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Ghaziabad News: ममता का गला घोंटने की दोषी सौतेली मां व उसकी सहेली को आजीवन कारावास
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गाजियाबाद। मोदीनगर में दो वर्ष पूर्व ममता का गला घोंटने वाली सौतेली मां और उसकी सहेली के खिलाफ अदालत ने मंगलवार को निर्णय सुनाया। इसमें 11 वर्षीय शब्द उर्फ शुब्बी की हत्या के मामले में सौतेली मां रेखा और उसकी सहेली पूनम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार पंचम की अदालत ने दोनों महिलाओं पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ा, बल्कि मां और ममता के रिश्ते पर भी सवाल खड़ा कर दिया। मासूम शब्द का जीवन भले समाप्त कर दिया गया हो, लेकिन अदालत का फैसला उसकी याद में न्याय का दीप जलाता है।
घटना 15 सितंबर 2023 की है। गोविंदपुरी डबल स्टोरी कॉलोनी में रहने वाले राहुल ने अपने बेटे शब्द के अचानक लापता होने की सूचना 16 सितंबर को मोदीनगर थाने में दी थी। शब्द का जन्म राहुल की पहली पत्नी से हुआ था। उसकी दूसरी शादी रेखा से हुई थी, जो अपनी पहली शादी से डेढ़ वर्षीय बेटी लेकर इस परिवार में आई थी। घर में दिखने वाले सामान्य माहौल के पीछे ऐसी त्रासदी पल रही थी, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था।
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शब्द घर में गया, फिर बाहर नहीं आया
15 सितंबर की दोपहर शब्द घर में दाखिल होते हुए तो सीसीटीवी में देखा गया, लेकिन बाहर नहीं आया। इसने पुलिस को चौंका दिया। इसके बाद घर की तलाशी में सेप्टिक टैंक का टूटा हुआ स्लैब और उसे ढकने के लिए रखा गया लकड़ी का फट्टा संदेह का केंद्र बने। जब टैंक की खुदाई कराई गई तो भीतर का दृश्य देखकर हर व्यक्ति सन्न रह गया। भीतर मासूम शब्द का शव था। उसके पैर में चुन्नी से बंधा पत्थर और गले पर चोटों के निशान इस बात के गवाह थे कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। पुलिस के कड़ाई से पूछताछ करने पर रेखा टूट गई। उसने स्वीकार किया कि उसे डर था शब्द बड़ा होकर मां के रूप में स्वीकार नहीं करेगा और उसकी बेटी को भी भाई का स्नेह नहीं मिलेगा। इसी भय ने उसे कातिल बना दिया। इस योजना को अंजाम देने में उसकी सहेली पूनम ने साथ दिया।
टीवी सीरियल से हत्या का तरीका सीखा
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों महिलाओं ने एक टीवी सीरियल से हत्या का तरीका सीखा था। यह तथ्य और भी ज्यादा दर्दनाक है कि मनोरंजन के नाम पर दिखाए गए अपराध से प्रेरणा लेकर दो महिलाएं इतनी बड़ी वारदात करने तक पहुंच गईं। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार पंचम की अदालत ने दोनों पर आरोप सिद्ध पाते हुए उन्हें सजा सुनाई। अदालत का निर्णय न केवल अपराधियों के लिए कठोर दंड का संदेश है, बल्कि समाज को यह भी स्मरण कराता है कि रिश्तों में विश्वास, सुरक्षा और ममता जैसी अमू्ल्य भावनाओं से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
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इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ा, बल्कि मां और ममता के रिश्ते पर भी सवाल खड़ा कर दिया। मासूम शब्द का जीवन भले समाप्त कर दिया गया हो, लेकिन अदालत का फैसला उसकी याद में न्याय का दीप जलाता है।
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घटना 15 सितंबर 2023 की है। गोविंदपुरी डबल स्टोरी कॉलोनी में रहने वाले राहुल ने अपने बेटे शब्द के अचानक लापता होने की सूचना 16 सितंबर को मोदीनगर थाने में दी थी। शब्द का जन्म राहुल की पहली पत्नी से हुआ था। उसकी दूसरी शादी रेखा से हुई थी, जो अपनी पहली शादी से डेढ़ वर्षीय बेटी लेकर इस परिवार में आई थी। घर में दिखने वाले सामान्य माहौल के पीछे ऐसी त्रासदी पल रही थी, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था।
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शब्द घर में गया, फिर बाहर नहीं आया
15 सितंबर की दोपहर शब्द घर में दाखिल होते हुए तो सीसीटीवी में देखा गया, लेकिन बाहर नहीं आया। इसने पुलिस को चौंका दिया। इसके बाद घर की तलाशी में सेप्टिक टैंक का टूटा हुआ स्लैब और उसे ढकने के लिए रखा गया लकड़ी का फट्टा संदेह का केंद्र बने। जब टैंक की खुदाई कराई गई तो भीतर का दृश्य देखकर हर व्यक्ति सन्न रह गया। भीतर मासूम शब्द का शव था। उसके पैर में चुन्नी से बंधा पत्थर और गले पर चोटों के निशान इस बात के गवाह थे कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। पुलिस के कड़ाई से पूछताछ करने पर रेखा टूट गई। उसने स्वीकार किया कि उसे डर था शब्द बड़ा होकर मां के रूप में स्वीकार नहीं करेगा और उसकी बेटी को भी भाई का स्नेह नहीं मिलेगा। इसी भय ने उसे कातिल बना दिया। इस योजना को अंजाम देने में उसकी सहेली पूनम ने साथ दिया।
टीवी सीरियल से हत्या का तरीका सीखा
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों महिलाओं ने एक टीवी सीरियल से हत्या का तरीका सीखा था। यह तथ्य और भी ज्यादा दर्दनाक है कि मनोरंजन के नाम पर दिखाए गए अपराध से प्रेरणा लेकर दो महिलाएं इतनी बड़ी वारदात करने तक पहुंच गईं। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार पंचम की अदालत ने दोनों पर आरोप सिद्ध पाते हुए उन्हें सजा सुनाई। अदालत का निर्णय न केवल अपराधियों के लिए कठोर दंड का संदेश है, बल्कि समाज को यह भी स्मरण कराता है कि रिश्तों में विश्वास, सुरक्षा और ममता जैसी अमू्ल्य भावनाओं से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।