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Ghaziabad News: ऐसे अपराधी को जीवित रखना बच्चों के लिए खतरा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 16 Mar 2023 01:23 AM IST
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Keeping such a criminal alive is a danger to the children.
ऐसे अपराधी को जीवित रखना बच्चों के लिए खतरा
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गाजियाबाद। सजा-ए-मौत सुनाने से पहले जज अमित कुमार प्रजापति ने टिप्पणी की, दोषी पाए गए युवक ने सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों का घोर हनन किया है। ऐसी मानसिकता वाले अपराधी को समाज में जीवित रखना अन्य बालक अथवा व्यक्ति को खतरा उत्पन्न करता है। ऐसी दुर्दांत मानसिकता वाले व्यक्ति के द्वारा किए गए अपराध के लिए अधिकतम दण्ड दिए जाने से ही कोमल वय बालकों के प्रति लैंगिक अपराधों से संरक्षण का लक्ष्य पूरा होगा तथा समाज में न्यायिक प्रक्रिया एवं न्याय प्रणाली के प्रति सद्भाव एवं विश्वास उत्पन्न होगा।

जज ने कहा, कोमलवय बालकों के प्रति किए गए अपराध के लिए विशेष रुप से दण्ड का प्रावधान जरूरी है। अभियुक्त को पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत अपराध का दोषी पाया गया है। कपिल मृतका के पड़ोस का रहने वाला है। उसने सुनियोजित तरीके से अपहरण किया। कोमलवय बच्चों के प्रति उत्पन्न होने वाले सहज प्रेम, उदारता एवं दयाभाव भी उसके हृदय में उत्पन्न नहीं हुआ। उसका अपराध मृत्युदण्ड से दण्डित किए जाने योग्य है।
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बच्चियां देवी का स्वरूप, उनका सम्मान जरूरी



विशेष लोक अभियोजक ( पॉक्सो ) संजीव बखारवा ने कहा, लोग देवियों की पूजा करते हैं, नवरात्र में देवी का स्वरूप मान बच्चियों की पूजी की जाती है। बच्चियां देवियों का स्वरूप ही हैं। उनका सम्मान जरूरी है। कुछ लोग उनका सम्मान नहीं करते। इस केस में नौ साल की बच्ची अविकसित कली की तरह थी। अभियुक्त ने उसे विकसित होने से पहले ही कुचल दिया। यह अपराध घृणित प्रकृति का एवं मानवता को शर्मसार करने वाला है। ऐसे हैवानियत भरे अपराधी को मृत्युदण्ड ही दिया जाना चाहिए ताकि समाज में पल रहे ऐसे अपराधियों को सबक मिल सके।
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जज साहब... आपने इंसाफ किया
अल्लाह आपकी हर मुराद पूरी करे


फैसला सुन बच्ची के मां के छलक पड़े आंसू



पॉक्सो कोर्ट के जज अमित कुमार प्रजापति ने बुधवार दोपहर जैसे ही यह फैसला सुनाया, अभियुक्त को मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाया जाए, वैसे ही बच्ची की मां की भावुक हो गई और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। वह अल्लाह को शुक्रिया अदा करने लगीं। उन्होंने कहा, जज साहब, आपने इंसाफ किया है, बहुत अच्छा इंसाफ किया है, हमें आप पर भरोसा था और अल्लाह पर भी। आपने हमारी तकलीफ को समझा, अल्लाह से दुआ करती हूं कि आपकी हर मुराद पूरी करे। बच्ची की लाश मिलने के बाद से हर दिन इसी सोच में बीता है कि इंसाफ कब मिलेगा। इसका भी शुक्रिया है कि इंसाफ में देरी नहीं हुई। बच्ची के पिता ने कहा, बिटिया को आज इंसाफ मिल गया। वह वापस तो नहीं आ सकती लेकिन इस बात का संतोष है कि उसकी जान लेने वाले को फांसी पर लटकाया जाएगा। इसमें देरी न की जाए। उन्होंने बताया कि इस केस में पैरोकार मनोज कुमार ने बड़ी मदद की। वे लोग गरीब हैं। मनोज ने आर्थिक रूप से भी मदद की।


