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Ghaziabad News: आठ में से सात चुनाव जीते क्षत्रिय फिर भी इस बार टिकट का टोटा
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गाजियाबाद लोकसभा सीट : भाजपा ने वैश्य और कांग्रेस ने चला ब्राह्मण कार्ड, बसपा के उम्मीदवार पर लगी नजरें
इन्हें मिली जीत
1984 केदारनाथ सिंह कांग्रेस
1991 रमेश चंद तोमर भाजपा
1996 रमेश चंद तोमर भाजपा
1998 रमेश चंद तोमर भाजपा
1999 रमेश चंद तोमर भाजपा
2009 राजनाथ सिंह भाजपा
2014 वीके सिंह भाजपा
2019 वीके सिंह भाजपा
गाजियाबाद। क्षत्रियों का गढ़ कही जाने वाली गाजियाबाद लोकसभा सीट पर इस बार भाजपा और कांग्रेस में से किसी ने क्षत्रिय उम्मीदवार नहीं उतारा है। भाजपा ने पहली बार वैश्य कार्ड चलते हुए अतुल गर्ग को उतारा है जबकि कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार डाॅली शर्मा पर भरोसा किया है। अब नजरें बसपा के टिकट पर लगी हैं। हालांकि, बसपा अब तक ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय से उम्मीदवार उतारती रही है।
परिसीमन के बाद गाजियाबाद लोकसभा सीट पर पहली बार चुनाव 2009 में हुए। तब से 2019 तक हुए तीनों चुनाव में भाजपा को जीत मिली। तीनों उम्मीदवार क्षत्रिय रहे। 2009 में तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह और इसके बाद 2014 और 2019 में जनरल ( रिटायर्ड ) वीके सिंह। इससे पहले सीट हापुड़ के नाम से थी। तब 1991 से 1998 तक लगातार चार बार भाजपा के रमेश चंद तोमर सांसद रहे। इस तरह सात बार जीती है। सातों उम्मीदवार क्षत्रिय रहे हैं।
2004 में कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने भाजपा की जीत पर ब्रेक लगाया था। इस तरह 1991 से 2019 तक हुए आठ चुनाव में सात भाजपा ने जीते और सभी उम्मीदवार क्षत्रिय रहे। 1957 से लेकर 2019 तक के 16 चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों से जीत का रिकाॅर्ड वीके सिंह के नाम है, जो 2014 में 5.67 लाख से ज्यादा वोटों से जीते।
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सबसे ज्यादा बार जीत रमेश चंद तोमर को मिली है। दूसरे स्थान पर वीके सिंह हैं। क्षत्रियों की इसी सफलता की वजह से इस सीट को क्षत्रियों का गढ़ कहा जाने लगा। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर केदारनाथ सिंह भी जीते। वह सुल्तानपुर के निवासी थे और क्षत्रिय ही थे। हालांकि, वैश्य और ब्राह्मण मतदाता भी यहां निर्णायक स्थिति में हैं।
मेरठ मंडल में दो
टिकट देती थी भाजपा
1991 से 1999 तक का दौर ऐसा रहा जब मेरठ मंडल में भाजपा दो क्षत्रिय उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारती थी। इनमें से एक थे रमेश चंद तोमर जो गाजियाबाद से लड़ते थे और दूसरे थे मेरठ लोकसभा सीट से ठाकुर अमरपाल सिंह। इनमें अमरपाल सिंह तीन बार और रमेश चंद तोमर चार बार जीते। परिसीमन के बाद से भाजपा दो की जगह एक टिकट देने लगी। यह गाजियाबाद सीट पर दिया जा रहा था। इस पर ऐसा नहीं किया।
वीके सिंह उत्तराखंड में स्टार प्रचारक
भाजपा ने केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह को उत्तराखंड में स्टार प्रचारक बनाया है। 40स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम 11वें स्थान पर है। इस बार चुनाव न लड़ने की घोषणा करते समय वीके सिंह ने एक्स पर लिखा था कि वह जल्द ही नई भूमिका में नजर आएंगे। अब लग रहा है कि उन्हें पहले ही बता दिया गया था कि इस चुनाव में उनकी भूमिका उम्मीदवार की नहीं, बल्कि स्टार प्रचारक की होगी।
