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नया बस अड्डा मेट्रो के लिए निगम ने फंड देने से किए हाथ खड़े
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 05 Mar 2017 10:48 PM IST
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- फोटो : demo pic
एक तरफ मेट्रो के लिए फंड देने के लिए जीडीए पर डीएमआरसी का दबाव बढ़ रहा है, वहीं नगर निगम ने मेट्रो प्रोजेक्ट को फंड देने के लिए साफ इंकार कर दिया। मेयर और निगम अफसरों ने साफ कर दिया कि जीडीए ने उनकी जमीनों का पैसा न दिया तो किसी सूरत में मेट्रो के लिए फंड नहीं दिया जाएगा।
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आविप और यूपीएसआईडीसी ने भी मेट्रो प्रोजेक्ट में अपनी तय हिस्सेदारी नहीं दी है। ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।2210 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में जीडीए 590 करोड़ रुपया डीएमआरसी को दे चुका है। इस प्रोजेक्ट में करीब 300 करोड़ रुपया नगर निगम को देना है। जीडीए भी नगर निगम से कई बार इस फंड की डिमांड कर चुका है।
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अब महापौर अशु वर्मा, नगरायुक्त अब्दुल समद ने साफ कर दिया है कि नगर निगम मेट्रो प्रोजेक्ट में फंड नहीं देगा। महापौर का कहना है कि जीडीए के पूर्व वीसी ने निगम की बेशकीमती जमीनों का पुनर्ग्रहण करके पैसा नगर निगम को देने का वादा किया था। निगम ने इसी शर्त पर मेट्रो में हिस्सेदारी देने की हामी भर दी थी।
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जीडीए ने वादाखिलाफी कर जमीनों करोड़ों रुपया निगम को देने की बजाय जिला प्रशासन कोे भेज दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम सिर्फ मेंटेनेंस एजेंसी है, फंड जनरेट नहीं करता। बिना जमीनों का पैसा मिले, नगर निगम मेट्रो प्रोजेक्ट में पैसा देने की स्थिति में नहीं है।
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जीडीए ने उधार लेकर डीएमआरसी को दिए 50 करोड़:
गाजियाबाद। मेट्रो प्रोजेक्ट और एलिवेटेड रोड निर्माण पर अरबों रुपया खर्च कर चुके जीडीए की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी है। जीडीए को अब डीएमआरसी को देने के लिए 50 करोड़ रुपए बैंक से ओवर ड्राफ्ट से लेना पड़ा। इससे पहले भी जीडीए 70 करोड़ रुपए ओवर ड्राफ्ट से ले चुका है।
ऐसे में कुल मिलाकर मेट्रो प्रोजेक्ट में ही जीडीए अभी 120 करोड़ का बैंकों का कर्जदार हो चुका है। जीडीए के वित्त नियंत्रक टीआर यादव ने बताया कि 31 मार्च को जीडीए की एफडी मेच्योर होने वाली है। 31 मार्च से पहले इससे पैसा लेते तो ब्याज में कटौती हो जाती।
ऐसे में 31 मार्च तक के लिए ओवर ड्राफ्ट से पैसा लिया गया है। एफडी मेच्योरिटी के बाद एफडी का जो पैसा मिलेगा उसमें लोन की रकम को समायोजित कर लिया जाएगा। इससे जीडीए को घाटा नहीं उठाना पड़ेगा।