गाजियाबाद। बुलंदशहर के सिकंदराबाद में 24 साल पहले जमीन के विवाद में हुए दोहरे (चाचा-भतीजे) हत्याकांड में अदालत ने तीन दोषियों सुशील उर्फ सुनील, संजय और अवतार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ गोयल ने दो दोषियों पर 60-60 हजार व एक पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। केस की सुनवाई के दौरान दो आरोपी कालीचरण और उसकी पत्नी राजबीरी की मौत हो चुकी थी। जबकि एक आरोपी के नाबालिग होने से उसका मामला किशोर न्यायालय बुलंदशहर में चल रहा है। आरोपी कालीचरण की अर्जी पर हाईकोर्ट के आदेश पर केस की सुनवाई बुलंदशहर से हटाकर गाजियाबाद अदालत में चली थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता वीरेश त्यागी और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता मजीद खान ने बताया कि थाना सिकंदराबाद क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ी गांव निवासी जगपाल और उसके भतीजे सतपाल की गांव में ही रहने वाले कालीचरण से जमीन का विवाद चल रहा था। 23 दिसंबर 1999 को जगपाल और सतपाल अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान कालीचरण अपने परिवार के लोगों के साथ खेत में पहुंचा और जगपाल व सतपाल पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से चाचा-भतीजे की मौके पर ही मौत हो गई थी। जगपाल के भाई ब्रह्मपाल ने मामले की रिपोर्ट सिकंदराबाद थाने में दर्ज कराई। इसमें कालीचरण, उसकी पत्नी राजबीरी, यशपाल, संजय, सुशील उर्फ सुनील, औतार सिंह उर्फ पप्पू व एक नाबालिग को नामजद कराया था। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कालीचरण ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर केस को अन्य जिले की अदालत में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 15 फरवरी 2007 को केस गाजियाबाद की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। वहीं, देरी से आरोप पत्र आने के कारण यशपाल के केस की फाइल अलग कर दी गई थी, जो बुलंदशहर कोर्ट में विचाराधीन है।