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घर जाने की छटपटाहट है पर नहीं जानते कैसे होता पंजीकरण

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 06:12 PM IST
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lockdown
\n\nअभी भी बहुत मजदूर ऐसे जो घर जाने के लिए नहीं करा सके पंजीकरण\n\n- साहिबाबाद इलाके में दिहारी मजदूर घर जाने को हैं परेशान\n\n- जिला प्रशासन के पंजीकरण का नहीं मिल सका लाभ\n\n- लोगों ने कहा मालूम ही नहीं कहां और कैसे कराना था पंजीकरण\n\nमाई सिटी रिपोर्टर\n\nसाहिबाबाद। गाजियाबाद जिला प्रशासन की ओर से मजदूरों को उनके गांव भेजने की पहल शुक्रवार को शुरू हुई। हालांकि शुक्रवार को जिला प्रशासन ने बहुत से मजदूरों को उनके गांव भेजने की पहल की। वहीं शहर में अभी असंख्य मजूदर ऐसे भी हैं जिन्हें जिला प्रशासन के इस योजना की जानकारी ही नहीं थी। इन लोगों को यह भी नहीं मालूम कि यह अपना पंजीकरण कहां और कैसे कराएं ताकि यह अपने गांव लौट सकें।\n\nगांव लौटने की छटपटाहट और कोई जानकारी न होने की बेबसी इनके चेहरे पर देखी जा सकती है। यह दिहारी मजदूर साहिबाबाद के अलग-अलग इलाकों में रह रहे हैं। कोई रिक्शा चलाता है तो कोई ठेले पर माल ढोता था, वहीं बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो दुकानों में कार्यरत थे लेकिन अब इन सबका काम छूट चुका है। काम खोने के बाद जो संचित राशि थी उससे राशन ख रीद कर खाया। अब लॉक डाउन के इस लंबे समय में इन मजदूरों की जेब खाली हो चुकी है और हिम्मत ने जवाब दे दी है। इन दिहारी मजदूरों का कहना है कि इन्हें तो कोई जानकारी ही नहीं। जिला प्रशासन के लोगों को कम से कम झुग्गियां में जाकर भी लोगों का हाल लेना चाहिए ताकि वह लोग अपना दर्द सुना सकें। मजदूरों का कहना है कि यदि प्रशासन इस तरह की कोई पहल कर रहा है तो यह सभी के लिए समान होना चाहिए। मजदूरों ने पंजीकरण कराए जाने की जानकारी न होने पर नाराजगी जताई।\n\n\nमुझे ऐसी कोई जानकारी ही नहीं थी। हम लोग न अखबार पढ़ते हैं न टीवी देखते हैं, ऐसे में हमें कुछ मालूम ही नहीं हो रहा। पैदल बच्चों को लेकर चलने की हिम्मत भी नहीं ऐसे में जब जहां से खाना मिल जाता है, मांगकर खा लेते हैं। प्रशासन यदि ट्रेन और बस चला रही है तो हमारा भी पंजीकरण करे। धर्मेंद्र\n\n\nगाजियाबाद से कोई ट्रेन चल रही है हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। जिला प्रशासन को चाहिए कि इस जानकारी को गरीब बस्तियों में फैलाए ताकि सभी लोग अपने गांव लौट सकें। आज जानकारी हुई है तो कल स्टेशन जाकर मालूम करेंगे। हम चाहते हैं कि अपने गांव लौट जाएं ताकि बच्चों को दो जून की रोटी खिला सकेंगे। मरना भी होगा तो अपनों के बीच मरेंगे। लखन\n\n\nइस तरह की जानकारी जिला प्रशासन को बड़े पैमाने पर प्रसारित करनी चाहिए। हम लोगों को मालूम ही नहीं था कि कोई ट्रेन भी चलेगी। मालूम होता तो हम भी अपना पंजीकरण कराते। प्रशासन को चाहिए कि पंजीकरण करने के लिए वह एक बार सभी मलीन बस्तियों में भी पूछताछ कर ले। ओमवती\n\n\nहम लोग घरों में काम कर अपने परिवार का गुजारा कर रहे थे। वहीं अब सभी सोसायटी में हमारा काम छूट चुका है। कोई भी घर पर नहीं बुलाना चाहता जब काम ही नहीं तो पैसा कहां से मिलेगा। ऐसे में तो अच्छा है कि अपने गांव लौट जाते, और कुछ नहीं तो वहां भूखों नहीं मरेंगे। रेखा\n\n----------\n\nनिशा ठाकुर\n\n\n\n
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