छह दिन में पूरी हुई जांच... छह माह में मिल गया इंसाफ



दरिंदे को सजा- ए -मौत : बिटिया के माता-पिता बोले, पुलिस और कोर्ट को ऐसे ही काम करना चाहिए



गाजियाबाद। नौ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में न तो पुलिस ने जांच में देरी की और न ही कोर्ट में तारीख पर तारीख का इंतजार चला। पुलिस ने संजीदगी दिखाते हुए सिर्फ छह दिन में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद कोर्ट में भी फटाफट सुनवाई हुई। छह महीने में ही इंसाफ हो गया और दोषी को सजा-ए-मौत सुना दी गई। इस फैसले पर बच्ची के माता-पिता ने कहा कि पुलिस और कोर्ट को ऐसी ही काम करना चाहिए। गवाहों को पेश करने से लेकर सुबूत जुटाने तक में भी पुलिस ने तेजी दिखाई।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश किए। ये बेहद अहम थे। उनमें आरोपी कपिल साइकिल पर बच्चियों को ले जाते हुए नजर आया। इससे साबित हो गया कि उसने ही बच्चियों का अपहरण किया। पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की। यह रिपोर्ट मृतक बच्ची की मुट्ठी में मिले बालों की थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने डीएनए जांच में पाया कि बाल आरोपी कपिल के ही हैं। उसका डीएनए सैंपल लेकर बालों के डीएनए से मिलान किया गया था। विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने जांच रिपोर्ट देने में देर नहीं की। कई मामलों में महीनों में रिपोर्ट नहीं आती है और केस लटका रहता है।



छोटी बहन की गवाही पर मिला बड़ी को इंसाफ



इस केस में सबसे अहम गवाही छह साल की बच्ची की रही। वह दरिंदगी की चश्मदीद गवाह है। नौ साल की उसकी बड़ी बहन का भी उसके साथ ही अपहरण किया गया था। आरोपी कपिल दोनों को शाहजहांपुर में गन्ने के खेत में ले गया था। वहां पहले छोटी के साथ ही दुष्कर्म का प्रयास किया था। वह भाग गई। उसने देखा कि उसके सामने ही उसकी बड़ी बहन की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई। विशेष लोक अभियोजक संजीव बखरवा ने बताया कि बच्ची की गवाही बेहद अहम रही।



जुर्म एवं सजा



पॉक्सो एक्ट ( लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 ) : मृत्यु होने तक अभियुक्त को फांसी पर लटकाया जाए।



अपहरण ( धारा 363) : छह वर्ष कारावास, 10 हजार रुपये अर्थदण्ड। अगर अर्थदण्ड न दिया तो छह माह का अतिरिक्त कारावास।



हत्या ( धारा 302) : आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपये अर्थदण्ड। अगर अर्थदण्ड न दिया तो एक साल का अतिरिक्त कारावास।



पिटाई करना ( धारा 323 ) : एक वर्ष का कारावास, एक हजार रुपये अर्थदण्ड। अगर अर्थदण्ड न दिया तो एक माह और जेल में रहना होगा।



( अर्थदण्ड की धनराशि 61 हजार रुपये मृतक बच्ची के पिता को दी जाएगी )



अपराध से इंसाफ तक



18 अगस्त 2022 : अपहरण के बाद बच्ची की हत्या की गई।



19 अगस्त 2022 : केस दर्ज, आरोपी कपिल कश्यप गिरफ्तार।



25 अगस्त 2022 : पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र किया दाखिल।



14 सितंबर 2022 : कोर्ट में कपिल कश्यप पर आरोप तय किए गए।



23 सितंबर 2022 : अदालत में गवाहों के बयान दर्ज होना शुरू हुए।



13 मार्च 2023 : कपिल को दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया गया।
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