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Ghaziabad News: 28 ई-बसों के पंजीकरण में रोडा बने नए नियम
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साहिबाबाद। बसों के प्रदूषण से मुक्त करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से गाजियाबाद को 38 ई-बसें दी गईं, लेकिन अधिकारी 10 बसों को ही सड़कों पर उतार सकें। परविहन निगम के अधिकारी 28 बसों का पंजीकरण कराने के लिए प्रक्रिया बढ़ाई तो विभाग के ही नियम रोड़ा बन रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर इलेक्टि्रक बसों को डिपो में खड़ी कर दी गई, लेकिन आज तक उनका पंजीकरण नहीं हो सका।
दरअसल, साहिबाबाद डिपो में मौजूद 28 ई-बसों का संचालन कराने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) का अनिवार्य प्रमाणपत्र और पैनिक बटन प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिए गया था। बिना इस प्रमाणपत्र के आरटीओ की ओर से पंजीकरण नहीं किया गया। यदि इन बसों का संचालन गाजियाबाद में नहीं हो सकता था चूंकि उनके दस्तावेज ही पूरे नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बसों के पास अनिवार्य प्रमाणपत्र नहीं था तो उन्हें परिवहन निगम को क्यों सौंपा गया। अधिकारियों की मानें तो अप्रैल 2026 से मोर्थ ने सभी व्यावसायिक और सार्वजनिक यात्री वाहनों में वीएलटीडी और पैनिक बटन अनिवार्य कर दिया। इसके लिए अधिकृत कंपनियों को नोटिफाई किया गया, लेकिन संबंधित प्रक्रिया और फाइलों के लंबित रहने के कारण बसों को आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं मिल सका। नतीजतन 28 बसों का पंजीकरण रुक गया है। करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई ई-बसें डिपो में खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं और यात्रियों को भी उनका लाभ नहीं मिल रहा है। हालत यह है कि चार्जिंग स्टेशन तैयार हैं, संचालन के आदेश भी मिल चुके हैं, लेकिन बसें करीब एक साल से डिपो में धूल फांक रही हैं।
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प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बस आपूर्ति करने वाली कंपनी की है। निगम की ओर से कई बार कंपनी को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।-- -- केसरी नंदन चौधरी, आरएम, गाजियाबाद रीजन
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ई-बसों के पंजीकरण के संबंध में शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। जैसे ही निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।-- -- प्रमोद सिंह, आरटीओ प्रशासन, गाजियाबाद
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दरअसल, साहिबाबाद डिपो में मौजूद 28 ई-बसों का संचालन कराने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) का अनिवार्य प्रमाणपत्र और पैनिक बटन प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिए गया था। बिना इस प्रमाणपत्र के आरटीओ की ओर से पंजीकरण नहीं किया गया। यदि इन बसों का संचालन गाजियाबाद में नहीं हो सकता था चूंकि उनके दस्तावेज ही पूरे नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बसों के पास अनिवार्य प्रमाणपत्र नहीं था तो उन्हें परिवहन निगम को क्यों सौंपा गया। अधिकारियों की मानें तो अप्रैल 2026 से मोर्थ ने सभी व्यावसायिक और सार्वजनिक यात्री वाहनों में वीएलटीडी और पैनिक बटन अनिवार्य कर दिया। इसके लिए अधिकृत कंपनियों को नोटिफाई किया गया, लेकिन संबंधित प्रक्रिया और फाइलों के लंबित रहने के कारण बसों को आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं मिल सका। नतीजतन 28 बसों का पंजीकरण रुक गया है। करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई ई-बसें डिपो में खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं और यात्रियों को भी उनका लाभ नहीं मिल रहा है। हालत यह है कि चार्जिंग स्टेशन तैयार हैं, संचालन के आदेश भी मिल चुके हैं, लेकिन बसें करीब एक साल से डिपो में धूल फांक रही हैं।
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प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बस आपूर्ति करने वाली कंपनी की है। निगम की ओर से कई बार कंपनी को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
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ई-बसों के पंजीकरण के संबंध में शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। जैसे ही निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।