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Ghaziabad: दिल्ली पुलिस ने यूपी बॉर्डर पर नरसिंहानंद गिरी को रोका, आमरण अनशन के लिए सड़क पर बैठे
Tue, 07 Nov 2023 02:04 PM IST
अनुज कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 07 Nov 2023 02:04 PM IST
सार
दिल्ली यूपी बॉर्डर पर पुलिस ने नरसिंहानंद गिरी के काफिले को रोक दिया। जिसके बाद वह वहीं सड़क पर ही आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
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नरसिंहानंद गिरी को दिल्ली पुलिस ने रोका
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महांडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी को एक बार फिर दिल्ली में एंट्री से रोक दिया गया है। दिल्ली यूपी बॉर्डर पर पुलिस ने नरसिंहानंद गिरी के काफिले को रोक दिया। जिसके बाद वह वहीं सड़क पर ही आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी के समर्थन में जंतर मंतर अनशन करने के लिए जा रहे थे।
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जानकारी के लिए बता दें कि गाजियाबाद के लाजपतनगर स्थित सामुदायिक केंद्र पर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के लिए महापंचायत की गई। इसमें जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल चौधरी ने एलान किया था कि कानून बनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले आमरण अनशन खत्म नहीं होगा। केंद्र के संबंधित विभाग से मंत्री अनशन स्थल पर आकर कानून बनाने की प्रक्रिया की घोषणा करें। कानून वैसा बने जैसा हम चाहते हैं।
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दिवाली के दिन 12 नवंबर को दूसरी महापंचायत रामलीला मैदान में होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से लाजपतनगर से अनशन बंद करने की कोशिश या उठा दिया गया तो गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में अनशन शुरू होगा। अगर वहां से भी उठाया गया तो मेरठ कमिश्नरी में अनशन अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर इस अनशन के बीच कुछ हो गया तो मेरे बाद विनय हिंदू, भोज कुमार, ललित फौजी, ममता अनशन पर बैठेंगी। वहीं, जरूरत पड़ी तो लाल चौक पर भी अनशन किया जाएगा।
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इससे पहले बीती 18 अक्तूबर को महांडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी को दिल्ली पुलिस ने इस्रायली दूतावास जाने से रोक दिया था। महंत यति इस्रायली दूतावास जाकर अपने खून से लिखे पत्र को सौंपने वाले थे। यति नरसिंहानंद ने बताया था कि दिल्ली पहुंचते ही पुलिस ने उनको रास्ते में घेर लिया था। वहां से तिलक मार्ग थाने ले गए। वहां रक्त लिखित पत्र थाने में ही पुलिस उपायुक्त को सौंपने को मजबूर किया गया। वहां से उन्हें जबरदस्ती वापस डासना छोड़ा गया।
उन्होंने कहा था कि यह संवैधानिक अधिकारों का हनन है। यति नरसिंहानंद गिरी अपने शिष्यों के साथ इस्रायल जाने और सरकार का समर्थन करने की अपील की थी। उन्होंने इस्रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खून से पत्र लिखा था, जिसे दूतावास में देने जा रहे थे। उनके साथ डॉ. उदिता त्यागी, अनिल यादव, धीरज फौजी, यति रणसिंहानंद, सूचित त्यागी, मोहित बजरंगी, यति सत्यानंद, अरुण त्यागी, बॉबी त्यागी मौजूद थे।