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Ghaziabad News: काम की व्यस्तता में बचपन पर नहीं अपेक्षित ध्यान, बढ़ा कुपोषण
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गाजियाबाद। महानगरीय जीवनशैली की भागदौड़, छोटे परिवार व कामकाजी अभिभावकों की व्यस्तता के बीच नवजात और छोटे बच्चों की देखभाल चुनौती बनती जा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 के आंकड़े भी शुरुआती देखभाल और बच्चों के पोषण की स्थिति में बदलाव की ओर इशारा करते हैं। जिले में प्रसव के बाद शुरुआती दो दिनों में स्वास्थ्यकर्मी से देखभाल पाने वाले बच्चों का आंकड़ा घटा है। साथ ही पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कम वजन की समस्या बढ़ी है। छह से 23 माह के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चों की संख्या भी कम हुई है। जिले में अगस्त में 400 अतिकुपोषित और 1200 कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे। इन्हें 30 सितंबर तक स्वस्थ करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रसव के बाद शुरुआती देखभाल में गिरावट
एनएफएचएस-5 में जन्म के दो दिन के भीतर स्वास्थ्यकर्मी से प्रसवोत्तर देखभाल पाने वाले बच्चों का आंकड़ा 85.3 प्रतिशत था, जो एनएफएचएस-6 में घटकर 81.3 प्रतिशत रह गया। माताओं में भी यह आंकड़ा 84.8 से घटकर 84.2 प्रतिशत हुआ है।
कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा बढ़ा
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में उम्र के अनुपात में कम वजन का आंकड़ा 23.4 से बढ़कर 31.8 प्रतिशत हो गया। लंबाई के अनुपात में कम वजन यानी दुबले बच्चों का प्रतिशत भी 17.1 से बढ़कर 22.6 प्रतिशत पहुंच गया। गंभीर रूप से दुबले बच्चों का आंकड़ा तीन से बढ़कर 4.1 प्रतिशत हुआ है। ये आंकड़े छोटे बच्चों के पोषण और भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत को सामने रखते हैं।
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छोटे बच्चों को पर्याप्त आहार नहीं
छह से 23 माह के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चों का आंकड़ा छह से घटकर पांच प्रतिशत रह गया। मां का दूध पी रहे इसी आयु वर्ग के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वालों का प्रतिशत 7.5 से घटकर 3.3 प्रतिशत रह गया।
जन्म के एक घंटे में स्तनपान बढ़ा
सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने का आंकड़ा 18.4 से बढ़कर 38.2 प्रतिशत हुआ है। वहीं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में दस्त की समस्या 4.7 से बढ़कर 6.3 प्रतिशत दर्ज हुई। लंबाई के अनुपात में कम रहने वाले बच्चों का आंकड़ा 28.2 से घटकर 24.8 प्रतिशत हुआ है। ऐसे में बच्चों के पोषण और शुरुआती देखभाल पर परिवारों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
98 हजार बच्चों को पोषण आहार देने का दावा
जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता चंद्रा ने बताया कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। जिले में 1371 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें करीब 98 हजार बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने वर्तमान में अतिकुपोषित बच्चों को गोद भी लिया है। जिले में करीब 26 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इनके स्वास्थ्य और देखभाल के लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम कर रही हैं।
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प्रसव के बाद शुरुआती देखभाल में गिरावट
एनएफएचएस-5 में जन्म के दो दिन के भीतर स्वास्थ्यकर्मी से प्रसवोत्तर देखभाल पाने वाले बच्चों का आंकड़ा 85.3 प्रतिशत था, जो एनएफएचएस-6 में घटकर 81.3 प्रतिशत रह गया। माताओं में भी यह आंकड़ा 84.8 से घटकर 84.2 प्रतिशत हुआ है।
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कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा बढ़ा
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में उम्र के अनुपात में कम वजन का आंकड़ा 23.4 से बढ़कर 31.8 प्रतिशत हो गया। लंबाई के अनुपात में कम वजन यानी दुबले बच्चों का प्रतिशत भी 17.1 से बढ़कर 22.6 प्रतिशत पहुंच गया। गंभीर रूप से दुबले बच्चों का आंकड़ा तीन से बढ़कर 4.1 प्रतिशत हुआ है। ये आंकड़े छोटे बच्चों के पोषण और भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत को सामने रखते हैं।
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छोटे बच्चों को पर्याप्त आहार नहीं
छह से 23 माह के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चों का आंकड़ा छह से घटकर पांच प्रतिशत रह गया। मां का दूध पी रहे इसी आयु वर्ग के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वालों का प्रतिशत 7.5 से घटकर 3.3 प्रतिशत रह गया।
जन्म के एक घंटे में स्तनपान बढ़ा
सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने का आंकड़ा 18.4 से बढ़कर 38.2 प्रतिशत हुआ है। वहीं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में दस्त की समस्या 4.7 से बढ़कर 6.3 प्रतिशत दर्ज हुई। लंबाई के अनुपात में कम रहने वाले बच्चों का आंकड़ा 28.2 से घटकर 24.8 प्रतिशत हुआ है। ऐसे में बच्चों के पोषण और शुरुआती देखभाल पर परिवारों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
98 हजार बच्चों को पोषण आहार देने का दावा
जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता चंद्रा ने बताया कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। जिले में 1371 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें करीब 98 हजार बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने वर्तमान में अतिकुपोषित बच्चों को गोद भी लिया है। जिले में करीब 26 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इनके स्वास्थ्य और देखभाल के लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम कर रही हैं।