फिल्टर करने में 65 रुपये और उसकी पैकिंग में 15 रुपये का खर्च आकर कुल 80 रुपये लागत आ रही थी। फैक्टरी संचालक द्वारा यह नकली ऑयल दुकानदारों को 150 रुपये में बेचा जा रहा था। दुकानदार भी एक लीटर ऑयल पर 250 रुपये कमा रहे थे।
बड़े वाहनों में दो हजार और छोटे वाहनों में 400 किमी बाद सूख जाता था तेल
पुलिस के मुताबिक, इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने बताया कि बड़े वाहनों में इंजन ऑयल डलने के बाद 10 हजार किमी तक और दोपहिया वाहनों में तीन हजार किमी तक काम करता है, लेकिन नकली इंजन ऑयल बड़े वाहनों में दो हजार किमी और छोटे वाहनों में 300 से 400 किमी बाद ही सूखकर लुगदी बन जाता था। वाहन स्वामी ऑयल को लेकर बेफिक्र रहता और तब तक गाड़ी का इंजन बैठ जाता। अधिकांश वाहन चालक इंजन ऑयल की बजाय खराब डीजल या पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने की बात समझ लेते।
डेढ़ दशक में 100 करोड़ की संपत्ति अर्जित की
नकली ऑयल की फैक्टरी चलाने वाला लच्छी गिरी करीब डेढ़ दशक से इस धंधे में लिप्त है। इस दौरान वह 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुका है। लच्छी गिरी को 2005 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन जमानत मिल गई। 2008 में सिहानी गेट पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
जगह बदल-बदलकर करता था नकली तेल का धंधा
एएसपी सदर ने बताया कि लच्छी गिरी जगह बदल-बदलकर नकली तेल का धंधा चलाता था। कविनगर में फैक्टरी तीन माह पहले संचालित की थी। जबकि पिलखुवा में गोदाम छह माह पहले बनाया था। पूर्व में जिन स्थानों पर फैक्टरी संचालित रही, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने बताया कि बड़े वाहनों में इंजन ऑयल डलने के बाद 10 हजार किमी तक और दोपहिया वाहनों में तीन हजार किमी तक काम करता है, लेकिन नकली इंजन ऑयल बड़े वाहनों में दो हजार किमी और छोटे वाहनों में 300 से 400 किमी बाद ही सूखकर लुगदी बन जाता था। वाहन स्वामी ऑयल को लेकर बेफिक्र रहता और तब तक गाड़ी का इंजन बैठ जाता। अधिकांश वाहन चालक इंजन ऑयल की बजाय खराब डीजल या पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने की बात समझ लेते।
डेढ़ दशक में 100 करोड़ की संपत्ति अर्जित की
नकली ऑयल की फैक्टरी चलाने वाला लच्छी गिरी करीब डेढ़ दशक से इस धंधे में लिप्त है। इस दौरान वह 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुका है। लच्छी गिरी को 2005 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन जमानत मिल गई। 2008 में सिहानी गेट पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
जगह बदल-बदलकर करता था नकली तेल का धंधा
एएसपी सदर ने बताया कि लच्छी गिरी जगह बदल-बदलकर नकली तेल का धंधा चलाता था। कविनगर में फैक्टरी तीन माह पहले संचालित की थी। जबकि पिलखुवा में गोदाम छह माह पहले बनाया था। पूर्व में जिन स्थानों पर फैक्टरी संचालित रही, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है।