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इन्हें मिली जीत
1984 केदारनाथ सिंह कांग्रेस
1991 रमेश चंद तोमर भाजपा
1996 रमेश चंद तोमर भाजपा
1998 रमेश चंद तोमर भाजपा
1999 रमेश चंद तोमर भाजपा
2009 राजनाथ सिंह भाजपा
2014 वीके सिंह भाजपा
2019 वीके सिंह भाजपा
गाजियाबाद। क्षत्रियों का गढ़ कही जाने वाली गाजियाबाद लोकसभा सीट पर इस बार भाजपा और कांग्रेस में से किसी ने क्षत्रिय उम्मीदवार नहीं उतारा है। भाजपा ने पहली बार वैश्य कार्ड चलते हुए अतुल गर्ग को उतारा है जबकि कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार डाॅली शर्मा पर भरोसा किया है। अब नजरें बसपा के टिकट पर लगी हैं। हालांकि, बसपा अब तक ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय से उम्मीदवार उतारती रही है।
परिसीमन के बाद गाजियाबाद लोकसभा सीट पर पहली बार चुनाव 2009 में हुए। तब से 2019 तक हुए तीनों चुनाव में भाजपा को जीत मिली। तीनों उम्मीदवार क्षत्रिय रहे। 2009 में तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह और इसके बाद 2014 और 2019 में जनरल ( रिटायर्ड ) वीके सिंह। इससे पहले सीट हापुड़ के नाम से थी। तब 1991 से 1998 तक लगातार चार बार भाजपा के रमेश चंद तोमर सांसद रहे। इस तरह सात बार जीती है। सातों उम्मीदवार क्षत्रिय रहे हैं।
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2004 में कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने भाजपा की जीत पर ब्रेक लगाया था। इस तरह 1991 से 2019 तक हुए आठ चुनाव में सात भाजपा ने जीते और सभी उम्मीदवार क्षत्रिय रहे। 1957 से लेकर 2019 तक के 16 चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों से जीत का रिकाॅर्ड वीके सिंह के नाम है, जो 2014 में 5.67 लाख से ज्यादा वोटों से जीते।
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सबसे ज्यादा बार जीत रमेश चंद तोमर को मिली है। दूसरे स्थान पर वीके सिंह हैं। क्षत्रियों की इसी सफलता की वजह से इस सीट को क्षत्रियों का गढ़ कहा जाने लगा। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर केदारनाथ सिंह भी जीते। वह सुल्तानपुर के निवासी थे और क्षत्रिय ही थे। हालांकि, वैश्य और ब्राह्मण मतदाता भी यहां निर्णायक स्थिति में हैं।
मेरठ मंडल में दो
टिकट देती थी भाजपा
1991 से 1999 तक का दौर ऐसा रहा जब मेरठ मंडल में भाजपा दो क्षत्रिय उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारती थी। इनमें से एक थे रमेश चंद तोमर जो गाजियाबाद से लड़ते थे और दूसरे थे मेरठ लोकसभा सीट से ठाकुर अमरपाल सिंह। इनमें अमरपाल सिंह तीन बार और रमेश चंद तोमर चार बार जीते। परिसीमन के बाद से भाजपा दो की जगह एक टिकट देने लगी। यह गाजियाबाद सीट पर दिया जा रहा था। इस पर ऐसा नहीं किया।
वीके सिंह उत्तराखंड में स्टार प्रचारक
भाजपा ने केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह को उत्तराखंड में स्टार प्रचारक बनाया है। 40स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम 11वें स्थान पर है। इस बार चुनाव न लड़ने की घोषणा करते समय वीके सिंह ने एक्स पर लिखा था कि वह जल्द ही नई भूमिका में नजर आएंगे। अब लग रहा है कि उन्हें पहले ही बता दिया गया था कि इस चुनाव में उनकी भूमिका उम्मीदवार की नहीं, बल्कि स्टार प्रचारक की होगी।